पितृ पक्ष के अंतिम दिन जनक वृद्धाश्रम पहुंचीं जया सिंह जूदेव, बुजुर्गों से बोलीं — कोई भी दिक्कत हो, हमें तत्काल बताएं.
श्री अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने वृद्धजनों के बीच किया फल वितरण, सेवा और संवेदनशीलता का दिया संदेश.
जशपुर : पितृ पक्ष के अंतिम दिन जशपुर के जनक वृद्धाश्रम में सेवा, सम्मान और संवेदनशीलता की भावुक तस्वीर देखने को मिली। जशपुर राजपरिवार की बहुरानी एवं श्री अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय महिला संरक्षक जया सिंह जूदेव बुजुर्गों के बीच पहुंचीं और फल वितरण कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने बुजुर्गों को भरोसा दिलाया कि किसी भी परेशानी में वे तत्काल जानकारी दें, ताकि जरूरत के समय उनकी मदद की जा सके। इस पहल ने बुजुर्गों के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश दिया।
पितृ पक्ष के अंतिम दिन श्री अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने जनक वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के बीच फल वितरण किया। इस दौरान वृद्धजनों से आत्मीय मुलाकात कर उनका हालचाल जाना गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक दायित्व की भावना को मजबूत करना रहा।

इस अवसर पर श्री अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की राष्ट्रीय महिला संरक्षक एवं जशपुर राजपरिवार की बहुरानी जया सिंह जूदेव ने बुजुर्गों से बातचीत करते हुए उन्हें भरोसा दिलाया कि वे स्वयं को अकेला न समझें। उन्होंने कहा, “आपको किसी भी प्रकार की दिक्कत या परेशानी हो, तो हमें तत्काल बताएं। आपकी समस्याओं को सुनना और जरूरत के समय मदद के लिए आगे आना हमारा दायित्व है।”
जया सिंह जूदेव ने बुजुर्गों के प्रति सम्मान और सेवा की भावना को समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताते हुए उनकी समस्याओं को प्राथमिकता से सुनने और यथासंभव सहयोग करने की बात कही।
सेवा और संवेदना के साथ बुजुर्गों के बीच पहुंचा संगठन –
पितृ पक्ष के अंतिम दिन आयोजित इस कार्यक्रम में फल वितरण के साथ बुजुर्गों के प्रति अपनत्व और सम्मान का भाव भी देखने को मिला। संगठन के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने वृद्धजनों से संवाद कर उनकी कुशलक्षेम जानी। इस पहल के माध्यम से समाज में बुजुर्गों की देखभाल, सम्मान और जरूरतमंदों के प्रति सहयोग की भावना का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में महासभा के कार्यकारी जिला अध्यक्ष सागर सिंह, जिला उपाध्यक्ष त्रिवेणी सिंह, सौरभ रवानी सहित संगठन के सभी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
संदेश स्पष्ट है कि बुजुर्गों का सम्मान केवल हमारी परंपरा नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उनकी परेशानी को सुनना, उनके साथ खड़े रहना और जरूरत के समय सहयोग करना ही सच्ची सेवा है।
