शिक्षकों से कथित आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना और पद के दुरुपयोग की शिकायत पर कलेक्टर का बड़ा एक्शन
जशपुर : विकासखंड फरसाबहार में शिक्षकों के साथ कथित आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों ने अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। शिक्षकों की ओर से प्राप्त शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए जशपुर कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति को शिकायतों की बिंदुवार जांच कर निर्धारित समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन, विकासखंड इकाई फरसाबहार की ओर से कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन के बाद सामने आई है। शिकायत में विकासखंड फरसाबहार के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) एवं बीआरसीसी (BRCC) के विरुद्ध शिक्षकों के साथ कथित आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना, पद के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार सहित विभिन्न गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
तीन सदस्यीय समिति करेगी शिकायतों की जांच
कलेक्टर कार्यालय जशपुर से जारी आदेश के अनुसार मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति में—
मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत जशपुर — अध्यक्ष
जिला शिक्षा अधिकारी, जशपुर — सदस्य
लेखाधिकारी, जिला पंचायत जशपुर — सदस्य
को शामिल किया गया है।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि समिति को प्राप्त शिकायतों की बिंदुवार विस्तृत जांच करनी होगी और 07 दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। यानी अब शिकायतों की वास्तविकता, आरोपों की गंभीरता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच प्रशासनिक समिति के स्तर पर होगी।
शिकायत में लगाए गए हैं गंभीर आरोप
फेडरेशन की ओर से कलेक्टर को दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया है कि विकासखंड फरसाबहार में कई शिक्षकों द्वारा लिखित शिकायतें प्रस्तुत की गई हैं। इन शिकायतों में संबंधित अधिकारियों पर शिक्षकों के साथ कथित तौर पर पद एवं अधिकारों का दुरुपयोग करने, निरीक्षण, निलंबन, प्रतिकूल प्रतिवेदन, विभागीय कार्रवाई तथा स्थानांतरण जैसे प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल कर दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं।
शिकायत में यह भी आरोप है कि शासकीय कार्यों को प्रभावित करने, निलंबन समाप्त करने, निरीक्षण प्रतिवेदन को अनुकूल बनाने, PFMS भुगतान तथा अन्य विभागीय कार्यों के नाम पर शिक्षकों से कथित रूप से आर्थिक लाभ लेने की शिकायतें सामने आई हैं।
₹50 हजार से लेकर ₹1 लाख तक के कथित लेन-देन के आरोप
मामले को गंभीर बनाने वाली बात यह है कि शिकायत में ₹50 हजार, ₹60 हजार, ₹80 हजार तथा ₹1 लाख तक की कथित राशि मांगने अथवा लेने जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि महिला शिक्षकों को कार्यालय समय के बाद देर रात तक कथित रूप से बुलाकर मानसिक रूप से परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
हालांकि, ये सभी बातें शिकायत में लगाए गए आरोप हैं, जिनकी सत्यता जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। प्रशासन ने भी इन्हीं आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए समिति गठित की है।
शिकायत करने या विरोध करने पर प्रताड़ना का भी आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत करने अथवा किसी प्रकार का विरोध करने पर शिक्षकों को निलंबन, प्रताड़ना और अन्य प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की धमकी दिए जाने की बात भी सामने आई है।
फेडरेशन ने कलेक्टर से मांग की थी कि मामले की जांच स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से कराई जाए तथा शिकायतकर्ताओं को किसी भी प्रकार की प्रताड़ना अथवा प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से सुरक्षा प्रदान की जाए।
जांच के दौरान अधिकारियों को प्रशासनिक कार्यों से अलग रखने की मांग
फेडरेशन ने जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों को जांच अवधि के दौरान प्रशासनिक कार्यों से पृथक रखने की मांग भी की थी, ताकि शिकायतकर्ताओं अथवा गवाहों पर किसी प्रकार का दबाव न बन सके और जांच प्रभावित न हो।
इसके अलावा शिकायतकर्ताओं ने आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों एवं अन्य लागू वैधानिक प्रावधानों के तहत कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब सात दिन में सामने आएगी जांच की तस्वीर
कलेक्टर के आदेश के बाद अब पूरे मामले की निगाहें तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर टिक गई हैं। समिति को शिकायत में उल्लेखित प्रत्येक बिंदु की जांच कर सात दिनों के भीतर प्रतिवेदन देना है।
जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं के बयान, संबंधित अधिकारियों का पक्ष, उपलब्ध दस्तावेज, विभागीय रिकॉर्ड और शिकायत में उल्लेखित आरोपों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय अथवा वैधानिक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। वहीं जांच में आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो जाएगी।
प्रशासनिक कार्रवाई से शिक्षकों में जगी निष्पक्ष जांच की उम्मीद
फिलहाल कलेक्टर द्वारा तत्काल जांच समिति गठित किए जाने को मामले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। शिक्षकों की ओर से लगाए गए गंभीर आरोपों की वास्तविकता अब जांच के बाद ही सामने आएगी। सात दिन की समय-सीमा में जांच रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के निर्देश के कारण यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और शिक्षा विभाग के स्तर पर खासा महत्वपूर्ण रहने वाला है।
