15 में से 13 ठेकेदार बाहर – सिर्फ दो को फायदा, फिर भी अधूरा तालाब! क्या यह नवीनीकरण है या 98 लाख का घोटाला?
कुनकुरी, 21 अगस्त 2025 : नगर पंचायत कुनकुरी का विसर्जन तालाब इन दिनों विकास कार्यों से ज्यादा भ्रष्टाचार और राजनीति के कारण सुर्खियों में है। लगभग 98 लाख 31 हजार रुपये की लागत से हो रहे तालाब नवीनीकरण एवं सौंदर्यीकरण का यह काम अब सवालों के घेरे में है। जिस उद्देश्य से इस तालाब का नवीनीकरण शुरू हुआ था, वह पूरा होना तो दूर, इस काम ने नगर की जनता के सामने प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत, फर्जीवाड़े और कमीशनखोरी का असली चेहरा उजागर कर दिया है।
ठेकेदार बनाम अधिकारी – कमीशनखोरी के गंभीर आरोप
कार्य का ठेका पाने वाले ठेकेदार और सह-ठेकेदार ने नगर पंचायत अधिकारियों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि नगर पंचायत के अधिकारी जानबूझकर निर्माण कार्य में बाधा डाल रहे हैं और काम को आगे बढ़ने नहीं दे रहे। इतना ही नहीं, भुगतान के नाम पर मोटा कमीशन मांगने का आरोप भी अधिकारियों पर लगाया गया है। ठेकेदारों के मुताबिक, जब तक कमीशन की मांग पूरी नहीं की जाएगी, तब तक फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जाता। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर की जनता को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर विकास कार्यों के नाम पर जनता के टैक्स का पैसा कहां जा रहा है।
फाइल से गायब दस्तावेज़ और अधूरी कार्यवाही
इस मामले में नगर पंचायत के वर्तमान सीएमओ राजेन्द्र पात्रे ने भी चौंकाने वाली जानकारी दी है। उन्होंने स्वीकार किया है कि यह टेंडर पिछले कार्यकाल का है और 12 दिसंबर 2024 को महेश त्रिपाठी को कार्यादेश जारी किया गया था। काम की अवधि 6 माह तय की गई थी, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बाद भी काम अधूरा पड़ा हुआ है। सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि इस कार्य से जुड़ी फाइल अधूरी है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज़ उसमें से गायब पाए गए हैं। इसका मतलब साफ है कि शुरुआत से ही इस प्रोजेक्ट को गड़बड़ियों और अनियमितताओं से ढका गया है।
टेंडर प्रक्रिया पर सवाल – 15 आवेदन में 13 बाहर, सिर्फ दो को फायदा
तालाब नवीनीकरण के टेंडर की प्रक्रिया की पड़ताल करने पर और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं। ऑनलाइन हुई निविदा में कुल 15 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 13 आवेदनों को मामूली त्रुटि बताकर खारिज कर दिया गया, जबकि केवल दो आवेदन – एक महेश त्रिपाठी और दूसरा आर.के. कंस्ट्रक्शन – स्वीकार किए गए। हैरत की बात यह है कि आर.के. कंस्ट्रक्शन का आवेदन भी अपूर्ण था, फिर भी उसे मान्यता दी गई। अंततः ठेका महेश त्रिपाठी के नाम जारी कर दिया गया, लेकिन काम दोनों मिलकर कर रहे हैं। यह पूरी प्रक्रिया इस बात का पुख्ता सबूत है कि निविदा को पहले से ही तय कर लिया गया था और बाकी ठेकेदारों को केवल औपचारिकता के लिए शामिल किया गया। यह सीधे-सीधे मिलीभगत और भ्रष्टाचार की सुनियोजित योजना को उजागर करता है।
निर्माण स्थल पर अतिक्रमण और प्रशासन की लापरवाही
ठेकेदार ने नगर पंचायत को पत्र लिखकर यह भी शिकायत की है कि निर्माण स्थल पर ट्रांसफार्मर, पंप हाउस, हाई मास्क लाइट, बिजली पोल और अतिक्रमण जैसी गंभीर बाधाएँ मौजूद हैं। इन समस्याओं के कारण काम सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। लेकिन नगर पंचायत की ओर से कोई ठोस कदम उठाने के बजाय केवल औपचारिक कार्रवाई की जा रही है। सीएमओ का कहना है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर राजस्व विभाग को पत्र भेजा गया है। यानी एक विभाग से दूसरे विभाग पर जिम्मेदारी डाल दी गई, जबकि हकीकत यह है कि निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। यह रवैया इस बात को दर्शाता है कि प्रशासन जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय सिर्फ टालमटोल और लीपापोती में लगा हुआ है।
भ्रष्टाचार की मिलीभगत – ऊपर तक पहुंचीं शिकायतें
सूत्रों के अनुसार, इस निविदा की प्रक्रिया में तत्कालीन सीएमओ और ठेकेदारों की मिलीभगत रही है। इस मामले को लेकर नगर पंचायत, कलेक्टर जशपुर, जेडी कार्यालय अंबिकापुर और अन्य उच्चाधिकारियों के पास शिकायतें पहुंच चुकी हैं। लेकिन अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। इससे साफ जाहिर होता है कि या तो शिकायतों को दबाया जा रहा है, या फिर ऊपर के स्तर तक भ्रष्टाचार की जड़ें फैल चुकी हैं।
जनता में आक्रोश – धार्मिक स्थल के नाम पर लूट
कुनकुरी का विसर्जन तालाब केवल एक जलाशय नहीं है, बल्कि नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था का केंद्र है। हर साल हजारों लोग यहां धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं। ऐसे पवित्र स्थल के नाम पर जब जनता के पैसों की लूट की जा रही हो, तो जनता में आक्रोश होना स्वाभाविक है। नगरवासी खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह नवीनीकरण नहीं बल्कि 98 लाख रुपये का घोटाला है। लोगों का कहना है कि प्रशासन ने इस प्रोजेक्ट के जरिए जनता की आस्था और विश्वास के साथ खिलवाड़ किया है।
क्रमशः ………………..
