बैडमिंटन : थामस कप-2026, डेनमार्क में 24 अपैल से 03 मई तक सम्पन्न, राष्ट्रदूत खिलाडिय़ों के सम्मान में कमी, एक दुर्भाग्यपूर्ण कड़ी
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर- छत्तीसगढ़
रायपुर : अन्य खेलों के विश्वकप की तरह बैडमिंटन में थामस कप प्रतियोगिता को इस खेल की विश्व चैंपियनशिप कह सकते हैं। थामस कप में पुरुष खिलाडिय़ों के बीच मुकाबला होता है। भारतीय टीम इस स्पर्धा के सेमीफायनल में फ्रांस से शिकस्त खाकर कांस्य पदक जीत सकी। भारतीय टीम में विश्व में 11वीं वरीयता प्राप्त लक्ष्य सेन तथा 18वीं वरीयता प्राप्त आयुष शेट्टी ,किदांबी श्रीकांत एचएस प्रणय थे जबकि युगल में विश्व में चौथी वरीयता प्राप्त सात्विक साई राज रंकारेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी शामिल थी। वैसे भी बैडमिंटन में एशियाई देशों का दबदबा है।
थामस कप को अब तक इंडोनेशिया ने 14, मलेशिया ने 9, चीन ने 3 फिर भारत जापान डेनमार्क ने एक बार जीता है। 2026 के टूर्नामेंट में 16 देशों की पुरुष टीमों ने भाग लिया जिसमें ग्रुप ए में भारत के साथ चीन, कनाडा,आस्टेलिया की टीम थी। ग्रुप बी में जापान मलेशिया इंग्लैंड, फिनलैंड ग्रुप सी में चाइनीज ताईपे, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया, स्वीडन ग्रुप डी में थाईलैंड, फ्रांस, इंडोनशिया, अल्जीरिया की टीम थी। सेमीफायनल में भारत का मुकाबला फ्रांस के साथ हुआ. फ्रांस की टीम में दुनिया के प्रमुख 20 खिलाडिय़ों में तीन शामिल थे जिसमें विश्व वरीयता में 4 नंबर के क्रिस्टो पोपोव, 10 नंबर अलैक्स लनियार 17 नंबर ट्रोका पोपोव सम्मिलित थे।
भारतीय टीम ने ग्रुप मैच में चीन से पराजित हुई। कनाडा व आस्ट्रेलिया को पराजित करके नाकआउट दौर में प्रवेश किया। क्वार्टर फायनल में भारत ने चीनी ताइपे को 3.0 से परािजत करके सेमीफयनल में प्रवेश किया जहां फ्रांस ने उसे 3-0 से हरा दिया। इसकी प्रमुख वजह फ्रांस के खिलाडिय़ों की श्रेष्ठता रही विश्व वरीयता में वैसे भी फ्रांस के खिलाड़ी भारत के ऊपर थे. 2022 में भारतीय टीम थामस कप विजेता रही थी. बैडमिंटन के भारतीय महिला व पुरुष खिलाडिय़ों के इतिहास पर नजर डालने से पता चलता है कि कम सुविधा के बावजूद उन्होंने बड़ी बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
जैसे भारत की साईना नेहवाल ने 2012 लंदन ओलंपिक में तथा पीवी सिंधू ने 2016 रियो ओलंपिक में रजत जबकि 2020 टोक्यो में कांस्य पदक जीता है। इसके अलावा 1980 और 2001 में क्रमश: प्रकाश पादुकोण व पुलेला गोपीचंद ने प्रतिष्ठित आल इंग्लैंड बैडमिटन टूर्नामेंट के पुरुषों के एकल टाइटिल पर कब्जा जमाया। इस दृष्टि से छत्तीसढ़ की आकर्षि कश्यप, संगीता राजगोपालन, कविता दीक्षित, पुरुष वर्ग में संजय मिश्रा, जयंत देवांगन, समन शुक्ला, ईशान भटनागर आदि प्रमुख शटलर हैं। आज बैडमिंटन में एक से बढ़कर एक प्रतिभा सामने आ रही है।
बैडमिंटन का मुकाबला नई तकनीक, रणनीति की वजह से अत्यंत संघर्षपूर्ण हो गया है। भारत में बैडमिंटन के खिलाडी जो भी उभरकर आ रहे हैं अधिकांश: उनके परिवार, अभिभावक साधन सम्पन्न है। रेकेट से खेले जाने वाले शटल काक की कीमत निरंतर बढ़ती जा रही है। इंडोर स्टेडियम की संख्या गिनी चुनी है उसमें भी बैडमिंटन कोर्ट का निर्माण बहुत कम हुआ है। इतनी विपरीत परिस्थिति में भी हमारे बैडमिंटन खिलाडियों ने जब विश्व में कांस्य जीतकर तीसरा स्थान प्राप्त किया तो हमें ऐसे अंतर्राष्ट्रीय स्तरीय खिलाडिय़ों को राष्ट्रदूत से संबेाधित करना चाहिए और बैडमिंटन ही नहीं किसी भी खेल के खिलाड़ी द्वारा विश्व स्तर की स्पर्धा में पदक जीतकर आये तो उनका पूरी गर्मजोशी से स्वागत करना चाहिए। थामस कप 2026 में कांस्य जीतने वाली टीम के सदस्य टीम के खिलाड़ी सात्विक इस उपलब्धि पर भारत के लोगों के व्यवहार से काफी दुखी हुए। उन्होंने कहा कि हमारे देश के लोग अपने वतन के लिए अपना तन मन धन लगा देने वाले हमारे साथियों को जर्मनी से हैदराबाद हवाई अड्डे से बाहर निकलते तक न तो हमें किसी ने बधाई दी ना ही हमसे कुछ बातचीत की। यहां तक हैदराबाद हवाई अड्डे के बाहर थामसकप उपविजेता टीम के खिलाडिय़ों ने स्वयं कैब बुक किया। याने उन्हें हैदराबाद में न तो कोई प्रशंसक मिले न ही बैडमिंटन फेडरेशन के कोई सदस्य सचमुच यह घटना दुःखद है। इसके लिए भारतीय बैडमंटन संघ व हैदराबाद के पदाधिकारियों के साथ ही टीम प्रबंधन हैं। मीडिया को इन खिलाडिय़ों को भारत आगमन की जानकारी उपलब्ध न कराई जाना बेहद पीड़ादायक है। एक तरफ भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खेल के माध्यम से भारत को विश्व की बड़ी ताकत बनाने प्रयासरत हैं दूसरी तरफ हमारे देश के खेलप्रेमी अगर किसी एक खेल के खिलाडिय़ों को भगवान समझने लगे हैं तो यह परिस्थिति भारत के खेल के उज्ज्वल भविष्य के लिए घातक है।
