फीफा विश्व कप : 2026, अर्जेंटीना और स्पेन में होगी चैंपियन बनने की होड़
दक्षिण अमेरिका या यूरोप में से कौन ले जाएगा फीफा विश्व कप ?
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस , वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर, रायपुर, छ ग.
रायपुर : काफी उतार-चढ़ाव दिल धड़का देने वाले रोमांचक फुटबाल का दौर अब फायनल तक पहुंच गया है। इस समय खेल संसार में सबसे बड़ा यही प्रश्न कौंध रहा है कि इस बार फीफा विश्वकप 2026 का विजेता बनेगा कौन ? फाइनल में जगह बनाने वाली अर्जेंटीना की टीम 1930 से लेकर 2022 याने 22 वें संस्करण तक तीन बार विश्वकप विजेता बन चुकी है। इसमें 1978 में जब अर्जेंटीना में ही विश्वकप का आयोजन हुआ। दूसरी बार 1986 में जबकि मैक्सिको में विश्वकप हुए थे और तीसरी बार 2022 में जब विश्वकप पहली बार एशिया महाद्वीप के कतर में सम्पन्न हुई थी। इनके अलावा अर्जेंटीना की टीम 1930, 1990, 2014 में उपविजेता बनी थी। दूसरी ओर स्पेन की टीम सिर्फ एक बार 2010 में विजेता बनी। अगर हम स्टेडियम के बाहर कागजों में दोनों टीम की तुलना करें तो स्पष्ट है कि फीफा विश्व कप के इतिहास के पिछले 96 वर्षों में अर्जेंटीना की पुरुष टीम तीन बार फुटबाल विश्वकप विजेता, तीन बार उपविजेता रह चुकी है। जबकि स्पेन की टीम केवल एक बार 2010 में विजेता रह चुकी है जबकि 1950 में चौथे स्थान पर रही है। इस तरह 2026 में फीफा विश्वकप के फायनल में अर्जेंटीना का पलड़ा भारी लग रहा है। फिर खेल तो खेल है। आज के आधुनिक तकनीक, कठिन परिश्रम व रणनीति की वजह से हार जीत की भविष्यवाणी करना मुश्किल है। इसके पहले कि हम आगे 2026 के विश्वकप फुटबाल के फाइनल की बात करें, दोनों देशों से संबंधित रोचक तथ्य का उल्लेख ज़रूरी है। अर्जेंटीना देश दक्षिण अमेरिका महाद्वीप में है। इस क्षेत्र में मानव सभ्यता की शुरुआत लगभग 13000 वर्ष पूर्व मानी जाती है जबकि यहां पुरानी पैटागोयिनयन बस्ती थी .अर्जेंटीना प्राचीन स्वदेशी संस्कृतियों का गढ़ रहा है। परंतु इस देश को एक साथ सहेजने में कोई भी नेतृत्व सक्षम नहीं हुआ। जिसकी वजह से 1536 में अर्जेंटीना को स्पेन के तत्कालीन शासकों ने कालोनी के रूप में अपने कब्जे में ले लिया। वास्तव में यूरोप के विभिन्न देशों में 15 वीं सदी से विज्ञान में नए नए आविष्कार के कारण समुद्र मार्ग से यूरोप के चारों तरफ के दूर-दूर तक स्थित भू-भाग की खोज के लिए अनेक साहसी खोजकर्ता सामने आये .इसी वजह से पूरी दुनिया में अंग्रेज, पुर्तगाली, स्पेनिश, फ्रांसीसी आदि साहसी खोजकर्ता दूर दूर जगह की खोज करके अपनी धाक जमाते चले गए . आगे चलकर उन्होंने वहां अपने-अपने देश की कालोनी बना ली। याने उपविनेशवाद स्थापित करने की होड़ लग गई। जैसे माना जाता है कि भारत के गोवा क्षेत्र में सबसे पहले 1498 में पुर्तगाली वास्कोडीगामा समुद्री खोजकर्ता के रूप में आये। ठीक उसी तरह 1516 में अर्जेंटीना की धरती पर खोज अभियान के तहत जुआन डिआज डी सोलिस के साथ स्पेनिश खोजकर्ताओं का आगमन हुआ। जैसे 1744 से भारत पर अंग्रेजों ने अपने आपको स्थापित करना आरंभ किया वैसे ही स्पेन ने अर्जेंटीना के अधिकांश भूभाग पर कब्जा जमाना आरंभ किया। यूरोप के शासकों का इस तरह भूभाग पर कब्जा करने को उनके इतिहासकार महिमा मंडित करते हो लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि की उस क्षेत्र विशेष में सुविधा उपलब्ध कराने के पीछे यूरोपीय शासकों का उदेश्य उनके द्वारा स्थापित कालोनी की कीमती लकडिय़ों, मसालों, प्राकृतिक तेल, गैस, बहुमूल्य धातुओं को अपने-अपने देशों के लिए लाभप्रद बनाना है। अर्जेंटीना में चांदी बड़ी मात्रा में पाई जाती है। अत: इन सब बहुमूल्य वस्तुओं पर नियंत्रण और उसके दोहन के लिए स्पेन के साम्राज्य ने 1776 में रियो डी ला प्लाटा के वायसरायटी की स्थापना की और अर्जेंटीना देश के भू भाग पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया। यहां तक कि वहां की भाषा स्पेनिश बन गई। माना जाता है कि स्पेन ने 1536 से 1816 तक अर्जेंटीना में शासन किया लेकिन जब नेपोलियन ने स्पेन पर कब्जा कर लिया तो अर्जेेंटीना के जागरूक, राष्ट्रप्रेमी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने हाथ से हाथ मिलाया और 280 वर्षों की गुलामी से अर्जेंटीना को 9 जुलाई 1816 को स्पेन से स्वतंत्रता स्वतंत्रता दिलाई। अब देखना है क्या दक्षिण अमरीका महाद्वीप से अर्जेंटीना देश की टीम फुटबाल में अपने देश पर राज करने वाली यूरोप महाद्वीप से स्पेन देश की टीम को चारों खाने चित्
करके विश्व विजेता बनने में सफल हो सकेगी? वैसे अर्जेंटीना की टीम 2026 के इस विश्वकप में अब तक भाग्यशाली रही है। नाक आउट राउंड के सभी मैच में उन्हें कड़ी टक्कर मिली. केप वर्डे, स्वीट्जरलैंड, मिस्र और इग्लैंड सभी से शुरू में पिछडऩे के बाद मुकाबले के अंतिम दस बारह मिनट में विपक्षियों पर गोल करके अर्जेंटीना विजयी हुई तथा फाइनल में पहुंची है। अब देखना है कि क्या इस बार भी भाग्य उनका साथ देगी।
