जशपुर में शिक्षा की नई पहल: ‘नींव’ कार्यक्रम के माध्यम से सादरी भाषा में होगी बुनियादी शिक्षा
जशपुर : जशपुर जिले में प्राथमिक शिक्षा को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने के उद्देश्य से ‘नींव’ (NEEV) बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। यह कार्यक्रम राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) के नेतृत्व में, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), जशपुर के मार्गदर्शन में तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF), नई दिल्ली द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
स्थानीय भाषा में शिक्षा की नींव
इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के 202 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा-1 एवं कक्षा-2 के बच्चों को उनकी मातृभाषा सादरी भाषा के माध्यम से शिक्षा प्रदान की जाएगी। बहुभाषी शिक्षा का मुख्य उद्देश्य बच्चों को घर की भाषा से विद्यालय की भाषा के बीच सेतु स्थापित करना है, ताकि वे अवधारणाओं को सहजता से समझ सकें और आत्मविश्वास के साथ सीखें।
सांस्कृतिक समावेश के साथ शिक्षण सामग्री का विकास
कार्यक्रम को प्रभावी बनाने हेतु DIET के मार्गदर्शन में स्थानीय शिक्षकों द्वारा विशेष रूप से सादरी भाषा में शिक्षण सामग्री तैयार की गई है। इन सामग्रियों में बच्चों की स्थानीय संस्कृति, परिवेश, लोककथाओं एवं जीवन अनुभवों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
इसमें बिगबुक, चित्र चार्ट, कविता पोस्टर, अभ्यास पुस्तिकाएँ एवं कविता-कहानी संग्रह सम्मिलित हैं। इन सभी सामग्रियों की अंतिम अकादमिक समीक्षा DIET के अकादमिक सदस्यों द्वारा दिनांक 7 जुलाई 2026 को पूर्ण की जा चुकी है, जिससे शिक्षण प्रक्रिया उच्च गुणवत्ता युक्त हो सके।
जिला स्रोत समूह का प्रशिक्षण संपन्न
कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन हेतु चयनित 202 विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए 20 सदस्यों का जिला स्रोत समूह (DRG) गठित किया गया है। इस समूह के लिए DIET, जशपुर में 8 जुलाई 2026 से 11 जुलाई 2026 तक 4-दिवसीय प्रशिक्षण सह-कार्यशाला आयोजित की गई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बहुभाषी शिक्षा के सिद्धांतों एवं सादरी भाषा में निर्मित सामग्री के कक्षा में प्रभावी उपयोग के तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। शिक्षण को रोचक एवं गतिविधि आधारित बनाने हेतु व्यावहारिक डेमो एवं समूह कार्य भी कराए गए।
प्रशिक्षण का समापन
प्रशिक्षण के अंतिम दिवस DIET प्राचार्य श्री एम.जेड.यू. सिद्दीकी ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि “यह कार्यक्रम जशपुर के बच्चों के सीखने के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा और उन्हें अपनी भाषा में सीखने का आत्मविश्वास प्रदान करेगा।” उन्होंने सभी से विद्यालयों में कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करने की अपेक्षा व्यक्त की।
इस पहल के माध्यम से जशपुर जिला प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में समावेशन एवं गुणवत्ता की नई मिसाल स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है।
