80 देशों में लोकप्रिय होम्योपैथी : ‘कम डोज, ज्यादा असर’—पॉवर कंपनी में आयोजित कार्यक्रम में होम्योपैथी के रहस्यों का खुलासा ! डॉ. जैन ने बताया कैसे मिनट्स डोज में भी ठीक हो जाती हैं गंभीर बीमारियाँ.

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज में स्वस्थ जीवन में होम्योपैथी की भूमिका पर एक परिचर्चा का आयोजन डगनिया मुख्यालय स्थित सेवा-भवन सभागार में किया गया। इसमें डॉ. ऋतु जैन एवं डॉ. शिल्पा दुबे ने होम्योपैथी को लेकर मिथक और वास्तविकताओं की जानकारी दी।

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर कंपनीज व्दारा आयोजित इस परिचर्चा में अधिकारी-कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। डॉ. जैन ने बताया कि होम्योपैथी की शुरुआत जर्मनी में 18वीं सदी में सैमुअल हैनीमेन ने की थी। इस चिकित्सा पद्धति का विस्तार आज 80 देशों में हो चुका है। भारत में 1948 से इसे मान्यता मिली और यह बेहतर चिकित्सा पद्धति के रूप में सिद्ध हुआ। उन्होंने बताया कि इसमें वनस्पतियों से दवाई तैयार होती है, जिसमें बहुत ही न्यूनतम डोज से इलाज किया जाता है। डॉ. शिल्पा दुबे ने बताया कि होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति में मरीज के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक परिस्थितियों का आकलन करके ही इलाज किया जाता है। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता (मानव संसाधन) श्री विनोद कुमार अग्रवाल ने उन्हें स्मृति-चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया।

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