कुनकुरी (जशपुर): कानून की लंबी प्रक्रिया के बाद जशपुर की कुनकुरी स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए न्याय की मिसाल पेश की है । न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने घोषित अपने निर्णय में मिखैल तिग्गा को वर्ष 2017 के मारपीट मामले में दोषी करार देते हुए उसे तत्काल जेल भेजने का आदेश दिया है । इस महत्वपूर्ण कानूनी लड़ाई में राज्य की ओर से पैरवी करते हुए अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने तथ्यों और साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष रखा, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी की अपील पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए उसे सलाखों के पीछे भेजने का आदेश पारित किया ।
इस फैसले के बाद आरोपी की जमानत को निरस्त कर उसे तुरंत अभिरक्षा में लेने और सजा भुगतने के लिए जिला जेल जशपुर भेजने का आदेश जारी किया गया है ।
क्या था मामला?
मामला 12 अक्टूबर 2017 का है, जब पुरानी रंजिश के चलते मिखैल तिग्गा ने बोरिंग से पानी लेकर लौट रहे स्तानिसलास तिर्की के साथ न केवल अश्लील गाली-गलौज की, बल्कि जान से मारने की धमकी देते हुए खटिया की पाटी (लकड़ी) से उसके पैर पर जानलेवा हमला कर दिया था । इस घटना की रिपोर्ट प्रार्थी कोरनेलियुस तिर्की द्वारा थाना दुलदुला में दर्ज कराई गई थी । अभियोजन ने इस मामले में कुल 8 गवाहों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर ठोस सबूत पेश किए, जिसमें चिकित्सकीय साक्ष्य डॉ. वी. के. इंदवार के कथन और एक्स-रे रिपोर्ट ने हमले की गंभीरता को पुख्ता तौर पर साबित कर दिया ।
अदालत का कड़ा रुख और न्याय का मानवीय पक्ष
विद्वान विचारण न्यायालय ने पूर्व में आरोपी को धारा 325 भा.द.सं. के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ मिखैल तिग्गा ने अपील दायर की थी । हालांकि, सुनवाई के दौरान आरोपी के पक्ष का यह तर्क खारिज हो गया कि अभियोजन की कहानी संदेहास्पद है । न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट माना कि आरोपी का आशय चोट पहुँचाने का ही था । लंबी कानूनी प्रक्रिया और 7 साल तक चले विचारण को ध्यान में रखते हुए, सत्र न्यायालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए 1 वर्ष की मूल सजा को घटाकर 3 माह के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया है, जबकि 500 रुपये के अर्थदंड के आदेश को यथावत रखा गया है । इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून का हाथ अंततः अपराधी तक पहुँच ही जाता है ।
