रेलवे ने रचा नया इतिहास! 500 टन का विशाल स्टील गर्डर 1000 टन क्रॉलर क्रेन से एक झटके में लॉन्च, अमलाई-बुढ़ार ROB-66 ने पकड़ी रफ्तार

अमलाई-बुढ़ार के बीच रोड ओवर ब्रिज-66 के रेलवे हिस्से का स्टील गर्डर सफलतापूर्वक लॉन्च

1000 टन क्षमता वाली आधुनिक क्रॉलर क्रेन से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में पहली बार ओपन वेब स्टील गर्डर की लॉन्चिंग

बिलासपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने आधारभूत संरचना विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अमलाई-बुढ़ार के मध्य निर्माणाधीन रोड ओवर ब्रिज-66 के रेलवे हिस्से का सबसे महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। रविवार, 02 अगस्त 2026 को लगभग 500 टन वजनी ओपन वेब स्टील गर्डर को 1000 टन क्षमता वाली अत्याधुनिक क्रॉलर क्रेन की सहायता से एक ही बार में उठाकर रेलवे ट्रैक के दोनों ओर निर्मित पियरों पर सफलतापूर्वक स्थापित (लॉन्च) किया गया।

यह दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसमें 1000 टन क्षमता वाली क्रॉलर क्रेन के माध्यम से ओपन वेब स्टील गर्डर को आधुनिक तकनीक से लॉन्च किया गया। यह अत्याधुनिक क्रेन भारी-भरकम संरचनाओं को उठाकर निर्धारित स्थान पर अत्यधिक सटीकता एवं संरक्षा के साथ स्थापित करने में सक्षम है।

इस चुनौतीपूर्ण कार्य के लिए रेलवे प्रशासन द्वारा तीन घंटे का ट्रैफिक एवं पावर ब्लॉक प्रदान किया गया। इस अवधि में रेल परिचालन अस्थायी रूप से नियंत्रित रखा गया तथा संरक्षा की दृष्टि से ओवरहेड ट्रैक्शन (ओएचई) की विद्युत आपूर्ति बंद की गई। निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी तकनीकी एवं संरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन करते हुए गर्डर लॉन्चिंग का कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया गया।

इस परियोजना का क्रियान्वयन गतिशक्ति यूनिट, बिलासपुर द्वारा किया जा रहा है। गर्डर लॉन्चिंग के दौरान चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर, डिप्टी चीफ इंजीनियर एवं सहायक मंडल अभियंता (गतिशक्ति) की उपस्थिति में कार्य का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया।

उल्लेखनीय है कि रेलवे हिस्से के निर्माण कार्य की शुरुआत अक्टूबर 2024 में हुई थी। स्टील गर्डर स्थापित होने के बाद अब इसके ऊपर कंक्रीट स्लैब एवं सड़क निर्माण का कार्य लगभग दो माह में पूरा किए जाने का लक्ष्य है। इसके उपरांत अगले लगभग तीन माह में इस बहुप्रतीक्षित आरओबी पर सड़क यातायात प्रारंभ होने की संभावना है।

आरओबी-66 के चालू होने से अमलाई एवं बुढ़ार के बीच आवागमन अधिक संरक्षित, तेज एवं सुगम होगा। साथ ही रेलवे फाटक पर लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिलेगी, क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। यह परियोजना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की संरक्षित, आधुनिक एवं यात्री-केंद्रित अवसंरचना विकसित करने की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

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