कुनकुरी कोर्ट का बड़ा फैसला : पत्नी की बेरहमी से हत्या करने वाले पति को सुनाई गई उम्रकैद, न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने कहा– समाज में महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

कुनकुरी, 14 सितम्बर 2025। कुनकुरी की न्यायपालिका ने त्वरित न्याय का एक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए एक हत्या के मामले में दोषसिद्धि का निर्णय सुनाया। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने पत्नी की हत्या के आरोपी प्रताप एक्का (29 वर्ष) को आजीवन कारावास एवं ₹1000 अर्थदण्ड की सजा से दंडित किया। शासन की ओर से इस मामले की प्रभावी पैरवी अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने की।


16 फरवरी 2025 को जशपुर जिले के ग्राम गंझियाडीह फिटिंगपारा में एक वैवाहिक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोपी प्रताप एक्का अपनी पत्नी अलका एक्का से झगड़े के दौरान आपा खो बैठा। उसने पत्नी को बांस के बत्ते से पीटा, जमीन पर पटककर हाथ-मुक्कों से मारा और अंततः गला दबाकर उसकी जान ले ली। यह घटना दोपहर 11 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच हुई।


घटना का विवरण देते हुए मृतका के जीजा विलियम लकड़ा ने पुलिस को बताया कि वह सुबह 11 बजे अलका के घर पहुँचे थे। वहां आरोपी प्रताप अपनी पत्नी से झगड़ रहा था और सबके सामने उसे पीट रहा था। परिजनों ने बीच-बचाव की कोशिश की लेकिन आरोपी नहीं माना। शाम 4:30 बजे सूचना मिली कि अलका की मौत हो चुकी है। जब वे घर पहुँचे तो अलका मृत अवस्था में बिस्तर पर पड़ी थी और उसके चेहरे व नाक पर चोट के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।


विलियम लकड़ा की शिकायत पर थाना-तुमला में उसी रात अपराध क्रमांक 10/2025 दर्ज किया गया। विवेचना की जिम्मेदारी निरीक्षक कोमल सिंह नेताम को मिली। उन्होंने घटनास्थल का मौका नक्शा तैयार किया, पंचनामा कराया और गवाहों के बयान दर्ज किए। आरोपी को अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त बांस का बत्ता (लंबाई 2 फीट 9 इंच, गोलाई 2 इंच) बरामद किया गया। शव का परीक्षण डॉ. विनय भगत द्वारा किया गया, जिन्होंने स्पष्ट किया कि अलका की मौत गला दबाने से सांस अवरुद्ध होने के कारण हुई, जो “हत्यात्मक” है।


मामला न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 11/2025 के तहत चला। सामान्यतः हत्या जैसे गंभीर मामलों में सुनवाई में वर्षों लग जाते हैं, परंतु इस मामले में अदालत ने जल्द ही विचारण पूरा कर दिया।

अभियोजन की ओर से 10 गवाहों को पेश किया गया, जिनमें परिजन, गवाह, विवेचक और चिकित्सक शामिल थे। सभी गवाहियों, मेडिकल रिपोर्ट और जप्त बांस के बत्ते जैसे भौतिक साक्ष्यों ने एक ही ओर इशारा किया—कि हत्या का दोषी प्रताप एक्का ही है।


द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने अपने आदेश में कहा—

पति द्वारा पत्नी की हत्या गंभीर प्रकृति का अपराध है, जो समाज की व्यवस्था के लिए चुनौती है और क्षमा योग्य नहीं है। न्यायालय अपराध के स्वरूप और गंभीरता को देखते हुए उदारता बरतने का कोई आधार नहीं देखता।

न्यायालय ने यह भी कहा कि यह प्रकरण ‘विरलतम से विरल’ श्रेणी का नहीं है, इसलिए मृत्युदण्ड की आवश्यकता नहीं है, किंतु आजीवन कारावास से कम सजा का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है।


  • आजीवन कारावास
  • ₹1000 अर्थदण्ड, न भरने पर 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास
  • गिरफ्तारी की अवधि (17 फरवरी से 12 सितम्बर तक कुल 6 माह 26 दिन) को अंतिम सजा में समायोजित किया जाएगा।
  • जप्त बांस का बत्ता अपील अवधि के बाद नष्ट किया जाएगा।
  • मृतका की संतान न होने के कारण पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के अंतर्गत प्रतिकर नहीं दिया गया।

यह फैसला दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में यदि पुलिस विवेचना तेज और प्रभावी हो तथा अभियोजन पक्ष मजबूती से पैरवी करे तो अदालतें बहुत कम समय में न्याय दिला सकती हैं। केवल तीन माह में सुनवाई पूरी कर दोषसिद्धि का निर्णय सुनाना समाज को यह संदेश देता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को अदालतें बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेंगी।


इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया कि वैवाहिक विवाद के नाम पर हिंसा और हत्या किसी भी रूप में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायालय का यह सख्त फैसला समाज में कानून और न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को और मजबूत करता है।

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