सनशाइन स्कूल, कुनकुरी में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई गांधी जयंती, नन्हे-मुन्नों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां
कुनकुरी : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के पावन अवसर पर सनशाइन स्कूल, कुनकुरी में एक भव्य और गरिमापूर्ण समारोह का आयोजन किया गया। गुरुवार को प्रातः 8:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक चले इस विशेष आयोजन में विद्यालय का पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलित कर तथा माल्यार्पण के साथ की गई। इस दौरान उपस्थित समस्त शिक्षकों और विद्यार्थियों ने दोनों महान विभूतियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए जीवंत हुए बापू के विचार
इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने गांधीजी के जीवन दर्शन, उनके विचारों तथा सत्य और अहिंसा के संदेश को अपनी कला के माध्यम से जीवंत कर दिया। बच्चों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक नृत्य, सुंदर पेंटिंग प्रदर्शन, ओजस्वी भाषण और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित सभी लोगों का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों के जरिए विद्यार्थियों को स्वच्छता, अनुशासन, सत्य और अहिंसा को अपने दैनिक जीवन में उतारने का संदेश दिया गया।
रेयांश लकड़ा का महात्मा गांधी रूप बना मुख्य आकर्षण
पूरे कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण कक्षा के विद्यार्थी रेयांश लकड़ा रहे, जिन्होंने महात्मा गांधी का सजीव रूप धारण किया था। गांधीजी की वेशभूषा में सजे रेयांश ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति और रूप-सज्जा से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी इस सुंदर प्रस्तुति ने राष्ट्रपिता के व्यक्तित्व और सादगी की एक अद्भुत झलक प्रस्तुत की।
जीवन में आदर्शों को उतारने का संदेश
विद्यालय प्रशासन ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि बापू के विचार केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को उन्हें अपने आचरण और व्यवहार में शामिल करना चाहिए। स्कूल प्रशासन और समस्त स्टाफ सदस्यों की सक्रिय उपस्थिति ने इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के कोमल मन में राष्ट्रप्रेम की भावना के साथ-साथ सत्य, अहिंसा, स्वच्छता और नैतिक मूल्यों का बीजारोपण करना था, ताकि वे भविष्य में एक जिम्मेदार और आदर्श नागरिक बन सकें।
