आध्यात्मिक संगम : धर्म और वैदिक संस्कृति का संदेश लेकर आएंगे शंकराचार्य महाराज, उल्हासनगर में उमड़ेगा श्रद्धा का सागर, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज का प्रवचन 16 अक्टूबर को, साईं मसन्द ने किया आमंत्रण.

रायपुर : ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज 16 अक्टूबर को साईं वसणशाह दरबार, उल्हासनगर में दिव्य प्रवचन देंगे। यह आयोजन दरबार के गद्दीनशीन साईं कालीराम साहिब जी की पहल पर और मसन्द सेवाश्रम रायपुर के पीठाधीश साईं जलकुमार मसन्द साहिब के मार्गदर्शन में हो रहा है।
साईं मसन्द साहिब ने बताया कि यह प्रवचन भारत में सनातन वैदिक सिद्धांतों की पुनर्स्थापना और आध्यात्मिक एकता के संदेश को समर्पित है।

ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द महाराज जी का 16 अक्टूबर को साईं वसणशाह दरबार उल्हासनगर में प्रवचन होगा। कार्यक्रम वसणशाह दरबार के गद्दीनशीन साईं कालीराम साहिब जी की पहल पर मसन्द सेवाश्रम रायपुर के पीठाधीश साईं जलकुमार मसन्द साहिब के माध्यम से आयोजित किया गया है। साईं मसन्द साहिब 14 अक्टूबर को रायपुर से उल्हासनगर एवं पूज्यपाद शंकराचार्य महाराज 15 अक्टूबर को वाराणसी से मुम्बई पहुंचेंगे। सिंधी समाज के प्रख्यात संत साईं जलकुमार मसन्द साहिब भारत के शंकराचार्यों के नेतृत्व में गठित अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू संगठन परम धर्म संसद 1008 के संगठन मंत्री हैं।

साईं मसन्द साहिब ने बताया कि यथा राजा तथा प्रजा की उक्ति को ध्यान में रखकर परम धर्म संसद 1008 का उद्देश्य देश में सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित धर्म का शासन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इसमें सफल होने पर देश की आजादी के मूल उद्देश्य के अनुसार हम भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने में भी सफल हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि सनातन वैदिक ज्ञान जहां मानव जीवन को सुखमय और आनन्दमय बनाने हेतु जल, थल व नभ से सम्बंधित उसकी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दार्शनिक, वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक उपाय सुझाता है वहीं उसके मूल उद्देश्य ईश्वर को प्राप्त करने का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

उन्होंने बताया कि तीन-चार वर्षों से परम धर्म संसद 1008 अपने लक्ष्य प्राप्ति हेतु निर्धारित योजना के अंतर्गत देश के हर जिले में गौमाता प्रतिष्ठा अभियान चलाकर हिन्दू नागरिकों को संगठित कर रही है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि जहां एक ओर देश के लाखों हिन्दू धर्मावलंबी हमारे इस अभियान से सतत् जुड़ते जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर विश्व के 108 देश, जहां हिंदू आबादी पर्याप्त संख्या में है के नेतृत्व वर्ग का भी हमें सहयोग मिलने लगा है। हमारा प्रयास है कि गौमाता को पशु सूची से हटा कर केन्द्र सरकार उसे राष्ट्रमाता एवं राज्य सरकारें राज्य माता का दर्ज़ा दें। महाराष्ट्र सरकार ने गौमाता को राज्य माता घोषित कर दिया है।

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