ग्राम बरलिया में महिला के हत्या के आरोपी पुत्र को आजीवन कारावास की सजा.
तत्कालिन थाना प्रभारी चक्रधरनगर निरीक्षक प्रशांत राव और एएसआई नंद कुमार सारथी की सटीक विवेचना से पीड़ित पक्ष को मिला न्याय.
रायगढ़ : रायगढ़ जिले के ग्राम बरलिया में हुई महिला नंदिनी सारथी की हत्या के मामले में अदालत ने उसके पुत्र विजय सारथी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। चक्रधरनगर पुलिस की सटीक और ठोस विवेचना, गवाहों के मजबूत बयान और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य इस निर्णय की आधारशिला बने। अदालत ने आरोपी को उम्रकैद के साथ अर्थदंड से भी दंडित किया है।
रायगढ़ के माननीय षष्ठम अपर सत्र न्यायाधीश श्री अश्वनी कुमार चतुर्वेदी के न्यायालय से महिला के हत्यारे कलयुगी पुत्र को आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया है।
अभियोजन के अनुसार 28 फरवरी 2024 को घटना की सूचना मृतका नंदिनी सारथी के रिश्तेदार कृष्णा सारथी ने दी थी कि उसकी बुआ नंदिनी सारथी (मृतिका) उसके बेटे विजय के साथ रहती थी, 28 की शाम ग्राम बरलिया में नंदिनी सारथी का शव उसके घर अंदर पड़ा था, जिसे गर्दन के पीछे भाग में गले में किसी अज्ञात आरोपी द्वारा चोट पहुंचा कर मृत्यु कारित किया गया है। चक्रधरनगर थाने में अज्ञात आरोपी पर अपराध क्रमांक 127/2024 धारा 302, 201 आईपीसी का अपराध दर्ज किया गया।
मामले की प्रारंभिक जांच विवेचना सहायक उपनिरीक्षक नंदकुमार सारथी द्वारा की गई। पुलिस विवेचना में पाया गया कि आरोपी विजय सारथी ने उसकी मां की कुल्हाड़ी से संघातिक चोट पहुंचा कर हत्या की गई है। विवेचनाधिकारी तत्कालीन थाना प्रभारी चक्रधरनगर निरीक्षक प्रशांत राव द्वारा आरोपी की गिरफ्तारी कर चालान न्यायालय में पेश किया गया। मामले में अभियोजन की ओर न्यायालय में 15 गवाहों का कथन कराया गया और 31 महत्पूर्ण दस्तावेज संकलन कर ठोस सबूत बनाए गए। आरोपी विजय सारथी द्वारा न्यायालय में अपने बचाव में काफी प्रयास किया गया किंतु अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य अखंडनीय रहे और माननीय न्यायाधीश ने पाया कि आरोपी विजय सारथी पिता स्वर्गीय प्रेमलाल सारथी उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम बलिया थाना चक्रधरनगर जिला रायगढ़ के द्वारा ही उसकी मां की कुल्हाड़ी से संघातिक चोट पहुंचा कर हत्या की गई है और नंदिनी सारथी की हत्या के अपराध के साक्ष्य मिटाने कुल्हाड़ी में लगे खून को साफ कर कुल्हाड़ी को घर के सामने छिपा दिया था। माननीय न्यायालय द्वारा 31 अक्टूबर को फैसला सुनाया गया, जिसमें आरोपी को धारा 302 आईपीसी में आजीवन सश्रम कारावास और ₹100 के अर्थदंड तथा साक्ष्य छिपाने की धारा 201 आईपीसी में 3 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹100 के अर्थदंड से दंडित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि माननीय न्यायालय द्वारा पीड़ित पक्ष की क्षतिपूर्ति संबंधित तथ्य पर विचार कर जीवन हानि के मद में दर्शित क्षतिपूर्ति की न्यूनतम सीमा राशि 5 लाख क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की अनुशंसा की गई है। तत्कालिन नगर पुलिस अधीक्षक श्री आकाश शुक्ला (आईपीएस) के सुपरविजन में मामले की विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी चक्रधरनगर निरीक्षक प्रशांत एवं सहायक उपनिरीक्षक नन्द कुमार सारथी द्वारा की गई है। वहीं अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक श्री तन्मय बनर्जी द्वारा पैरवी किया गया है। देखा जाये तो पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग पटेल के कुशल मार्गदर्शन पर लगातार गंभीर मामलों के आरोपियों को न्यायालय से दंडित कराया जा रहा है।
