बहुचर्चित कुनकुरी चावल घोटाला: 20 साल बाद अदालत में पेश हुआ चालान
करीब 40 हजार पन्नों का दस्तावेज सहित चालान, 92 गवाहों की सूची; दो आरोपी 2006 से जमानत पर, एक की हो चुकी है मृत्यु
जशपुर/कुनकुरी : करीब दो दशक पहले जिले में सुर्खियों में आए बहुचर्चित कुनकुरी चावल घोटाला मामले में लगभग 20 साल बाद राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू/एंटी करप्शन ब्यूरो), रायपुर ने विशेष न्यायालय जशपुर के समक्ष अंतिम प्रतिवेदन (चालान) पेश किया है। प्रकरण में अंतिम प्रतिवेदन क्रमांक 67/2026 दिनांक 6 अगस्त 2026 दर्ज है। 6 अगस्त 2026 को चालान तैयार कर 14 अगस्त 2026 को विशेष न्यायालय जशपुर में पेश किया गया है। मामले में सुनील कुमार निगम और विमल कुमार गर्ग के विरुद्ध विवेचना के बाद चालान पेश किया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी शिव शंकर वैष्णव की वर्ष 2009 में मृत्यु हो चुकी है।
2005 में दर्ज हुआ था मामला
दस्तावेजों के अनुसार मामले की शुरुआत वर्ष 2005 में हुई थी। राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो में प्रथम सूचना रिपोर्ट क्रमांक 01/2005, दिनांक 30 सितंबर 2005 दर्ज की गई थी। मामला कुनकुरी स्थित शासकीय खाद्यान्न गोदाम में चावल के स्टॉक में कथित अनियमितता और कमी से संबंधित था।
विवेचना में भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409, 420, 467, 468 एवं 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(सी), 13(1)(डी) सहपठित धारा 13(2) के तहत अपराध का उल्लेख किया गया है।
जांच में सामने आया चावल के स्टॉक का बड़ा अंतर
विवेचना के दौरान कुनकुरी गोदाम के दस्तावेजों, रजिस्टरों और पंजीयों का परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक जांच के समय विभागीय गणना में 26,626.42 क्विंटल चावल की कमी दर्शाई गई थी।
बाद में संयुक्त जांच समिति द्वारा दस्तावेजों और भौतिक सत्यापन के आधार पर गोदाम में उपलब्ध खाद्यान्न स्टॉक का मिलान किया गया। अंतिम विवेचना में 22,198.52 क्विंटल चावल की वास्तविक कमी के कारण शासन को आर्थिक क्षति होने का उल्लेख किया गया है।
जांच दस्तावेजों में घटना अवधि 1 अप्रैल 2004 से 10 सितंबर 2005 के बीच कुनकुरी प्रदाय केंद्र एवं गोदाम में चावल के आवक-जावक से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच किए जाने का उल्लेख है।
लंबी दूरी के परिवहन और वितरण के रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
विवेचना में उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार इस अवधि में कुनकुरी प्रदाय केंद्र और गोदाम में लंबी दूरी परिवहन यानी एलआरटी तथा कस्टम मिलिंग राइस (सीएमआर) के माध्यम से लगभग 2,07,411.04 क्विंटल चावल जमा किए जाने का रिकॉर्ड मिला।
वहीं विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत प्रदाय केंद्र से चावल के वितरण के रिकॉर्ड की भी जांच की गई। इनमें बीपीएल, एपीएल, अंत्योदय, अन्नपूर्णा, मध्यान्ह भोजन, संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना, राष्ट्रीय काम के बदले अनाज कार्यक्रम और सूखा राहत योजना सहित अन्य योजनाओं के रिकॉर्ड शामिल थे।
आरोपियों की भूमिका का किया गया उल्लेख
अंतिम विवेचना में सुनील कुमार निगम, शिव शंकर वैष्णव और विमल कुमार गर्ग की भूमिका का उल्लेख किया गया है। जांच के अनुसार वास्तविक स्थिति से भिन्न दस्तावेज और अभिलेख तैयार अथवा संधारित कर उनका उपयोग किए जाने की बात सामने आई।
विवेचना में सुनील कुमार निगम एवं शिव शंकर वैष्णव को गोदाम के खाद्यान्न स्टॉक पर पद के अनुसार नियंत्रण एवं महत्वपूर्ण भूमिका में बताया गया है। वहीं विमल कुमार गर्ग की भूमिका के संबंध में 18 डिलीवरी ऑर्डरों से संबंधित 310.13 क्विंटल चावल के परिवहन एवं कथित वितरण का उल्लेख किया गया है।
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि घटना के दौरान शासकीय खाद्यान्न स्टॉक के संबंध में कथित अनियमितताओं के कारण शासन को आर्थिक क्षति हुई।
2006 में हुई थी गिरफ्तारी, दोनों आरोपी जमानत पर
इस मामले में वर्ष 2006 में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई थी। दस्तावेज के अनुसार सुनील कुमार निगम को 29 अगस्त 2006 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि विमल कुमार गर्ग की गिरफ्तारी 10 अक्टूबर 2006 को हुई थी।
दोनों आरोपी न्यायालय के आदेशानुसार जमानत पर रहे हैं। अब करीब दो दशक बाद विवेचना पूरी होने के बाद मामला फिर से न्यायालय के समक्ष पहुंचा है।
एक आरोपी की हो चुकी है मृत्यु
प्रकरण में आरोपी रहे शिव शंकर वैष्णव की मृत्यु 1 सितंबर 2009 को हो चुकी है। अंतिम प्रतिवेदन में उनकी मृत्यु का उल्लेख करते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र सहित आवश्यक दस्तावेज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की बात कही गई है।
करीब 40 हजार पन्ने और 92 गवाह
आरोपियों की ओर से अधिवक्ता जय नारायण प्रसाद ने बताया कि सुनील कुमार निगम और विमल कुमार गर्ग की गिरफ्तारी वर्ष 2006 में हुई थी और दोनों न्यायालय के आदेशानुसार जमानत पर हैं। उन्होंने बताया कि करीब 20 साल बाद लगभग 40 हजार पन्नों के दस्तावेज और 92 गवाहों की सूची के साथ चालान न्यायालय में पेश किया गया है।
अब न्यायालयीन प्रक्रिया पर टिकी नजर
करीब दो दशक तक चली विवेचना के बाद चालान पेश होने से कुनकुरी का बहुचर्चित चावल घोटाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। अब प्रकरण में आगे की कार्रवाई विशेष न्यायालय जशपुर में होने वाली न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत होगी। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर किया जाएगा।
