ब्रेकिंग जशपुर: शिक्षा विभाग में फिर मचा हड़कंप! कलेक्टर रोहित व्यास का बड़ा प्रहार, फरसाबहार BRCC देवेन्द्र सिंह तत्काल प्रभाव से निलंबित—आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना और भ्रष्टाचार के आरोप जांच में प्रथम दृष्टया सही!

कलेक्टर रोहित व्यास का कड़ा प्रहार: फरसाबहार BRCC देवेन्द्र सिंह तत्काल प्रभाव से निलंबित

आर्थिक शोषण, मानसिक प्रताड़ना व भ्रष्टाचार की शिकायत जांच में पाई गई सही; शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप

जशपुर : प्रशासनिक शुचिता और भ्रष्टाचार मुक्त कार्यशैली को लेकर जशपुर जिला प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर रोहित व्यास ने शासकीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही, पद के दुरुपयोग, आर्थिक शोषण और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोपों में घिरे फरसाबहार के प्रभारी विकासखण्ड स्त्रोत समन्वयक (BRCC) श्री देवेन्द्र सिंह (मूल पद: उच्च वर्ग शिक्षक) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद जिले के शिक्षा महकमे में जबरदस्त हड़कंप मच गया है।

जांच में खुली पोल, प्रथम दृष्ट्या सही पाए गए आरोप

कार्यालय से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, जिला पंचायत जशपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 1328/लेखा अधि/जाँच/2026, दिनांक 08.09.2026) के आधार पर यह सख्त फैसला लिया गया है।

श्री देवेन्द्र सिंह के खिलाफ लंबे समय से:

  • पद के दुरुपयोग,
  • आर्थिक शोषण एवं वित्तीय अनियमितता/भ्रष्टाचार,
  • और अधीनस्थ कर्मचारियों व शिक्षकों के कथित मानसिक उत्पीड़न

जैसी गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। जिला प्रशासन द्वारा कराई गई प्रारंभिक जांच में ये सभी आरोप प्रथम दृष्ट्या सही पाए गए।

निलंबन अवधि में पत्थलगांव भेजा गया मुख्यालय

आरोपों की गंभीरता और निष्पक्ष विभागीय जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय पत्थलगांव नियत किया गया है। निलंबन काल में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता रहेगी।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश: भ्रष्टाचार व मनमानी पर जीरो टॉलरेंस

कलेक्टर द्वारा इस आदेश की प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, संचालक (लोक शिक्षण), संभागीय आयुक्त (सरगुजा संभाग), मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत) एवं जिला शिक्षा अधिकारी सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित कर दी गई है।

प्रशासन के इस त्वरित एवं सख्त कदम ने यह साफ कर दिया है कि कर्मचारियों के शोषण, वित्तीय अनियमितता और पद के अहंकार पर प्रशासन की पैनी नजर है तथा ऐसे मामलों में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

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