चक्रवाती तूफान के प्रभाव से 29 अक्टूबर तक भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना
अपर मुख्य सचिव ने की आपदा से निपटने जिलों मे तैयारी की समीक्षा
कृषि बैज्ञानिकों की किसानों औऱ पशुपालकों को सतर्क रहने की सलाह
बलौदाबाजार-भाटापारा : बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में आगामी दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इसे दृष्टिगत रखते हुए अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने सोमवार को वीडियो कांफ्रेसिग के माध्यम से आपदा से निपटने जिलों की तैयारी की समीक्षा की औऱ जरुरी निर्देश दिये।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव का आकलन कर आवश्यक तैयारी करें ताकि जीरो केजुअल्टी हो। उन्होंने बताया कि जल संसाधन विभाग द्वारा जलाशयों के सम्बन्ध मे एडवाईजरी जारी किया गया है। इसको ध्यान मे रखते हुए होम गॉर्ड, एस डीआरएफ, पुलिस,राजस्व,चिकत्सा विभाग के अधिकारियो को अलर्ट रखें। बारिश या बाढ़ से स्कूल एवं आंगनबाड़ी को बंद करने की स्थिति होने पर आवश्यक कार्यवाही करें। बिजली,दूर संचार एवं चिकित्सा व्यवस्था तत्काल उपलब्ध हो। पेड गिरने पर तत्काल हटाने की कार्यवाही हो ताकि सड़क बाधित न हो। जिला कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय हो, गांव मे एहतियात के लिये मुनादी कराएं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना दबाव का क्षेत्र अगले कुछ घंटों में चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इस दौरान हवा की गति 115 से 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है। चक्रवात के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 25 अक्टूबर से वर्षा की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। विशेष रूप से 28 एवं 29 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिला एवं तहसील स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय रखने, मौसम संबंधी चेतावनियों की निरंतर निगरानी करने,राजस्व, पुलिस, नगर निगम, पंचायत, स्वास्थ्य, विद्युत एवं अन्य संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखने के निर्देश दिये हैं।
वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों में रोग एवं कीटों के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही आवश्यक कीटनाशकों अथवा कवकनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी है। आगामी दिनों में रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को भी मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए बुवाई का कार्य नवंबर माह के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ करने का सुझाव दिया गया है।
सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार चक्रवाती प्रभाव से तेज हवा चलने की संभावना को देखते हुए लता वाली सब्जियों, विशेषकर करेला एवं लौकी जैसी फसलों के लिए सहारे की व्यवस्था करें। केले के पौधों एवं फलदार वृक्षों को भी आवश्यकतानुसार सहारा दें। सब्जियों के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें तथा बारिश के दौरान कीटनाशकों एवं कवकनाशकों के छिड़काव से बचें।
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पशुओं को सुरक्षित एवं सूखे स्थानों पर रखें। तेज हवा और बारिश की संभावना को देखते हुए पशुओं को पेड़ों के नीचे अथवा खुले स्थानों पर बांधने से बचें। पशुओं के लिए सूखे चारे एवं स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें।
