प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व की उपलब्धियों पर छत्तीसगढ़ कैबिनेट की प्रेस वार्ता, सुशासन, विकास, गरीब कल्याण और नक्सलमुक्त बस्तर से लेकर प्रदेश को मिले निवेश व केंद्रीय सहयोग तक गिनाईं बड़ी उपलब्धियां; पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती और ‘आदिम जाति विकास विभाग’ का नाम बदलकर ‘जनजातीय कार्य विभाग’ करने के फैसलों की भी दी जानकारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के नेतृत्व पर छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने पारित किया अभिनंदन प्रस्ताव, सुशासन, गरीब कल्याण और विकास यात्रा को बताया ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा—राष्ट्र प्रथम, जनसेवा और अंत्योदय के संकल्प से देश ने हासिल की नई पहचान; छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के रूप में 3.46 लाख करोड़ रुपये, 8.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव और नक्सलमुक्त बस्तर के विकास को मिली गति

पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को मंजूरी, आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर होगा जनजातीय कार्य विभाग

रायपुर : शारदीय नवरात्रि के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 वर्ष पूर्ण होने पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्र प्रथम, जनसेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और अंत्योदय के सिद्धांतों पर आधारित यात्रा को ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता और मंत्रिपरिषद की ओर से प्रधानमंत्री के कर्मयोग, जनसेवा और दूरदर्शी नेतृत्व का अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य तथा दीर्घकालीन राष्ट्रसेवा की कामना की।

प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशहित में लिए गए अनेक महत्वपूर्ण निर्णयों ने शासन, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक कल्याण, आधारभूत संरचना और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्रों में व्यापक बदलाव का मार्ग प्रशस्त किया है। मंत्रिपरिषद ने जीएएम से लेकर जीएसटी तक, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण और नक्सलवाद से मुक्ति की दिशा में हुए प्रयासों सहित विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों का अभिनंदन किया। साथ ही सहकारी संघवाद के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक संसाधन और भागीदारी उपलब्ध कराने तथा आवास, नल-जल, स्वच्छता, राशन, स्वास्थ्य और स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में सहयोग के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के नेतृत्व का छत्तीसगढ़ पर पड़े प्रभाव को रेखांकित करते हुए राज्य में सुशासन, निवेश, डिजिटल सेवाओं, गरीब कल्याण, कृषि, महिला सशक्तीकरण, जनजातीय विकास, आधारभूत संरचना, ऊर्जा, पर्यटन और नक्सल उन्मूलन से जुड़े कार्यों तथा उपलब्धियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया।

गुजरात में सुशासन के प्रयोगों से लेकर छत्तीसगढ़ में तकनीक आधारित प्रशासन तक

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शासन में तकनीक, जनसंवाद और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली के अनेक प्रयोग किए। इन अनुभवों से आगे चलकर देश के अन्य राज्यों को भी प्रेरणा मिली। वर्ष 2000 में गठित छत्तीसगढ़ ने भी अपनी प्रारंभिक विकास यात्रा में गुजरात मॉडल के अनुभवों से सीखते हुए विकास को गति दी। संवाद और चिंतन शिविर जैसी व्यवस्थाओं को भी राज्य में अपनाया गया।

उन्होंने बताया कि पीएम गतिशक्ति योजना के माध्यम से परियोजनाओं की योजना बनाने और उनकी निगरानी में तकनीक का उपयोग बढ़ा है। छत्तीसगढ़ के लगभग 20 हजार गांवों में से करीब 14 हजार गांवों को जियो-रेफरेंस्ड किया जा चुका है। इससे विकास परियोजनाओं की भौगोलिक स्थिति, योजना निर्माण और निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल रही है।

निवेश के अनुकूल वातावरण बनाने के लिए 450 से अधिक प्रशासनिक सुधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेश आकर्षित करने के लिए गुजरात की वाइब्रेंट गुजरात पहल ने राज्यों को अपनी औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की प्रेरणा दी। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और औद्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संरचनात्मक सुधार किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम, 2026 के माध्यम से औद्योगिक अनुमतियों की प्रक्रिया सरल की गई है। निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं होने की स्थिति में डीम्ड अप्रूवल अर्थात स्वतः स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। वन क्लिक सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से भी निवेश संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है।

दो जनविश्वास अधिनियमों के माध्यम से 279 गैर-जरूरी प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को 24 घंटे और सातों दिन संचालन की अनुमति देने जैसे सुधार भी किए गए हैं। राज्य में कुल 450 से अधिक प्रशासनिक सुधारों के परिणामस्वरूप 8.50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों से 1.60 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।

जैम, डीबीटी और यूपीआई से डिजिटल शासन को मिला विस्तार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनधन, आधार और मोबाइल की त्रयी यानी जैम ने देश में वित्तीय समावेशन को नई गति दी है। इसके माध्यम से 60 करोड़ लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन मॉडल बताया।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हुई है और बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने में मदद मिली है। यूपीआई ने छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए डिजिटल भुगतान को आसान बनाया है।

छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ने के लिए एग्रीस्टैक के तहत 42 लाख फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं। वहीं, ड्रोन आधारित स्वामित्व योजना के माध्यम से 7.51 लाख ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के अधिकार अभिलेख उपलब्ध कराए गए हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन पहलों से पारदर्शिता बढ़ाने, सेवाओं की पहुंच आसान करने और नागरिकों को उनके अधिकार उपलब्ध कराने में सहायता मिली है।

प्रधानमंत्री आवास योजना से ग्रामीण और शहरी परिवारों को मिले पक्के मकान

मुख्यमंत्री ने कहा कि गरीब कल्याण प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के केंद्र में रहा है। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 20.65 लाख और शहरी क्षेत्रों में 2.25 लाख पक्के आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। पिछले पौने तीन वर्षों में ही 11.78 लाख आवासों का निर्माण हुआ है। आवास निर्माण की गति के मामले में राज्य को देश में प्रथम स्थान पर बताया गया।

उन्होंने कहा कि पक्के आवासों से गरीब परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिला है। राज्य सरकार का प्रयास है कि पात्र परिवारों को आवास सहित बुनियादी सुविधाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सके।

स्वच्छ भारत, उज्ज्वला और आयुष्मान भारत से बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

मुख्यमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत छत्तीसगढ़ में हुए कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि 2,437 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से 36 लाख घरेलू शौचालय और 14,970 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। राज्य के 18,653 गांवों को ओडीएफ प्लस घोषित किया गया है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत प्रदेश की 39.73 लाख महिलाओं को निःशुल्क गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत लगभग 2.49 करोड़ पात्र हितग्राहियों के कार्ड बनाए गए हैं, जो पात्र आबादी का करीब 92 प्रतिशत है। योजना के माध्यम से 51.17 लाख हितग्राहियों को लगभग 11,877 करोड़ रुपये का निःशुल्क उपचार मिला है।

वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में 70 वर्ष से अधिक आयु के 6.21 लाख लोगों को आयुष्मान वय-वंदना कार्ड भी जारी किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक स्थिति किसी परिवार की आवास, स्वच्छता, स्वच्छ ईंधन और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बाधा न बने।

संकट के समय खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से मिला संबल

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर वैश्विक ऊर्जा संकट जैसी कठिन परिस्थितियों के दौरान भारत ने आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों का सामना किया। देश में व्यापक टीकाकरण अभियान चलाया गया और वैक्सीन मैत्री पहल के माध्यम से 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। इसे भारत की वसुधैव कुटुंबकम् की भावना का उदाहरण बताया गया।

उन्होंने कहा कि कोरोना काल में शुरू की गई निःशुल्क खाद्यान्न व्यवस्था ने कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को राहत पहुंचाई। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के माध्यम से आज छत्तीसगढ़ के 73 लाख परिवारों के 1.99 करोड़ हितग्राहियों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। केंद्र की इस योजना से राज्य को लगभग 5,600 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्राप्त हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य सुरक्षा की ऐसी व्यवस्थाएं संकट की परिस्थितियों में गरीब परिवारों को राहत देने और उनकी बुनियादी जरूरतों की पूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि, फसल बीमा और धान उपार्जन का लाभ

कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ छत्तीसगढ़ के 26.57 लाख किसानों के खातों में पहुंचा है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 5,064 करोड़ रुपये का केंद्रांश प्रीमियम प्राप्त हुआ है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 की तुलना में राज्य में पंजीकृत किसानों की संख्या 13.17 लाख से बढ़कर 27.53 लाख हो गई है। इसी अवधि में पंजीकृत कृषि रकबा 21.26 लाख से बढ़कर 33 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है।

धान उपार्जन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य में धान उपार्जन 59 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 141 लाख मीट्रिक टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचने की जानकारी दी गई। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से 33,431 करोड़ रुपये तथा बोनस के रूप में 10,292 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को आर्थिक सहायता, फसल बीमा और उपज के भुगतान की व्यवस्थाओं से कृषि क्षेत्र को संबल मिला है। खेती-किसानी को अधिक सक्षम बनाना और किसानों की आय के अवसरों को बढ़ाना विकास की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है।

महतारी वंदन से 68 लाख महिलाओं को सहायता, 14 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण के संबंध में बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की लगभग 68 लाख माताओं-बहनों को प्रतिमाह एक हजार रुपये यानी सालाना 12 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि के साथ राज्य में 14 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन यानी बिहान के माध्यम से 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

वन धन विकास केंद्रों से 70 हजार से अधिक जनजातीय महिलाएं जुड़ी हैं। इन पहलों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों, सामूहिक उद्यमों और आजीविका के अवसरों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

खेलो इंडिया के माध्यम से खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की प्रतिभा को निखारने और खेल अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए भी केंद्र के सहयोग से कदम उठाए गए हैं। खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ के आठ जिलों के लिए 48 करोड़ रुपये की सहायता और 33 खेलो इंडिया मिनी सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।

बिलासपुर में हॉकी, आर्चरी और एथलेटिक्स के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्वीकृत हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल सुविधाओं का विस्तार होने से प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, अभ्यास और अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

जनजातीय समाज के गौरव, संस्कृति और विकास को मिला प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने के लिए भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया गया। इससे जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों और समाज के ऐतिहासिक योगदान को व्यापक पहचान मिली है।

धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 6,000 से अधिक जनजातीय बहुल गांवों में बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। पीएम जनमन योजना के माध्यम से 18 जिलों में निवासरत पांच विशेष पिछड़ी जनजातियों के 56 हजार से अधिक परिवारों तक पक्के आवास, सड़क और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंचाई गई हैं।

राज्य के 26 जिलों में 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित हैं। लघु वनोपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की व्यवस्था के माध्यम से छह लाख संग्राहकों को 500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर में देश का पहला डिजिटल जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय भी स्थापित किया गया है। इन पहलों को जनजातीय समाज के सम्मान, शिक्षा, आजीविका और समग्र विकास से जोड़कर देखा गया।

सहकारी संघवाद से केंद्रीय करों में हिस्सेदारी बढ़ी, छत्तीसगढ़ को मिले 3.46 लाख करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद की भावना से केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत की गई। पिछले 12 वर्षों में छत्तीसगढ़ को केंद्रीय करों के हिस्से के रूप में 3,46,806 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं।

उन्होंने इसकी तुलना वर्ष 2004 से 2014 के दशक में प्राप्त 47,100 करोड़ रुपये से करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों में यह राशि लगभग 7.4 गुना अधिक रही है।

खनिज संसाधनों से प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) व्यवस्था के माध्यम से राज्य को 17,887 करोड़ रुपये मिले हैं। इस राशि से 81 हजार से अधिक विकास कार्य किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन नेशन, वन टैक्स यानी जीएसटी लागू होने से चेकपोस्ट संबंधी बाधाएं समाप्त हुईं और इस्पात, सीमेंट तथा कृषि उत्पादों के लिए देशभर में एकीकृत बाजार का विस्तार हुआ। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ को 22,600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त जीएसटी क्षतिपूर्ति सहायता भी प्राप्त हुई।

राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल और मोबाइल नेटवर्क से बढ़ रही कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में सार्वजनिक पूंजीगत व्यय लगभग दो लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हुआ है। छत्तीसगढ़ को भी लगभग 22 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिली है।

राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए 35,766 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कुल 18,215 करोड़ रुपये की 37 परियोजनाओं पर काम जारी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सभी जिला मुख्यालय राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।

रायपुर-विशाखापट्टनम सिक्स-लेन एक्सप्रेसवे को राज्य के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे छत्तीसगढ़ को बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ने में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्त 4,007 करोड़ रुपये की लागत वाले चार-लेन बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव मार्ग और 2,289 करोड़ रुपये की लागत वाले छह-लेन रायपुर-दुर्ग बायपास का निर्माण भी प्रगति पर है।

रेलवे के क्षेत्र में लगभग 54 हजार करोड़ रुपये की नई रेल लाइन, दोहरीकरण, फ्लाईओवर और पुल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। डिजिटल भारत निधि के माध्यम से सुदूर और जनजातीय क्षेत्रों में 1,643 मोबाइल टावर स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं से दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन, संचार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

ऊर्जा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में छत्तीसगढ़ को लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। रायगढ़ स्थित लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना की क्षमता 4,000 मेगावाट से बढ़ाकर 4,800 मेगावाट की गई है।

उन्होंने कहा कि 2,808 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता से प्रदेश के 9.30 लाख घरों को नए बिजली कनेक्शन मिले हैं। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत 1.16 लाख से अधिक घरों में सौर संयंत्र लगाए जा चुके हैं। इसके लिए 670 करोड़ रुपये की केंद्रीय सब्सिडी जारी हुई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, ऊर्जा उत्पादन, बिजली कनेक्शन और सौर ऊर्जा के विस्तार से राज्य की ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने के साथ स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है।

31 मार्च 2026 को नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति का दावा, बस्तर में विकास को नई गति

मुख्यमंत्री श्री साय ने बस्तर में शांति और विकास को राज्य की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों तथा सुरक्षाबलों के साहस से 31 मार्च 2026 को दशकों पुरानी नक्सल समस्या से निर्णायक मुक्ति मिली।

उन्होंने प्रधानमंत्री के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर में स्थायी शांति स्थापित करने के साथ विकास, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार सरकार की प्राथमिकता है।

नक्सल उन्मूलन के लिए केंद्र से 2,080 करोड़ रुपये की विशेष सहायता मिलने की जानकारी दी गई। आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 5,671 आवासों का निर्माण जारी है।

सड़क संपर्क के क्षेत्र में आरसीपीएलडब्ल्यूई योजना के तहत 267 सड़कें और आठ पुल पूरे हो चुके हैं। पीएमजीएसवाई-4 के अंतर्गत 699 करोड़ रुपये की लागत से 228 सड़कें बनाई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हिंसा के कारण वर्षों से बंद पड़े 421 स्कूल फिर से खोले गए हैं। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से दुर्गम गांवों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि शांति की स्थापना के साथ बस्तर में शिक्षा, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी और आजीविका के अवसरों का विस्तार हो रहा है। सरकार का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा में दृढ़ निर्णय, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और न्याय व्यवस्था में सुधार

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों ने भारत के राष्ट्रीय संकल्प को प्रदर्शित किया।

उन्होंने वन रैंक वन पेंशन योजना और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के पद के सृजन को भी महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल किया। अनुच्छेद 370 की समाप्ति से जम्मू-कश्मीर का भारत में पूर्ण संवैधानिक एकीकरण हुआ।

न्याय व्यवस्था में सुधार के संबंध में मुख्यमंत्री ने बताया कि औपनिवेशिक काल के कानूनों की जगह त्वरित और प्रभावी न्याय व्यवस्था के उद्देश्य से भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने को भी सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

श्रीराम मंदिर से लेकर भोरमदेव कॉरिडोर तक, धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विकास के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत और आस्था का सम्मान भी हुआ है। काशी विश्वनाथ धाम का विकास और अयोध्या में श्रीरामलला मंदिर का निर्माण तथा प्राण प्रतिष्ठा सांस्कृतिक आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेशवासियों के लिए अयोध्या धाम श्रीरामलला दर्शन योजना भी संचालित कर रही है।

प्रसाद योजना के तहत 48 करोड़ रुपये की सहायता से डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर का विकास कार्य पूर्ण हुआ है।

स्वदेश दर्शन योजना के तहत जशपुर, सरगुजा, बिलासपुर और जगदलपुर के जनजातीय पर्यटन सर्किट के लिए 94 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत कबीरधाम के भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 146 करोड़ रुपये और जशपुर के मयाली-बगीचा इको-टूरिज्म के लिए 10 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।

चंपारण में संत श्री महाप्रभु वल्लभाचार्य जी की मूर्ति और कॉम्प्लेक्स की स्थापना के लिए स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत 73.42 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से पीएम एकता मॉल बनाया जाएगा। इससे हथकरघा, हस्तशिल्प और ग्रामोद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा। नवा रायपुर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) की स्थापना भी स्वीकृत की गई है।

उन्होंने कहा कि पर्यटन, संस्कृति, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ेंगे।

वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका, छत्तीसगढ़ के उत्पादों को भी मिले अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका और प्रतिष्ठा का विस्तार हुआ है। जी-20 की अध्यक्षता, ब्रिक्स में भारत की भूमिका, अफ्रीकी संघ को जी-20 की स्थायी सदस्यता दिलाने की पहल और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देना भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के उदाहरण हैं।

उन्होंने बताया कि दुनिया के 36 देशों द्वारा प्रधानमंत्री को सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया जाना भी उनके अंतरराष्ट्रीय सम्मान को रेखांकित करता है।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष जैसी पहलों का लाभ छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को भी मिला है। श्रीअन्न को वैश्विक पहचान मिलने से बस्तर और सरगुजा के कोदो, कुटकी और रागी उत्पादक जनजातीय किसानों के लिए नए बाजार और आर्थिक अवसर विकसित हुए हैं।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप तैयार किया गया छत्तीसगढ़ अंजोर विजन

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार का संकल्प विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से विकसित भारत 2047 के निर्माण में योगदान देना है। इसी उद्देश्य से छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 का रोडमैप तैयार किया गया है।

उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त बस्तर, खनिज और ऊर्जा की अपार संपदा, मेहनती किसान, सशक्त महिलाएं, युवा शक्ति, समृद्ध जनजातीय संस्कृति और निवेश के अनुकूल वातावरण छत्तीसगढ़ की प्रमुख ताकत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना के साथ राज्य सरकार विकास के विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत और छत्तीसगढ़ समृद्ध, सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे।

मंत्रिपरिषद के दो महत्वपूर्ण निर्णय

प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के नेतृत्व पर अभिनंदन प्रस्ताव पारित करने के साथ ही छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने प्रशासनिक और भर्ती संबंधी दो महत्वपूर्ण निर्णयों को भी मंजूरी दी।

1. पूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षक के 36 पदों पर भर्ती को अनुमति

मंत्रिपरिषद ने पूर्व अग्निवीर सैनिकों के अनुभव और दक्षता का लाभ राज्य की सेवाओं में लेने के उद्देश्य से गृह विभाग में आरक्षक के कुल 36 पदों पर उपलब्ध रिक्तियों के विरुद्ध भर्ती की अनुमति प्रदान की है।

उल्लेखनीय है कि राज्य शासन द्वारा पूर्व अग्निवीरों के लिए इन पदों पर पहले ही 10 प्रतिशत श्रेणीवार आरक्षण का प्रावधान किया जा चुका है। इस निर्णय से पूर्व अग्निवीरों को राज्य की सेवाओं में अवसर उपलब्ध कराने और उनके प्रशिक्षण तथा अनुभव का उपयोग करने की दिशा में कदम उठाया गया है।

2. आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर होगा जनजातीय कार्य विभाग

मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ शासन कार्य (आवंटन) नियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत आदिम जाति विकास विभाग का नाम बदलकर जनजातीय कार्य विभाग किया जाएगा।

यह निर्णय राज्य के प्रशासनिक ढांचे में विभाग के नाम संबंधी बदलाव से जुड़ा है। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद संबंधित नियम में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।

जनसेवा, सुशासन और समावेशी विकास पर जोर

प्रेस वार्ता के समापन पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र के साथ समन्वय बनाकर काम कर रही है। गरीब कल्याण, किसानों की समृद्धि, महिलाओं का सशक्तीकरण, युवाओं को अवसर, जनजातीय क्षेत्रों का विकास, बेहतर आधारभूत संरचना और निवेश को प्रोत्साहन इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घकालीन राष्ट्रसेवा की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार विकसित भारत 2047 के संकल्प में छत्तीसगढ़ की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने प्रेस वार्ता में उपस्थित सभी मीडिया प्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

Related posts