जनता के धन से धोखाधड़ी का काला खेल! – द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुनकुरी ने दोषियों की अपील खारिज की, सज़ा बरकरार, जमानत भी नामंजूर.

द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुनकुरी बलराम कुमार देवांगन का आदेश, अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने रखी प्रभावी दलीलें

कुनकुरी, 19 अगस्त 2025 : जशपुर जिले के फरसाबहार ब्लॉक की बहुचर्चित IWMP-2 परियोजना गबन प्रकरण में अदालत ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुनकुरी बलराम कुमार देवांगन ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सज़ा को सही ठहराते हुए आरोपियों की अपील को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं इस मामले में शासन पक्ष की ओर से पैरवी कर रही अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने अदालत में ठोस और सशक्त तर्क प्रस्तुत किए, जिसके आधार पर दोषियों की अपील अस्वीकार कर दी गई।

करोड़ों की योजना, लाखों का गबन

वर्ष 2009-10 में शासन ने इंटीग्रेटेड वाटरशेड मैनेजमेंट प्रोग्राम (IWMP-2, फरसाबहार) के लिए लगभग ₹64 लाख की राशि स्वीकृत की थी। जाँच के दौरान खुलासा हुआ कि केवल लगभग ₹22 लाख ही वास्तविक कार्यों में खर्च हुए, जबकि ₹25 लाख से अधिक राशि सीधे आरोपियों द्वारा निजी खातों में स्थानांतरित कर दी गई। इतना ही नहीं, योजना के तहत 10 हैंडपंप खुदवाने का दावा किया गया था, लेकिन जांच में एक भी हैंडपंप मौजूद नहीं मिला। परियोजना से जुड़े दस्तावेज़, माप पुस्तिका और वाउचर कूटरचित पाए गए। कुल मिलाकर लगभग ₹35 लाख से अधिक की वित्तीय अनियमितता और धोखाधड़ी का मामला सामने आया।

आरोपी और धाराएँ

इस प्रकरण में आरोपी शरद देवांगन, पारस राम बरेठ और अंजुला चौहान के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यास भंग), 420 (धोखाधड़ी), 467-468 (कूटरचना), 471 (कूटरचित दस्तावेज़ का उपयोग) और धारा 34 (साझा आपराधिक आशय) के तहत आरोपित किया गया।

निचली अदालत का फैसला

JMFC कुनकुरी ने 07 दिसम्बर 2019 को तीनों आरोपियों को दोषसिद्ध कर प्रत्येक अपराध में 3-3 वर्ष का सश्रम कारावास और कुल ₹5000 अर्थदंड से दंडित किया था। अर्थदंड न चुकाने पर 50 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भी निर्धारित किया गया।

अपील और अंतिम आदेश

आरोपियों ने इस फैसले को अपर सत्र न्यायालय में चुनौती देते हुए दलील दी थी कि जाँच पक्षपातपूर्ण है और बिना ऑडिट के गबन मानना विधि विरुद्ध है। लेकिन न्यायालय ने अभियोजन के 52 गवाहों और 368 दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट पाया कि आरोपियों ने योजना की राशि का गबन और धोखाधड़ी की है।

द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने कहा कि निचली अदालत का आदेश विधिसम्मत और साक्ष्यों पर आधारित है। इसलिए दोषियों की अपील खारिज की जाती है और जमानत का भी कोई औचित्य नहीं बनता।

अदालत का संदेश

यह फैसला सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

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