दोकड़ा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब : 108 कलशों से महाप्रभु जगन्नाथ का दिव्य महारण स्नान सम्पन्न, दिव्य स्नान के बाद अनसर में महाप्रभु ! अब 15 दिनों तक नहीं होंगे दर्शन, महारण स्नान के बाद 15 दिनों के लिए पट हुए बंद !

ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में स्नान पूर्णिमा का पावन पर्व सोमवार को श्रद्धा, आस्था और भक्ति के अद्भुत वातावरण में धूमधाम से मनाया गया। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा का 108 पवित्र कलशों के सुगंधित जल से वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महारण स्नान (महाभिषेक) किया गया। पूरे मंदिर परिसर में “जय जगन्नाथ” के जयघोष, भजन-कीर्तन और शंखध्वनि से भक्तिमय माहौल बना रहा।महाभिषेक के पश्चात भगवान का दिव्य गजानन वेश धारण कराया गया,साथ ही महाप्रभु जी को 56 भोग लगाया गया। जिसके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। कार्यक्रम के अंत में महाआरती एवं महाप्रसाद वितरण किया गया।

धार्मिक परंपरा के अनुसार स्नान पूर्णिमा पर 108 कलशों के जल से महाभिषेक के बाद भगवान श्री जगन्नाथ, श्री बलभद्र एवं माता सुभद्रा 15 दिनों तक ‘अनसर काल’ में रहेंगे। मान्यता है कि अधिक स्नान के कारण महाप्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं, इसलिए इस अवधि में वे विश्राम करते हैं और श्रद्धालुओं को प्रत्यक्ष दर्शन नहीं होते। इस दौरान विशेष सेवा-पूजा एवं औषधीय उपचार की परंपरा निभाई जाती है। अनसर काल समाप्त होने के बाद भगवान नवयौवन वेश में भक्तों को दर्शन देंगे, जिसके उपरांत भव्य रथयात्रा महोत्सव का आयोजन होगा।

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