संवेदनशील मामले में सख्ती : चार विशेष टीमों ने घेराबंदी कर सभी आरोपियों को दबोचा, मामला दबाने की धमकी और पैसे का लालच… लेकिन कानून के शिकंजे से नहीं बच सके आरोपी, पुलिस ने रातों-रात 9 आरोपियों को गिरफ्तार कार भेजा न्यायिक अभिरक्षा में.

प्राप्त जानकारी के अनुसार मामले का विवरण इस प्रकार है कि दिनांक 20 फरवरी 2026 को थाना नारायणपुर क्षेत्रांतर्गत एक ग्राम के प्रार्थी ने थाना में रिपोर्ट दर्ज कराया था कि उसकी 35 वर्षीय भतीजी व 13 वर्षीय बेटी, जो कि थाना नारायणपुर क्षेत्रांतर्गत ही एक ग्राम में प्रार्थी की दीदी के यहां, मेहमानी में गए हुए थे। वे दिनांक 17 फरवरी 2026 को मेहमानी से वापस थाना नारायणपुर क्षेत्रांतर्गत अपने गृह ग्राम में वापस लौट रहे थे, इसी दौरान शाम को रास्ते में एक चौक के पास नौ लड़कों के द्वारा प्रार्थी की भतीजी व नाबालिग बेटी के साथ छेड़-छाड़ की गई, जिससे भयभीत होकर प्रार्थी की भतीजी भाग कर घर आ गई व प्रार्थी को घटना के संबंध में बतायीं। जिस पर प्रार्थी अपनी भतीजी को लेकर घटना-स्थल पर गया, प्रार्थी द्वारा अपनी लड़की को आवाज देने व प्रार्थी व उसकी भतीजी को आता देख, आरोपीगण घटना-स्थल से भाग गए, तत्पश्चात प्रार्थी के द्वारा घटना-स्थल से अपनी 13 वर्षीय नाबालिग बेटी को लेकर घर लाया गया। उक्त घटना के दो दिवस पश्चात प्रार्थी की नाबालिग बेटी ने बताया कि उक्त घटना दिनांक को एक आरोपी के द्वारा प्रार्थी की नाबालिग बेटी को कुछ दूरी पर लेकर, उसके मना करने के बावजूद  जबरन जमीन पर पटक कर दुष्कर्म किया गया है, अन्य आरोपी दूरी पर खड़े होकर घटना को देख रहे थे। जब गांव वालों को उक्त घटना के संबंध में पता चला, तब आरोपियों के द्वारा प्रार्थी को पैसा देकर, मामले को दबाने की बात कहते हुए, थाना नहीं जाने व जान से मारने की भी धमकी दी गई थी।

चूंकि मामला नाबालिग बालिका से दुष्कर्म से संबंधित था, अतः मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीआईजी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जशपुर डॉ. लाल उमेद सिंह के द्वारा आरोपियों की धर-पकड़ हेतु चार टीम गठित की गई थी।  टीम के द्वारा कार्यवाही करते हुए मामले से जुड़े 09 आरोपियों, जिसमें एक 17 वर्षीय विधि से संघर्षरत बालक भी है को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस की पूछताछ पर आरोपियों के द्वारा अपराध स्वीकार कर लिया गया है व बालिग आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है तथा विधि से संघर्षरत बालक को बाल संप्रेषण गृह भेजा जावेगा।

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