जशपुर में रेशम क्रांति की नई चमक! CM विष्णुदेव साय ने किया “रेशम से रोशन जशपुर” का शुभारंभ, टसर कोसा उत्पादन में जिला बना छत्तीसगढ़ का नंबर-1, 1939 किसान जुड़े और लाखों की आय से बढ़ा रोजगार का दायरा

मुख्यमंत्री ने रेशम से रोशन जशपुर का किया शुभारंभ

“रेशम से रोशन हो रहा जशपुर, टसर उत्पादन में प्रदेश में प्रथम स्थान”

सरकार की योजनाओं से 1939 किसान जुड़े, 1.21 करोड़ कोसा उत्पादन से 72.84 लाख की आय

जशपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय बगिया में रेशम विभाग छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी “रेशम से रोशन जशपुर” का किया शुभारंभ । इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास, डीएफओ शशी कुमार, और अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत जिले में टसर एवं मलबरी रेशम कीटपालन को नई पहचान मिली है। वर्ष 2025-26 में जशपुर जिला टसर कोसा उत्पादन में पूरे छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान पर रहा है।

जिला रेशम विभाग के अनुसार जिले में 1527.5 हेक्टेयर क्षेत्र में नवीन एवं विकसित पौधरोपण किया गया है। वर्तमान में जिले में 66 रेशम उत्पादन केन्द्र एवं 84 कृमिपालन समूह सक्रिय हैं। कुल 1939 कृमिपालन किसान इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार कर रहे हैं।

टसर कीटपालन से किसानों को 80 हजार से 1.20 लाख तक की आय

पलित प्रजाति के टसर कीटों का मुख्य खाद्य पौधा साजा एवं अर्जुना है। 45 से 55 दिन के कीटपालन के बाद प्रति कृषक को प्रति फसल औसत 15,000 नग टसर ककून प्राप्त होता है। शासन द्वारा उत्पादित ककून को ग्रेड के अनुसार निर्धारित दर पर ककून बैंक के माध्यम से क्रय किया जाता है। ए ग्रेड का दर 5000 रुपये प्रति हजार, बी ग्रेड 4150 रुपये, सी ग्रेड 3000 रुपये निर्धारित है। इससे कृषकों को प्रति फसल 80,000 रुपये से 1,20,000 रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। विभाग द्वारा स्वस्थ डिम्ब समूह मात्र 2 रुपये प्रति समूह की रियायती दर पर एवं निःशुल्क तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।

बीज उत्पादन एवं मलबरी योजना से अतिरिक्त रोजगार

टसर बीज उत्पादन योजना के तहत बीजागार निर्माण के लिए 47,500 रुपये एवं बीज कोसा क्रय हेतु 23,750 रुपये की चक्रीय राशि अनुदान के रूप में दी जा रही है। एक बीज उत्पादक एक फसल में 3000 से 4000 स्वस्थ डिम्ब समूह तैयार कर 10 रुपये प्रति समूह की दर से विक्रय कर सकता है।

मलबरी कीटपालन योजना के अंतर्गत शासन द्वारा निजी भूमि पर शहतूत बगान हेतु 5 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसमें भवन, पौधरोपण, सिंचाई एवं उपकरण शामिल हैं। पूर्ण विकसित बगान से प्रति एकड़ 300-400 किलो उत्पादन होता है, जिससे किसान को 80,000 से 1,00,000 रुपये वार्षिक आय के साथ अंतर फसल का लाभ भी मिल रहा है।

महिलाओं के लिए धागाकरण एवं कताई योजना

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने टसर धागाकरण एवं कताई योजना चलाई जा रही है। इसके तहत 12,000 रुपये की रीलिंग मशीन एवं 9,000 रुपये की स्पीनिंग मशीन शत-प्रतिशत अनुदान पर दी जा रही है। साथ ही एक माह का निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाता है। धागाकरण से 70,000 से 1,20,000 रुपये एवं कताई से 70,000 से 1,00,000 रुपये वार्षिक आय अर्जित की जा सकती है। जिले में वर्तमान में 14 धागाकरण समूह कार्यरत हैं जिन्होंने 15,925.811 किलोग्राम धागा उत्पादन किया है।

उल्लेखनीय उपलब्धि

वर्ष 2025-26 में जिले में 1,21,65,649 नग कोसा फल का उत्पादन हुआ जिसका बाजार मूल्य 72,84,820 रुपये है। इसके साथ ही 4,69,562 स्वस्थ डिम्ब समूह पालित किए गए।

रेशम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इच्छुक किसान नजदीकी रेशम उत्पादन केंद्र में संपर्क कर योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।

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