श्री जगन्नाथ मंदिर स्थापना प्रथम वर्षगांठ महोत्सव में शुरू हुआ हरि कीर्तन अष्ट प्रहरी महायज्ञ,
रात्रि मशहूर कीर्तन गायकों एवं वादकों का होगा समागम.
जशपुर/दोकड़ा : दोकड़ा की पावन धरती इन दिनों भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है। श्री जगन्नाथ मंदिर स्थापना प्रथम वर्षगांठ महोत्सव के अवसर पर आयोजित हरि कीर्तन अष्ट प्रहरी महायज्ञ ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया है। “हरे कृष्ण हरे राम” और “जय जगन्नाथ” के जयघोषों के बीच श्रद्धालुओं का उमड़ा सैलाब इस महोत्सव को ऐतिहासिक बना रहा है।
ऐतिहासिक एवं श्रद्धा के केंद्र श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में स्थापना के प्रथम वर्षगांठ महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार से भव्य हरि कीर्तन अष्ट प्रहरी महायज्ञ का शुभारंभ हो गया। सुबह से ही मंदिर परिसर “हरे कृष्ण हरे राम” एवं “जय जगन्नाथ” के जयकारों से गूंज उठा। इस धार्मिक आयोजन में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय विशेष रूप से सम्मिलित हुईं और भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। महोत्सव में छत्तीसगढ़ सहित ओडिशा एवं झारखंड राज्य के प्रसिद्ध कीर्तन गायकों एवं मंडलियों का भव्य समागम हो रहा है। संगीतमय हरिनाम संकीर्तन, मृदंग, झांझ एवं भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है। दूर-दूर से श्रद्धालु महायज्ञ एवं हरि कीर्तन में सम्मिलित होने दोकड़ा पहुंच रहे हैं।

मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सजावट, पारंपरिक झांकियों एवं धार्मिक प्रतीकों से भव्य रूप दिया गया है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, बैठने एवं महाप्रसाद वितरण की विशेष व्यवस्था की गई है। आयोजन समिति के अनुसार संध्या आरती में हजारों श्रद्धालुओं के सम्मिलित होने की संभावना है। संध्या के समय दीपों एवं भक्ति संगीत से मंदिर परिसर दिव्य आभा से आलोकित हो उठेगा। आयोजन समिति ने बताया कि तीन दिवसीय इस धार्मिक महोत्सव का समापन शनिवार को पूर्णाहुति, दधीभजन एवं नगर भ्रमण के साथ होगा। महोत्सव क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश दे रहा है। गौरतलब है कि दोकड़ा का श्री जगन्नाथ मंदिर क्षेत्र की आस्था एवं परंपरा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। वर्ष 1942 से यहां भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की परंपरा चली आ रही है, जबकि मंदिर के जीर्णोद्धार एवं भव्य निर्माण कार्य की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय द्वारा मंदिर की नींव रखी गई थी तथा 25 मई 2025 को मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा का समारोह संपन्न हुआ था।
