कुनकुरी कोर्ट से गूंजी न्याय की सबसे बड़ी धमक : छात्रा की अस्मत लूटने वाले दरिंदे को ‘आखिरी सांस तक’ उम्रकैद, फैसले ने पूरे इलाके में मचा दी सनसनी

महिलाओं की अस्मिता से खिलवाड़ करने वालों को कड़ा संदेश, कोर्ट बोला – “बलात्कार केवल शारीरिक नहीं, मानसिक हिंसा भी है”

कुनकुरी | सागर जोशी – संपादक | विशेष समाचार

“न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए” — इस सिद्धांत को चरितार्थ करते हुए जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाते हुए बलात्कार के दोषी को ‘आखिरी सांस तक’ उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत के इस फैसले ने न केवल पीड़िता को न्याय दिलाने का कार्य किया है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश भी दिया है कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए कानून में कोई नरमी नहीं है।

कोर्ट ने कहा – महिलाओं के खिलाफ अपराध समाज के लिए खतरा

द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने आरोपी अंकित खाखा को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए कठोर दंड सुनाया। न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि बलात्कार केवल एक शारीरिक अपराध नहीं, बल्कि पीड़िता की आत्मा और मानसिक स्थिति पर गहरा आघात पहुंचाने वाली अमानवीय हिंसा है, जिसका दर्द जीवनभर पीछा नहीं छोड़ता। अदालत ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की सहानुभूति न्याय व्यवस्था और समाज दोनों के साथ अन्याय होगा।

पानी मांगने के बहाने वारदात को दिया था अंजाम

मामले के अनुसार, 25 अप्रैल 2025 की रात आरोपी ने छात्रा के कमरे में जबरन प्रवेश कर उसके साथ दुष्कर्म किया था। घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर वैज्ञानिक साक्ष्यों, एफएसएल रिपोर्ट और गवाहों के आधार पर जांच पूरी की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बेहद सशक्त तरीके से अपना पक्ष रखा। अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने अपराध की गंभीरता, पीड़िता की मानसिक स्थिति और समाज पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का हवाला देते हुए आरोपी के लिए कठोरतम सजा की मांग की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष यह सिद्ध किया कि आरोपी ने योजनाबद्ध तरीके से अपराध को अंजाम दिया और पीड़िता को धमकाने का भी प्रयास किया।

आरोपी को मिली ये सजा

साक्ष्यों और गवाहों से संतुष्ट होकर न्यायालय ने आरोपी अंकित खाखा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 के तहत बलात्कार का दोषी मानते हुए आजीवन सश्रम कारावास एवं 1000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 331(7) के तहत रात्रि में गृहभेदन के अपराध में 10 वर्ष का सश्रम कारावास, धारा 127(2) के तहत बंधक बनाने के अपराध में 1 वर्ष तथा धारा 351(3) के तहत आपराधिक धमकी देने के मामले में 2 वर्ष के सश्रम कारावास और अलग-अलग अर्थदंड से दंडित किया गया। न्यायालय ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

पीड़िता को मिलेगा प्रतिकर

अदालत ने केवल अपराधी को दंडित करने तक ही अपने फैसले को सीमित नहीं रखा, बल्कि पीड़िता के पुनर्वास और मानसिक-शारीरिक क्षति को ध्यान में रखते हुए पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा प्रदान करने के निर्देश भी दिए। इसके लिए आदेश की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जशपुर को भेजी गई है।

जमानत निरस्त, जेल भेजने का आदेश

फैसले के बाद आरोपी की जमानत तत्काल निरस्त कर उसे जेल भेजने का आदेश दिया गया। कुनकुरी न्यायालय का यह निर्णय जिले ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। न्यायालय के इस फैसले ने यह संदेश दिया है कि कानून की नजर में महिलाओं की गरिमा सर्वोच्च है और उनके सम्मान के खिलाफ उठाया गया हर कदम कठोर दंड को आमंत्रित करेगा।

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