Category: अन्य

अन्य

  • आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना : बालाछापर के 76 वर्षीय धनेश्वरी सिंह और कोतबा की सुधनी बाई का बनाया गया आयुष्मान वय वंदना कार्ड.

    आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना : बालाछापर के 76 वर्षीय धनेश्वरी सिंह और कोतबा की सुधनी बाई का बनाया गया आयुष्मान वय वंदना कार्ड.

    जशपुर : आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत समस्त 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को लाभ देने ‘आयुष्मान वय वंदना’ का शुभारंभ हुआ है। योजना के अंतर्गत 5 लाख तक निःशुल्क इलाज किए जाने का प्रावधान है। इसी तारतम्य में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप जिले के सभी वरिष्ठ नागरिकों को योजना का लाभ दिलाए जाने हेतु सार्थक पहल की जा रही है।

    कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देशानुसार जिले के 44 स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाया जा रहा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा डोर-टू-डोर जा कर भी वृद्धजनों का आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाया जा रहा है। आयुष्मान वय वंदना योजना का लाभ देने के लिए जशपुर विकासखण्ड के बालाछापर निवासी 76 वर्षीय धनेश्वरी सिंह और कोतबा की सुधनी बाई का कार्ड बनाया गया।

  • स्वास्थ्य शिविर का आयोजन : विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बस्ती में स्वास्थ्य शिविर लगाकर की गई 37 लोगों की स्वास्थ्य जांच.

    स्वास्थ्य शिविर का आयोजन : विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा बस्ती में स्वास्थ्य शिविर लगाकर की गई 37 लोगों की स्वास्थ्य जांच.

    जशपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दूरस्थ अंचलों के लोगों तक भी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसी कड़ी में बगीचा विकास खंड के विशेष पिछड़ी जनजातियों पहाड़ी कोरवा परिवारों के लिए विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन ग्राम सलखाडांड में किया गया। शिविर में कुल ओपीडी 37 विशेष पहाड़ी कोरवा मरीजों को देखा गया।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उच्च जोखिम गर्भवती महिलाओं की विशेष देखभाल व पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी गई। टीबी मरीजों का स्क्रीनिंग व टीबी बीमारी के प्रति जागरूकता बीपी व शुगर के मरीजों को स्वास्थ्य पर ध्यान तथा नशापान से दूर रहने की सलाह दी गई।

  • जशपुर : डेंगू की रोकथाम हेतु डोर-टू-डोर किया जा रहा फीवर सर्वे, संदिग्ध मरीजों की डेंगू रैपिड किट से हो रही जांच

    जशपुर : डेंगू की रोकथाम हेतु डोर-टू-डोर किया जा रहा फीवर सर्वे, संदिग्ध मरीजों की डेंगू रैपिड किट से हो रही जांच

    जशपुर, 28 नवम्बर 2024 | कलेक्टर रोहित व्यास के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मार्गदर्शन में जशपुर जिले में डेंगू बीमारी की रोकथाम हेतु स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की टीम गठित कर डोर-टू-डोर फीवर सर्वे कर संदिग्ध मरीजों की जांच डेंगू रैपिड किट से किया जा रहा है। डोर-टु-डोर फीवर सर्वे के साथ ही लार्वा सोर्स रिडक्शन सर्वे गतिविधि तथा एडल्ट मच्छर को नष्ट करने के लिए नगर पालिका जशपुर द्वारा फॉगिंग किया जा रहा है।

    स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा मितानिनों के माध्यम से आम जनता को मच्छरदानी उपयोग की सलाह दी जा रही है और मच्छर पनपने के हरेक स्रोतों जैसे-पुराने बर्तन, टायर कूलर, फौज व अन्य सामग्री जहां पानी के जमावट पाई जाती है उनसे पानी खाली किये जाने की भी सलाह दी जा रही है। किसी भी व्यक्ति को सिर दर्द, जोड़ों में दर्द, बदन में दर्द और बुखार आने की स्थिति में तुरंत चिकित्सकों से परामर्श लेने के लिए आम जनता में जागरूकता बढ़ाई जा रही है। अब तक डेंगू के कुल 28 मरीजों की पुष्टि हुई है, जिसमें जशपुर शहरी क्षेत्र में केवल 8 मरीजों की पुष्टि हुई है तथा 20 मरीजों का ट्रैवल हिस्ट्री अन्य जिलों का पाया गया है।

    वायरोलॉजी लैब में एलाईजा मशीन से डेंगू जांच की सुविधा हेतु मेडिकल लेब टेक्नोलॉजिस्ट को प्रशिक्षण हेतु भेजा गया है। मेडिकल लेब टेक्नोलॉजिस्ट के प्रशिक्षण प्राप्त करने उपरान्त जांच प्रारम्भ किया जायेगा।

  • जशपुर : गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष योगाभ्यास प्रशिक्षण सत्र संपन्न ; पोषण आहार, टीकाकरण के संबंध में भी दी गई जानकारी

    जशपुर : गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष योगाभ्यास प्रशिक्षण सत्र संपन्न ; पोषण आहार, टीकाकरण के संबंध में भी दी गई जानकारी

    जशपुर, 29 नवंबर 2024 | कलेक्टर रोहित व्यास के मार्गदर्शन में गर्भवती महिलाओं के लिए आयोजित 05 दिवसीय विशेष योगाभ्यास प्रशिक्षण सत्र विगत दिवस संपन्न हुआ। प्रशिक्षण सत्र में हेल्थ और वेलनेस सेंटर में कार्यरत ए.एन.एम.सी.एच.ओ. एवं समस्त योग मित्रो से सेंटरवार गर्भवती महिलाओ को दिये जाने वाले योगाभ्यास, पोषण आहार, एवं टीकाकरण के संबंध में विस्तृत परिचर्चा एवं समीक्षा की गयी। जिसमें प्रशिक्षणार्थियो से हुई परिचर्चा में बताया गया विशेष योगाभ्यास, पोषण आहार एवं टीकाकरण के परिणाम स्वरूप वेलनेस सेंटरों में पंजीकृत गर्भवती महिलाओं द्वारा 90 प्रतिशत सामान्य एवं सुरक्षित प्रसव से स्वस्थ शिशु को जन्म दे रही हैं।

    समापन सत्र की अध्यक्षता कर रही जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शांति भगत ने परियोजना की सराहना की और इसे निरंतर संचालित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दूरस्थ अंचल के गाँव पहाड़ एवं पठार से घिरा हुआ जशपुर जिला में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा महिलाएं निवासरत है, इन महिलाओं मे जागरूकता फैलाकर गर्भवती माता व शिशु के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

    उन्होंने गर्भवती महिलाओं को निरन्तर विशेष योगाभ्यास के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक रूप से सशक्त कर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में जो कमी लाने के लिए शुभकामनाएं भी दी। श्रीमती भगत ने अपने उदबोधन में नशा मुक्त भारत अभियान के लिए भी प्रयास करने की भी बात कही। परियोजना के संचालन, उद्देश्य एवं उपलब्धियों के संबंध में जानकारी छत्तीसगढ़ योग आयोग रायपुर से आये नोडल अधिकारी श्री रवि कुम्भकार, योग समन्यक श्रीमती ज्योति साहू, योग प्रशिक्षक श्रीमती रश्मि पटेल एवं जिला समन्वयक अशोक कुमार यादव द्वारा दिया गया । कार्यक्रम के अंत में समस्त प्रशिक्षणार्थियो को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उपसंचालक समाज कल्याण श्री टी. पी. भावे. नायब तहसीलदार श्री रोहित गुप्ता, पंकज कुमार जायसवाल, रामदास यादव सहित समाज कल्याण विभाग एवं स्वाथ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सेजेश व्याख्याता के डी.डी.स्वर्णकार जशपुर द्वारा किया गया।

  • जशपुर : आई.आई.टी. बॉम्बे के सितारा प्रयोग के समन्वय से बगीचा विकासखण्ड के उप स्वास्थ्य केन्द्रों में दिया जा रहा प्रशिक्षण, छोटे बच्चों को दूध पीलाने की बताई जा रही विधि

    जशपुर : आई.आई.टी. बॉम्बे के सितारा प्रयोग के समन्वय से बगीचा विकासखण्ड के उप स्वास्थ्य केन्द्रों में दिया जा रहा प्रशिक्षण, छोटे बच्चों को दूध पीलाने की बताई जा रही विधि

    जशपुर, 29 नवम्बर 2024 | कलेक्टर रोहित व्यास के दिशा-निर्देश में आईआईटी बॉम्बे के सितारा प्रयोग के समन्वय से जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिनों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी कड़ी में बगीचा विकासखण्ड के उप स्वास्थ्य केन्द्र बासेन, घोघर, सराईपानी, कुर्रोग, महुआडीह में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ने प्रशिक्षण दिया।

    बगीचा के बी.पी.एम. सूर्या रत्न गुप्ता ने बताया कि आई.आई.टी. बॉम्बे के द्वारा उपलब्ध कराए गए विडियों के माध्यम से गर्भवती माताओं और शिशुवती माताओं को छोटे बच्चों दूध पिलाने की विधि बताई जा रही है। साथ ही कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए पौष्टिक आहार, कंगारू थेरेपी, उच्च जोखिम गर्भवती माताओं की देख-भाल कैसे किया जाना है इसकी भी जानकारी दी जा रही है।

  • कुनकुरी एसडीएम ने जीवनदीप कार्यकारिणी समिति की ली बैठक : स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दिए निर्देश

    कुनकुरी एसडीएम ने जीवनदीप कार्यकारिणी समिति की ली बैठक : स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दिए निर्देश

    जशपुर, 29 नवंबर 2024 | कुनकुरी एसडीएम नन्दजी पांडे ने आज अपने कार्यालय के सभा कक्ष में जीवनदीप कार्यकारिणी समिति की बैठक लेकर लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में गंभीर मरीजों का ईलाज करें और उन्हें निःशुल्क दवाई भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम ने बैठक में लोगों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली।

  • जशपुर में बुजुर्गों के लिए खुशखबरी: आयुष्मान वय वंदना कार्ड से मिलेगा 5 लाख तक का मुफ्त इलाज

    जशपुर में बुजुर्गों के लिए खुशखबरी: आयुष्मान वय वंदना कार्ड से मिलेगा 5 लाख तक का मुफ्त इलाज

    जशपुर, 27 नवम्बर 2024/ ‘आयुष्मान वय वंदना‘‘  कार्ड के माध्यम से 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना अंतर्गत 5 लाख तक निःशुल्क इलाज किए जाने का प्रावधान है। जिले के  44  स्वास्थ्य केंद्रों में आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप योजना के तहत जिले के सभी वरिष्ठ नागरिकों को योजना का लाभ दिया जाना है। पात्रता का आधार हितग्राही की आयु ही मात्र होगी, जिसे आधार कार्ड के माध्यम से सत्यापित किया जायेगा। जिसमें आयुष्मान भारत में सम्मिलित अर्थात् राशन कार्ड में सूचीबद्ध एवं अन्य समस्त 70 वर्ष एवं उससे अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिक पात्र होगे।

    स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के समस्त वरिष्ठ नागरिकों से अपील किया गया है कि अपना आयुष्मान वय वंदना कार्ड नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में बनवा लेवें। कार्ड बनाने हेतु आवश्यक दस्तावेज आधार कार्ड साथ लेकर आवें।

    आयुष्मान वयं वंदना कार्ड बनाने के लिए जिले के 11 चिकित्सालयों का चिन्हांकन किया गया है। इनमें जिला चिकित्सालय जशपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पैकु, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आस्ता, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र घाघरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कस्तुरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रनपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कुजारा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बगिया, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र दोकड़ा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भेलवा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तपकरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोल्हेनझरिया, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कोतबा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बागबहार, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तमता, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सुरंगपानी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बगीचा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सन्ना, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र छिछली, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सुलेसा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पडरापाठ, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लोदाम, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र घोलेंग, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मनोरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोनक्यारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र दुलदुला, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कुनकुरी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नरायणपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कांसाबेल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बटाईकेला, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र फरसाबहार, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भगोरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र केरसई, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पत्थलगांव, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लुड़ेग, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र शेखरपुर, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सुरंगपानी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र किलकिला, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कुर्राेग, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र झिक्की, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चम्पा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मैनी, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कलिया शामिल हैं।

  • जशपुर : सिकल सेल ने छीना था सब कुछ, मुख्यमंत्री ने लौटाया जीवन ; सिकलसेल से जूझ रही आशा को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मिली 20 लाख की आर्थिक सहायता

    जशपुर : सिकल सेल ने छीना था सब कुछ, मुख्यमंत्री ने लौटाया जीवन ; सिकलसेल से जूझ रही आशा को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मिली 20 लाख की आर्थिक सहायता

    जशपुर, 25 नवम्बर 2024/ लोगों के जीवन में जब कहीं राह नजर नहीं आती तब आशा की एक छोटी सी किरण भी पूरे जीवन को प्रकाशवान कर जाती है। ऐसी ही कहानी है कुनकुरी विकासखण्ड के ग्राम पंचायत रेमते में रहने वाली 15 साल की आशा चक्रेश की। जहां सिकलसेल से पीड़ित आशा के जीवन में कई उतार चढ़ाव आये पर कहीं भी उम्मीद की किरण दिखाई नहीं दे रही थी। वहां मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना नई उम्मीद बन कर आई।

    आशा को जन्म से ही सिकलीन होने की जानकारी जब मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले माता पिता की लिए यह बात किसी सदमे से कम नहीं थी। चिकित्सकों ने बताया था कि आशा को हुआ सिकलसेल, सिकलसेल का वह प्रकार है जो 10 लाख लोगों में एक व्यक्ति को होने वाली बीमारी है। इस संबंध में आशा की माता बिमला बाई चक्रेश ने बताया कि आशा के पिता स्व. मंगलराम चक्रेश उसके स्वास्थ्य और इलाज के लिए हमेशा चिंतित रहा करते थे। आशा के ईलाज के लिए दंपत्ति ने अपनी छोटी सी बचत और आयुष्मान भारत योजना की सहायता से कई अस्पतालों का चक्कर लगाया। रायपुर से लेकर इंदौर, मुंबई सभी जगह आशा की जांच कराने के बाद भी निराशा ही हांथ लगी थी। बचपन से हर महीने आशा को खून चढ़ाने अस्पताल का चक्कर लगाना ही पड़ता था। आशा के पिता ने आशा को लेकर 25 से 26 बार अस्पताल का चक्कर लगाया करते थे जिसका खर्च भी वहन करना पड़ता था।

    ऐसे में एक दिन एक दुखद दुर्घटना में पिता मंगलराम का भी निधन हो गया। ऐसे में चारों बच्चों की जिम्मेदारी अकेले मुझ पर आ गयी थी। इन हालात में हमें आशा का आगे का इलाज असंभव लगने लगा था। एक दिन जिला प्रशासन द्वारा मेडिकल कैम्प आयोजित किया गया था जहां जांच उपरांत चिकित्सकों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने की सलाह दी गयी। हमारे लिए इसका खर्च उठा पाना संभव नहीं था तब जिला प्रशासन से जांच हेतु 01 लाख रुपये की सहायता उपलब्ध कराई, जिससे रायपुर जाकर जांच संभव हो सका। परन्तु महंगे ईलाज की समस्या अभी भी बनी हुई थी।

    जिस पर चिकित्सकों ने उन्हें मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना की जानकारी दी। जहां से स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवेदन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कार्यालय भेजा गया। जहां से त्वरित कार्यवाही करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकृति प्रदान करते हुए ईलाज के लिए 20 लाख रूपये प्रदान किया गया। जिसके बाद रायपुर के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए दाता की पहचान की गई। जिसमें दाता का सैम्पल मैच होने पर आशा का बोन मैरो ट्रांसप्लांट का ऑपरेशन किया गया। जिसके बाद आशा को नया जीवन प्राप्त हुआ। इस नए जीवन के लिए आशा और उनकी माता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया और कहा कि यदि मुख्यमंत्री ना होते तो शायद आशा का जीवन बचा पाना उनके लिए संभव नहीं होता।

  • 15 सदस्यीय केंद्रीय दल ने किया गरियाबंद व जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का जायज़ा

    15 सदस्यीय केंद्रीय दल ने किया गरियाबंद व जशपुर में स्वास्थ्य सेवाओं का जायज़ा

    स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करने कॉमन रिव्यु मिशन की डी ब्रीफिंग बैठक का आयोजन

    रायपुर 25 नवम्बर 2024/ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के 16वें कॉमन रिव्यू मिशन के 15 सदस्यीय मॉनिटरिंग दल ने प्रदेश के 2 ज़िलों गरियाबंद व जशपुर के भ्रमण उपरांत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति की समीक्षा करने के साथ अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। स्वास्थ्य एवम परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अवर सचिव डॉ कौस्तुभ गिरी के मार्गदर्शन व केंद्रीय दल के डॉ. आशीष चक्रवर्ती के नेतृत्व में कॉमन रिव्यू मिशन का दल गरियाबंद एवं जशपुर जिले में जाकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित विभिन्न चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाओं का अवलोकन किया ।

    केंद्रीय दल द्वारा एम्स रायपुर के साथ गरियाबंद व जशपुर ज़िले कुल 25 स्वास्थ्य केंद्रों का भ्रमण कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायज़ा लिया गया। केंद्रीय दल ने स्वास्थ्य अमले की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए कहा कि सेवा प्रदायगी की दिशा में आमजन का स्वास्थ्य विभाग पर भरोसा प्रसंशनीय है । दल द्वारा आयुष्मान भारत शहीद वीर नारायण सिंह योजना व मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के माध्यम से लोगों को होने वाले लाभ की भी सराहना की । बैठक में शिशु और मातृ मृत्यु दर पर प्रभावी नियंत्रण पर जोर दिया साथ ही उन्होंने मातृत्व स्वास्थ्य की रिपोर्टिंग को दुरुस्त करने के सुझाव दिए। किसी भी रोग के संक्रमण की स्थिति से निपटने के लिए सूचना तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी उन बल दिया ।

    टीम के द्वारा जिला गरियाबंद व जशपुर में दी जा रही सम्पूर्ण सेवा जैसे- ओपीडी, आईपीडी, कुष्ठ , टीकाकरण, सिकल सेल स्क्रीनिंग, एनसीडी क्लिीनिक, आई.ओ.पी.डी., आई ऑपरेशन, 1099 मुक्तांजली वाहन, बायो मेडिकल वेस्ट प्रबंधन के साथ-साथ मातृत्व शिशु स्वास्थ्य वार्ड में जो सेवायें संचालित हो रही है, उनकी सराहना करते हुए बेहतर क्रियान्वयन हेतु आवश्यक सुझाव दिये गए ।

    बैठक के अंत मे मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन विजय दयाराम के. द्वारा केंद्रीय दल को उनके भ्रमण के अनुभवों को राज्य से साझा करने व सुधार हेतु दिए गए सुझावों हेतु आभार व्यक्त किया और साथ ही केंद्रीय दल को विश्वास दिलाया कि संबंधित क्षेत्रों में पायी गई कमियों का शीघ्र ही निराकरण किया जाएगा और इन जिलों की अच्छी प्रैक्टिस को अन्य जिलों में भी लागू कर स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का पूरा प्रयास किया जाएगा ।

  • हृदय में प्रत्यारोपित डिवाइस में विराजमान वर्चुअल कार्डियोलॉजिस्ट कर रहा है दिल की निगरानी, मोबाइल ऐप्लिकेशन के जरिए भेजता है दिल का लेखा-जोखा

    हृदय में प्रत्यारोपित डिवाइस में विराजमान वर्चुअल कार्डियोलॉजिस्ट कर रहा है दिल की निगरानी, मोबाइल ऐप्लिकेशन के जरिए भेजता है दिल का लेखा-जोखा

    सिक साइनस सिंड्रोम (एसएसएस)” से पीड़ित मरीज को एसीआई में लगाया गया सीआरटी डी (CRT – D) यानी कार्डियक रीसिंक्रनाइजेशन थेरेपी विद डिफाइब्रिलेटर डिवाइस

    यह डिवाइस ब्लूसिंक तकनीक पर आधारित है जो मरीज के स्मार्टफोन से कनेक्ट होकर ऐप के जरिये एसीआई के कार्डियोलॉजिस्ट को भेजेगा मरीज के दिल का वर्चुअल एल्गॉरिदम डेटा

    इसी के साथ एसीआई राज्य का पहला संस्थान जहां हुआ है हृदय में ऐसा पहला अत्याधुनिक डिवाइस प्रत्यारोपण

    रायपुर. 22 नवंबर 2024/ पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबंद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) के कार्डियोलॉजिस्ट की टीम ने हाल ही में हृदय के “सिक साइनस सिंड्रोम” नामक बीमारी से ग्रस्त एक ऐसे मरीज का इलाज किया है जिसके हृदय की धड़कन कभी एकदम कम हो जाती थी और कभी अनियमित तौर पर बढ़ जाती थी। ऐसी स्थिति में उसके दिल की धड़कन को नियंत्रित करने के लिए एसीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव, डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. शिवकुमार शर्मा एवं टीम ने अत्याधुनिक एवं उन्नत तकनीक से युक्त सीआरटी डी यानी कार्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी विद डिफाइब्रिलेटर डिवाइस को मरीज के हृदय में प्रत्यारोपित किया है। डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, इस डिवाइस की खासियत है कि यह स्मार्टफोन ऐप से कनेक्ट होकर हृदय की गतिविधियों की निगरानी एक आभासी (वर्चुअल) कार्डियोलॉजिस्ट की तरह करता है। चूंकि यह मरीज बेमेतरा जिले के दूरस्थ गांव में रहता है इसलिए यह डिवाइस हृदय की दूरस्थ निगरानी (रिमोट मॉनिटरिंग) करता है। यह ब्लूसिंक तकनीक पर आधारित है। इस ऐप के जरिए मरीज के हृदय की गतिविधि की जानकारी और ऐल्गोरिदम डेटा प्राप्त होती है। किसी अप्रत्याशित स्थिति में यह अलग-अलग रंग के सिग्नल के माध्यम से डॉक्टरों को अलर्ट भी भेजता है।

    एक अध्ययन के मुताबिक “सिक साइनस सिंड्रोम (एसएसएस)” नामक यह बीमारी 65 साल से ऊपर उम्र के हर 600 लोगों में से एक को होती है। यह साइनस नोड जो कि हृदय का प्राथमिक पेसमेकर है, उसमें आयी खराबी के कारण उत्पन्न होती है। इसके होने के कई कारण हो सकते हैं।

    अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर कहते हैं कि समय के साथ चिकित्सा क्षेत्र ने अत्याधुनिक प्रगति की है। चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नित नये अनुसंधान ने मरीज की जीवनरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। एसीआई की टीम ने मरीज के हृदय की बीमारी को देखते हुए अत्याधुनिक तकनीक युक्त उपचार सुविधा प्रदान की है जिसके लिए पूरी टीम बधाई के पात्र है।

    इस केस के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. स्मित श्रीवास्तव की जुबानीः-

    इस मरीज के हृदय की धड़कन कभी अपने आप कम हो जाती थी और अनियमित तौर पर बढ़ जाती थी। इसको काबू में लाने के लिए तीन साल पहले कृत्रिम पेसमेकर डिवाइस डाला गया था। पेसमेकर की बैटरी की उम्र आमतौर पर 8 से 10 साल रहती है परंतु इस मरीज की डिवाइस और बैटरी की उम्र 3 साल में खत्म हो गई क्योंकि बहुत बार हृदय की धड़‌कन को काबू में लाने के लिए डिवाइस ने शॉक डिलीवर किया (विद्युत आवेग दिल तक पहुंचाया)। वह मशीन हमने डाली थी, ताकि कभी भी धड़कन कम हो तो उसका कंट्रोल कर सके। इस मरीज के हृदय में पिछले तीन साल में कई बार झटके आए जिससे मशीन को अंदर ही अंदर बिजली के झटके देने पड़े। यह डिवाइस बहुत लाभदायक थी। छह बार मरीज के साथ ऐसी घटना हुई कि मरीज के हार्ट को शुरू नहीं किया जाता तो ब्रेन डेड हो जाता लेकिन इस पुरानी डिवाइस ने बहुत काम किया।

    यह मरीज बेमेतरा के पहुंचविहीन एरिया जटा नामक गांव का रहने वाला है। जहां से उसको बार-बार ऐसे उन्नत उपचार के लिए एसीआई आना संभव नहीं है। ख़ासकर बारिश-पानी के दिनों में, जबकि बार-बार उसके हृदय को ऐसे मशीन से झटका देने की आवश्यकता थी। अंततोगत्वा हमने हार्ट की धड़‌कन को नियंत्रित करने के लिए ऐसा तकनीक वाला डिवाइस लगाने का निर्णय लिया जो मरीज के मोबाइल के माध्यम से हार्ट की एक-एक धड़कन का लेखा-जोखा एसीआई को भेज सकता हो। उसके धड़कन की सही स्थिति एसीआई को मिलती रहे जिससे मरीज को एसीआई आने की आवश्यकता नहीं रहेगी। यह नयी टेक्नोलॉजी अभी आई है। डिवाइस मोबाईल के जरिए कनेक्ट हो जाता है। कई बार शॉक देने की जरूरत नहीं पड़ती।

     इसमें मरीज को अलर्ट करने के लिए तीन तरह के संकेत आते हैं। ग्रीन सिग्नल यानी सबकुछ ठीक-ठाक है। सामान्य है। ऑरेंज सिग्नल यानी थोड़ी चिंता करने की जरूरत है। रेड सिग्नल यानी धड़कन तेज है। शॉक बढ़ाने की जरूरत है। इन सिग्नल के जरिए समय रहते हम हार्ट की रिमोट मॉनिटरिंग करके मरीज का उपचार कर सकते हैं। समय पर दवा दे सकते हैं। हम एसीआई में बैठकर ही आपात स्थिति में मरीज के हृदय का निर्देशों के माध्यम से उपचार कर सकते हैं। यह हार्ट का वर्चुअल एल्गोरिदम बता देता है।

    ऐसे किया प्रत्यारोपित

    असिस्टेंट प्रोफेसर कार्डियोलॉजी डॉ. कुणाल ओस्तवाल ने बताया कि इस डिवाइस को प्रत्यारोपित करने के लिए लेफ्ट साइड (बायें हिस्से) में कंधे के नीचे से एक चीरा लगाकर उसमें से तीन तार डाले जाते हैं। एक तार जाता है राइट वेंट्रिकल में, एक तार जाता है राइट एट्रियम में और एक तार जाता है कोरोनरी साइनस में। इन तीनों तारों को पल्स जेनरेटर जो एक तरह की बैटरी होती है, उससे कनेक्ट किया जाता है और उसे कंधे के नीचे पॉकेट बनाकर इम्प्लांट कर दिया जाता है। ये डिवाइस दोनों काम करता है। हार्ट की गति भी बढ़ाता है और इलेक्ट्रिक शॉक भी देता है। यदि कभी जानलेवा स्थिति निर्मित होती भी है, तो डिवाइस उसको तुरंत खत्म कर देता है। अचानक हृदय मृत्यु/सडन कार्डियक डेथ होने की संभावना नहीं रहती है।

    जब बिगड़‌ती है दिल की धड़‌कन की ताल, तब होता है “ट्रैची-ब्रैडी सिंड्रोम”

    संगीत के लय और ताल को तरह मनुष्य का हृदय भी एक निश्चित ताल यानि रिदम में धड़कता है। कई बार हृदय में विद्युत आवेग का प्रवाह सही ढंग से नहीं होता तब यह अतालता (एरिदिमिया) की स्थिति में पहुंच जाता है। इस स्थिति में हृदय कभी बहुत तेज (टैचीकार्डिया) या बहुत धीमी (ब्रैडीकार्डिया) गति से धड़कता है जिससे उसके धड़‌कने की लय बिगड़ जाती है। अचानक से होने वाली ऐसी तेज हृदय गति या धीमी हृदय गति को ब्रेडीकार्डिया-टैचीकार्डिया या “टैची ब्रेडी सिंड्रोम” कहा जाता है। यह सिक साइनस सिंड्रोम का एक प्रकार है। सिक साइनस सिंड्रोम हृदय के प्राकृतिक पेसमेकर (साइनस नोड) को प्रभावित करता है, जो हृदय की धड़कन को नियंत्रित करता है। जब साइनस नोड क्षतिग्रस्त हो जाता है और सामान्य हृदय गति उत्पन्न करने में असमर्थ हो जाता है तब धीमी गति से दिल की धड़कन, दिल की धड़कनों के बीच लंबा अंतराल या अनियमित दिल की धड़कन (अतालता) होती है। इसके इलाज के लिए लोगों को कृत्रिम पेसमेकर प्रत्यारोपित करने की आवश्यकता होती है।

    क्या है सीआरटी डी डिवाइस

    सीआरटी डी यानी कार्डियक रीसिंक्रोनाइजेशन थेरेपी विद डिफाइब्रिलेटर। जैसा कि नाम से स्पष्ट है। यह एक विशेष प्रकार का पेसमेकर डिवाइस है जिसमें इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर-डिफाइब्रिलेटर (CRT-D) भी शामिल है। इसे बायवेंट्रिकुलर पेसमेकर भी कहा जाता है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि ये कमजोर और दर्द रहित उत्तेजना थेरेपी या बिजली के झटकों/विद्युत आवेगों के माध्यम से वेंट्रिकुलर टैचीकार्डिया और फाइब्रिलेशन जैसी जानलेवा स्थितियों को रोक सके। यह डिवाइस हृदय के निचले कक्षों, जिन्हें वेंट्रिकल्स कहा जाता है, को विद्युत संकेत भेजती (डिलीवर करती) है। ये संकेत निचले कक्षों (बाएं और दाएं वेंट्रिकल) को एक ही समय में सिकुड़ने में मदद करने के लिए विद्युत आवेग पहुंचाते हैं जिससे हृदय अधिक कुशलता के साथ पम्प करता है। यह डिवाइस अचानक हृदय की मृत्यु (कार्डियक डेथ) के जोखिम को कम करता है।

    टीम में ये रहे शामिल

    कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. (प्रो.) स्मित श्रीवास्तव के साथ असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुणाल ओस्तवाल, डॉ. शिवकुमार शर्मा तथा जूनियर डॉक्टर डॉ. प्रर्तीक गुप्ता, डॉ. आयुष, डॉ. प्रीति और डॉ. सौम्या। इसके ही महेंद्र और नवीन भी शामिल रहे।