वरिष्ठ खेल पत्रकार जसवंत क्लॉडियस का प्रेरक आलेख: 45 की उम्र में भी खेल का जुनून क्यों है असली जीत? वीनस विलियम्स के उदाहरण से बताया—खेल केवल करियर नहीं, जीवन भर का आनंद और अनुशासन

खेल जीवन में देती है आनंद की भरपूरी : टेनिस की महान महिला खिलाड़ी वीनस विलियम्स से प्रेरक प्रसंग

आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार

रायपुर : एक कहावत वर्षों से सुनने में आता है कि समय बड़ा बलवान। जी हां खिलाड़ियों की जिंदगी से यह बात बिलकुल सही साबित होती रही है। जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन के सफर में मनुष्य अनेक उतार-चढ़ाव दौर से गुजरता है। सबसे बड़ी बात व्यक्ति चाहे कृषक हो, राजनेता, वैज्ञानिक, खिलाड़ी, शिक्षक, चिकित्सक, कलाकार, उद्योगपति कुछ भी हो उम्र के बढऩे के साथ ही साथ अपने कार्यक्षेत्र से धीरे-धीरे करके ओझल होने लगता है जबकि उसके प्रतिद्वंद्वी उसको मात देने लगते हैं।

खेलकूद के क्षेत्र में इस तरह के उदाहरण आमतौर पर देखने को मिलते हैं। 10-12 वर्ष की उम्र में खेल आरंभ करके खिलाड़ी स्वयं को चुस्त- दुरुस्त रखे तो 35 से 38 वर्ष की उम्र तक खेल मैदान में अपने आपको ऊंचाईयों में संभालकर रख लेता है। लेकिन उसके पश्चात् युवा खिलाड़ी के खेल मैदान में आने पर वरिष्ठ खिलाड़ी को मैदान छोडऩा ही पड़ता है। लेकिन खेल के प्रति लगाव, समर्पण की वजह से खिलाड़ी खेल मैदान में उतरने हेतु प्रयासरत होते हैं।

हाल ही में यह घटना टेनिस की महान खिलाड़ी वीनस विलियम्स के साथ घटित हुई। 17 जून 1980 को जन्मी वीनस ईबोनी स्टर विलियम्स में जिन्हें वीनस विलियम्स के नाम से जाना जाता है। 08 वर्ष की उम्र से टेनिस रैकेट को हाथ में थामने वाली टेनिस खिलाड़ी वीनस 31 अक्टूबर 1994 ने सिर्फ 14 वर्ष की उम्र में पहली प्रोफेशनल स्पर्धा बैंक ऑफ द वेस्ट क्लासिक चैंपियनशिप में भाग लिया जो कि आयरलैंड कैलिफिोर्निया में सम्पन्न हुई।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब 45 वर्ष की उम्र में टेनिस खेल रही है। पिछले 32वर्षों के दौरान 1100 मैच खेल चुकी है। हम कह सकते हैं 6 फीट एक इंच ऊंची वीनस को टेनिस ने नहीं शारीरिक चोट ने हराया। आज एकल के 49, युगल के 22, मिश्रित युगल के दो प्रतियोगिता को जीता उन्होंने अपने टेनिस कैरियर में अब तक तीन अरब तिहत्तर करोड़ से अधिक धन राशि अर्जित किया है। इतना सब कुछ होते हुए वीनस का मन टेनिस से भरा नहीं है और हाल ही में उन्हें आगामी 01 से 15 मार्च तक दक्षिण कैलीफार्निया में आयोजित होने वाली इंडियन वेल्स टूर्नामेंट में आयोजन समिति ने एकल और युगल दोनों ही श्रेणी में वाइल्ड कार्ड एंट्री दे दी है।

सचमुच वीनस का यह निर्णय लाखों युवा खिलाडिय़ों के लिए प्र्रेरणादायक है। टेनिस जैसे खेल में सब कुछ पा लेने के बाद वीनस का यह कदम साहस की मिसाल है। उन्होंने ढलती उम्र में कोर्ट में उतरने का कदम उठाकर यह साबित कर दिया कि उनके लिए हार या जीत मायने नहीं रखता वे खेल को शारीरिक, मानसिक रूप से स्वस्थ रखने का साधन और जीवन में आनंद की भरपूरी का मार्ग मानती हैं। हम अपने आसपास देखते हैं कि कई खिलाड़ी खेल को एक निश्चित समय तक धन अर्जित करने का साधन समझते हैं।

खेल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के बाद खिलाडिय़ों को नौकरी दे दी जाती है. नौकरी मिलने के कुछ दिनों बाद ही मतलबी खिलाड़ी उस खेल को आनेवाली पीढ़ी को सिखाने के बदले खेलना ही छोड़ देते हैं। 45 वर्ष की उम्र तक टेनिस के लिए अपने बचपन /युवावस्था याने जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण दौर सबकुछ न्यौछावर कर देने वाली वीनस को खेल चाहे जो भी हो आज के खिलाडिय़ों की आदर्श मानना चाहिए़। जिस खेल ने प्रसिद्धि दी जिससे सामाजिक, पारिवारिक, मान प्रतिष्ठा मिली. जिस टेनिस ने वीनस को विश्व स्तरीय पहचान दी उससे जुड़े रहना ही उन्होंने उचित माना है।

एक खेल से जुड़कर खिलाड़ी कैरियर ही नहीं बनाता है बल्कि प्रत्येक बच्चे, किशोर, युवा को स्वस्थ्य और फिट रहने का संदेश देता है। वही संदेश 45 वर्ष की उम्र में वीनस के खेल के प्रति लगाव ने आज सारे जगत के साथ भारत में भी प्रभावशील हो गया है। आने वाली पीढ़ी के लिए वीनस का खेल जीवन एक सबक है कि व्यक्ति निश्चिय कर ले तो वह दल वाले खेल ही नहीं बल्कि एकल/युगल वाले खेल से भी अपनी अलग पहचान बना सकता है। ऐसे महान विभूतियों के बारे में प्राथमिक स्तर के शालेय शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।

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