45वीं राष्ट्रीय ओपन तथा 23 वीं महिला टीम शतरंज प्रतियोगिता रायपुर में संपन्न : खिलाड़ियों को खेल द्वारा कैरियर गाइडेंस जरूर
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ खेल पत्रकार, रायपुर
रायपुर : यह माना जाता है कि शतरंज खेल की शुरुवात भारत में हुई। 6वीं सदी में गुप्त साम्राज्य के अंतर्गत ईसा पूर्व छठवीं सदी में यह खेल शुरुवाती दौर में चतुरंगा के नाम से जाना जाता था। आगे चलकर यह खेल मुगल शासकों द्वारा परसिया तक पहुंच गया बाद में वहां से रुस व स्पेन होते हुए यूरोप तक पहुंचकर पूरी दुनियां में फैल गया । फिर आधुनिक काल में चतुरंगा को आखिरकर नियमों में कुछ बदलाव के साथ शतरंज नाम दिया गया।
आज संसार में भारत शतरंज की बड़ी शक्ति के रूप में जाना जाता है। शतरंज दो खिलाड़ियों के बीच सीधी भिड़ंत वाला खेल है। समय के परिवर्तन के साथ- साथ इसकी विभिन्न प्रतियोगिता के प्रारूप को आकर्षक व लोकप्रिय बनाने की कोशिश में खेल के संचालन के तरीके व नियम में कुछ बदलाव किये गये हैं. रायपुर में गत 16 से 22 मार्च तक राष्ट्रीय शतरंज स्पर्धा संपन्न हुई। छत्तीसगढ़ जैसे नये राज्यों में देश विदेश के प्रसिद्ध खेलों को लोकप्रिय बनाने की जिम्मेदारी मुख्य तौर पर शतरंज के राष्ट्रीय व स्थानीय राज्य स्तरीय फेडरेशन को है।
इस दिशा में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पश्चात पिछले 25 वर्षों में अनेकों ओलंपिक तथा नान ओलंपिक खेलों की राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा का आयोजन निरंतर किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख शतरंज खिलाड़ियों मेंं सुश्री किरण अग्रवाल, रविकुमार, एस धनंजय, श्रीनाथ राव है। इनमें से सिर्फ श्रीनाथ राव इंटरनेशनल मास्टर बने। छत्तीसगढ़ की ए टीम की ओर से टीम चैंपियनशिप में कप्तान रविकुमार के नेतृत्व में स्पर्श खंडलवाल, यशद बंबलेश्वर, विनोद शर्मा तथा शैलेष डाकलिया ने भाग लिया। महिला वर्ग में तनिषा ड्रोलिया (कप्तान) राशि वरुणकर, प्रतिष्ठा अहिरवार, परिधि, तथा अनिका शामिल थी।
पीरधि ने महिला ग्रेंडमास्टर स्वाति घाटे को पराजित करके बड़ी उपलब्धि हासिल की। इस तरह की टीम चैंपियनशिप और महिला वर्ग की टीम चैंपियनशिप में भले ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने पदक हासिल नहीं किया परंतु इससे स्पष्ट हो गया कि हमारे प्रदेश में शतरंज के खेल को अपनाने वालों की कोई कमी नहीं है तथा आने वाले समय में अनुभव तथा प्रशिक्षण के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाने के काबिल हैं।
छत्तीसगढ़ में शतरंज की प्रतिभाओं में से एक 10 वर्षीया अनिका रेड्डी गोलुगुरी ने 60 वर्षीया महिला फीडे मास्टर सरिता को ड्रा करने पर मजबूर किया। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता को जीतने वाले खिलाड़ियों का अध्ययन करने से पता चलता है कि ये सभी खिलाड़ी किसी ना किसी संस्था में कार्यरत हैं। अभी छत्तीसगढ में इस तरह की जागरूकता लाने की जरूरत है कि खेल चाहे जो भी हो खिलाड़ी एक बार ऊंचाई को प्राप्त कर लेता है तो फिर शासकीय गैर शासकीय, निजी संस्था, सार्वजनिक उपक्रम में उनको खेल कोटे से नौकरी मिल जाती है। यह भी सत्य है कि जब किसी खिलाड़ी का कैरियर उज्जवल है तो उनके माता पिता अभिभावक भी उन्हें ऐसे खेल में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
छत्तीसगढ़ में खेल से कैरियर की जानकारी को उपलब्ध करना उतना ही आवश्यक है जितना कि किसी स्पर्धा में भाग लेना या फिर किसी खेल में अभ्यास करना। इस स्पर्धा में 23 वीं नेशनल महिला टीम मुकाबले को पेट्रोलियम स्पोर्ट्स बोर्ड ने जीता जबकि एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया की महिला टीम दूसरे स्थान पर रही।
पं. बंगाल, उत्तरप्रदेश, आंध्रप्रदेश तथा तेलांगाना ए ने क्रमश: तीसरे से छठा स्थान पाया। इसके साथ ही ओपन वर्ग में रेलवे स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड चैंपियन बनी।अब जबकि स्पष्ट है कि उपरोक्त सभी टीम के खिलाड़ी किसी न किसी संस्था में कार्यरत है जहां पर उनको सम्मानजनक पद के साथ अच्छी तनख्वाह मिलती है अतः ऐसी व्यवस्था की जाएं ताकि छत्तीसगढ़ के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को भी प्रतिष्ठापूर्ण संस्था में अपनी सेवा देने का अवसर मिल सकेगा साथ ही साथ वे अपनी खेल प्रतिभा का भी प्रदर्शन कर सके ताकि न सिर्फ अपना बल्कि अपने परिवार, अपने राज्य ,अपने राष्ट्र का नाम रोशन कर सकेंगे।
