छत्तीसगढ़ प्रदेश के खेल बजट 2026-27 के लिए सुझाव
कोच और व्यायाम शिक्षकों की नियुक्ति की जाए अनिवार्य
(आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार)
रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। राज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास किया है। इस छोटे से प्रदेश में खेलकूद की गतिविधि बढ़ी है। छत्तीसगढ़ में हाकी, क्रिकेट, बैडमिंटन, तैराकी, एथलेटिक्स, फुटबाल, भारोत्तोलन, तीरंदाजी, टेनिस, बैडमिंटन, कबड्डी, बास्केटबाल मलखंब आदि खेलों में खेल मैदान और प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध हुई है। शुरुआती दौर में खेलकूद हेतु आवश्यक धन राशि के लिए राज्य खेल विभाग, पुलिस प्रशासन, शिक्षा विभाग, आदिम जाति कल्याण विभाग, औद्योगिक घरानों आदि पर ही निर्भर रहना पड़ता था परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शरू की गई खेलो इंडिया कार्यक्रम के साथ अन्य खेल योजनाओं का लाभ मिलने लगा है।
जिसमें केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण नई दिल्ली की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। प्रदेश सरकार खेलों को लोकप्रिय बनाने भरपूर प्रयास कर रही है परंतु भारतीय खेल प्राधिकरण ने रायपुर में क्षेत्रीय खेल प्राधिकरण की स्थापना करके छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों/ कस्बों में खेलों के 37 मिनी खेलकूद प्रशिक्षण केंद्र खोल दिये हैं। इसमें अधिकांशत: ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में सम्मिलित 28 कोर खेल हैं।
हमारे प्रदेश में गांवों की संख्या बीस हजार से अधिक हैं जिनमें 11693 ग्राम पंचायत हैं। कहने का तात्पर्य छत्तीसगढ़ गांवों में बसा है। इसी ग्रामीण अंचल में छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली आत्मा बसती है। अन्य क्षेत्रों के अलावा गांवों में निवास करने वाले खेल प्रतिभाओं को हमने पिछल 25 वर्षों में नहीं पहचाना है। हमारे प्रदेश में न जाने कितने बच्चे, युवा, बुजुर्ग, महिला व पुरुष हैं जो कि प्रतिदिन 20 से 30 किमी पैदल चलते हैं। न जाने कितने हैं जो 40 से 60 किमी सायकल चलाते हैं। न जाने कितने तैराक हैं जो प्रतिदिन 3 से 4 किमी तैरते हैं। न जाने कितने ताकतवर इंसान हैं जो 30 से 50 किलो तक वजन अपने हाथों से उठा लेते हैं। कहने का अर्थ हमारे प्रदेश में खेल से जुड़ी प्रतिभाएं तो हैं परंतु वे सामने नहीं आ पाई है।
अब बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक खेलों के मनोरंजक ढंग से आयोजन से प्रतिभाओं की पहचान हो रही है। इसके साथ ही शाला के विद्यार्थियों में खेल के गुण उभरकर आ रहे हैं। विदेशों में खेल सितारे किसी दूसरे ग्रह से नहीं आते हैं वे भी इसी जगत के रहने वाले हैं बस अंतर यह है कि कम उम्र में उनके बच्चों की खेल प्रतिभा को समझ/पढ़ लिया जाता है। छत्तीसगढ़ में भी खेल प्रशिक्षकों/खेल शिक्षकों की कोई कमी नहीं है। आज हमारे राज्य में अनेक ऐसे युवा बेरोजगार हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 2036 के ओलंपिक खेलों के भारत में आयोजन के प्रयास किए जा रहे हैं तो हमें भी उनके सपने को पूरा करने के लिए आगे आना होगा। प्रशिक्षित कोच और व्यायाम शिक्षकों की पूरे प्रदेश के ब्लाक स्तर के शालाओं में 2026-27 के वित्तीय वर्ष में नियुक्ति किए जाने का प्रावधान होना चाहिए। इसके अलावा उत्कृष्ट घोषित खिलाडिय़ों को स्थायी नौकरी देने के लिए बजट में राशि आबंटित की जानी चाहिए। खेल के मैदान की उपलब्धता बहुत अनिवार्य है।
उसके लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में पांच एकड़, ब्लाक मुख्यालय में आठ एकड़, तहसील में 10 एकड़ तथा जिला स्तर में कम से कम 14 एकड़ भूमि को खेल मैदान के लिए आरक्षित किया जाना चाहिए। यही नहीं आरक्षित भूमि का सीमांकन करके उस क्षेत्र को विकसित भारत-गारंटी फार रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण वीबीजीरामजी के मद से दीवार खड़ी कर देना चाहिए। खेलकूद के लिए 2026-27 में इस तरह के बजट आबंटन से छत्तीसगढ़ में खेल क्रांति आ जायेगी।
