खौफनाक वारदात: गुस्से में भाई ने भाभी का सिर कुचला, खून से सनी टांगी बनी सबूत— कुनकुरी की अदालत ने कहा ‘स्पष्ट हत्या’, सुनाई उम्रकैद की सजा

कुनकुरी, 15 अप्रैल 2026 | विशेष समाचार | सागर जोशी (संपादक)

रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर देने वाली एक दिल दहला देने वाली घटना में भाई ने ही अपने घर की खुशियों को खून से रंग दिया। जमीन विवाद की चिंगारी इतनी भड़क उठी कि उसने एक महिला की जान ले ली और एक परिवार को हमेशा के लिए बिखेर दिया। इस सनसनीखेज हत्याकांड में कुनकुरी की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अदालत का फैसला

द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने आरोपी गणेश राम चौहान (45 वर्ष), निवासी हर्राडांड़, थाना कुनकुरी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत दोषी ठहराया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने प्रभावी पैरवी करते हुए मामले को मजबूत तरीके से प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास एवं ₹1000 अर्थदंड की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना 10 मार्च 2024 की है, जब ग्राम हर्राडांड़ अटल चौक के पास आरोपी ने अपनी ही भाभी चम्पा बाई पर टांगी (कुल्हाड़ी) से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जमीन और पेड़ काटने को लेकर चल रहे विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। गुस्से में आरोपी ने महिला के सिर और माथे पर 3 से 4 बार वार किए, जिससे वह लहूलुहान होकर मौके पर गिर पड़ी। गंभीर चोटों के कारण उसकी मृत्यु हो गई।

कैसे खुला मामला?

घटना की सूचना मृतका के पति को फोन के माध्यम से मिली। जब वह मौके पर पहुंचे, तो पत्नी खून से सनी जमीन पर पड़ी मिली। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी।

पुलिस जांच में क्या मिला?

पुलिस जांच में आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य सामने आए। आरोपी के मेमोरण्डम कथन के आधार पर खून लगी टांगी बरामद की गई। घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी और अन्य सामग्री जब्त की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मौत सिर पर गंभीर चोटों के कारण हुई और यह पूर्णतः हत्यात्मक थी। गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने भी आरोपी की संलिप्तता को साबित किया।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा कि सिर जैसे नाजुक अंग पर बार-बार वार करना हत्या के स्पष्ट इरादे को दर्शाता है। न्यायालय ने यह भी माना कि जब प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध हों, तब हत्या के पीछे के कारण का अभाव अभियोजन को प्रभावित नहीं करता। हालांकि, मामले को “विरलतम से विरल” श्रेणी में नहीं मानते हुए मृत्युदंड के बजाय आजीवन कारावास उचित ठहराया गया।

इसके अलावा न्यायालय ने मृतका के पति और पुत्र को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

सामाजिक संदेश

यह फैसला न केवल एक जघन्य अपराध पर न्याय की मुहर है, बल्कि समाज के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि पारिवारिक विवादों को हिंसा में बदलना अंततः विनाश का कारण बनता है। रिश्तों की यह खूनी परिणति आज भी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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