देश भीषण गर्मी की चपेट में: IMD का हीटवेव अलर्ट, 28–29 अप्रैल को चरम पर खतरा—लू बनी ‘साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी’, जानलेवा हो सकती है जरा सी लापरवाही

जशपुर : देश इस समय भीषण गर्मी की ऐसी चपेट में है, जिसने आम जनजीवन को झकझोर कर रख दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा जारी हीटवेव अलर्ट ने साफ संकेत दे दिया है कि यह सिर्फ मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि एक गंभीर संकट की स्थिति है। उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत तक तापमान खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, जहां उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य हाई-रिस्क ज़ोन में आ गए हैं। 28 और 29 अप्रैल को गर्मी अपने चरम पर रहने की आशंका जताई गई है, जिससे हालात और भी भयावह हो सकते हैं।

विशेषज्ञ इस स्थिति को “साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी” मान रहे हैं, क्योंकि इसका असर धीरे-धीरे शरीर पर पड़ता है और कई बार लोग इसकी गंभीरता को समय रहते समझ नहीं पाते। तेज धूप और लू के कारण डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं, मजदूरों और पहले से बीमार लोगों को है। ऐसे में छोटी-सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।

दोपहर 10 बजे से शाम 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है, जब सूरज की तपिश सीधे शरीर पर असर डालती है। इस दौरान बाहर निकलना जोखिम भरा है। यदि बहुत जरूरी हो, तो सिर को ढककर, पानी साथ रखकर और हल्के कपड़े पहनकर ही बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है। वहीं, शरीर में पानी की कमी से बचने के लिए सिर्फ पानी नहीं, बल्कि ORS, नींबू पानी, छाछ और नारियल पानी जैसे पेय पदार्थों का सेवन बेहद जरूरी बताया गया है।

हीट स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। तेज बुखार, पसीना बंद हो जाना, चक्कर आना, उल्टी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत मिलते ही तुरंत सतर्क होना चाहिए। गंभीर स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प है। घर के अंदर भी सावधानी जरूरी है—कमरों को ठंडा और हवादार रखें, बाहर से आने के बाद तुरंत ठंडा पानी न पिएं और शरीर को धीरे-धीरे सामान्य तापमान में आने दें।

बच्चों के लिए भी यह समय बेहद संवेदनशील है। स्कूलों में पानी पीने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है, लेकिन अभिभावकों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे बच्चों को हाइड्रेट रखें और धूप से बचाएं। कुल मिलाकर, यह समय लापरवाही का नहीं बल्कि सतर्कता का है। यदि सावधानी बरती जाए तो इस भीषण गर्मी के प्रकोप से काफी हद तक बचाव संभव है, वरना यह “साइलेंट इमरजेंसी” किसी भी समय बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

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