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  • हेल्थ न्यूज़ : एंटी-सेप्टिक और एंटी-बायोटिक गुणों से भरपूर है हल्दी : सर्दी, जुकाम और कफ में हल्दी दूध का सेवन लाभकारी

    हेल्थ न्यूज़ : एंटी-सेप्टिक और एंटी-बायोटिक गुणों से भरपूर है हल्दी : सर्दी, जुकाम और कफ में हल्दी दूध का सेवन लाभकारी

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    आम बीमारियों के उपचार से जुड़ी कई चीजें हमारी रसोई में उपलब्ध हैं। उनमें कई गुणों से युक्त हल्दी भी एक है। अपने विशिष्ट औषधीय एवं एंटी-ऑक्सीडेंट गुणों के कारण हल्दी का आयुर्वेद में भी विशेष महत्व है। हल्दी रोगाणुओं को रोकने वाली (रोगाणुरोधक या एंटी-सेप्टिक) होती है। साथ ही यह हमारी इम्युनिटी को बढ़ाता है और कई तरह के संक्रमण की रोकथाम में सहायक है। हल्दी के औषधीय गुण कई बीमारियों के बचाव और उपचार में मदद कर सकते हैं। हल्दी को लेकर किए गए एक शोध में पाया गया कि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी, केलोरेटिक, एंटी-माइक्रोबियल (लिवर को सुरक्षित रखने वाला गुण), कार्डियो-प्रोटेक्टिव और नेफ्रो-प्रोटेक्टिव गुण होते हैं।

    चाहे अंदरूनी घाव हो या शरीर के बाहर के घाव, हल्दी उन्हें भरने का काम करती है। खून के रिसाव को रोकने या चोट को ठीक करने के लिए हल्दी का आमतौर पर उपयोग होता है। हाथ-पैरों में होने वाले दर्द से राहत पाने के लिए भी हल्दी वाला दूध फायदेमंद है। सर्दी, जुकाम या कफ की शिकायत हो तो हल्दी वाला दूध पीना लाभकारी होता है। हल्दी मिला गर्म दूध यानि गोल्डन मिल्क सामान्य मौसमी बीमारियों जैसे सर्दी-जुकाम में राहत दिलाते हैं। वहीं यह फेफड़ों के कफ को भी बाहर निकालने यानि एक्सपेक्टोरेंट के रूप में कारगर है। आयुर्वेद पद्धति में हल्दी को रक्त विकारों को दूर करने और एंटी-हिस्टामाइन के रूप में कारगर माना गया है। फलस्वरूप यह एलर्जिक सर्दी-जुकाम तथा इओसिनोफिलिया जैसे रोगों के उपचार में सहायक है।

    आयुर्वेदिक कॉलेज के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि हल्दी तिक्त, उष्ण, रक्तशोधक और वायु विकारों को नष्ट करने वाली होती है। हल्दी के सेवन से पेट के नुकसानदेह जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। हल्दी एंटी-बायोटिक की तरह ही रोगाणुजनित रोगों के उपचार में सहायक है। हल्दी का उपयोग सदियों से सौंदर्यवर्धक के रूप में होते आया है। इसके उबटन से चेहरा निखरता है तथा यह अनेक चर्म रोगों में भी प्रभावी है। भारत में पाई जानी वाली हल्दी में रासायनिक पदार्थ करक्यूमिन की मात्रा अधिक होती है। हल्दी का इस्तेमाल आयुर्वेदिक (हर्बल) दवाओं में होता है और इससे बनी औषधियां बदन दर्द, थकान दूर करने और सांस संबंधी परेशानियों में असरदार हैं। बाह्य लेप और आन्तरिक सेवन दोनों प्रकार से प्रयोग करने पर शीघ्र लाभ होता है। हल्दी का औषधि के रूप में उपयोग आयुर्वेदिक चिकित्सा विशेषज्ञ के परामर्श में करना चाहिए।

  • वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस :  आयोजित होंगे विविध कार्यक्रम, संचालक, स्वास्थ्य सेवाये द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं समस्त जिलों को दिए निर्देश

    वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस :  आयोजित होंगे विविध कार्यक्रम, संचालक, स्वास्थ्य सेवाये द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग एवं समस्त जिलों को दिए निर्देश

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

     “वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस” प्रतिवर्ष 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। आयोडीन की कमी से विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य गत समस्याएं होती हैं और बच्चों के विकास पर भी इसका असर पड़ता है। इसी के मद्देनजर संचालक स्वास्थ्य सेवाएं  भीम सिंह ने “वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण दिवस” को जागरूकता अभियान के रूप में मनाने के लिए पत्र जारी किया है। समस्त जिलों एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को जारी किए गए पत्र में स्वास्थ्य संचालक ने 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक आयोडीन अल्पता से होने वाली बीमारियों से बचाव के संबंध में जन-जागरूकता के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है।

    पत्र में संचालक, स्वास्थ्य सेवाये छ.ग. द्वारा “जिला स्तर पर 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर 2022 के मध्य विशेष अभियान चलाकर समाज में आयोडीन की कमीं से होने वाली बीमारियों और अन्य विकारों के प्रति जागरूकता लाने संबंधी कार्यक्रम संचालित किए जाने और लोगों को आयोडीन युक्त नमक के सेवन के लिए प्रेरित करने को कहा है। वही राज्य के चिकित्सा महाविद्यालयों एवं नर्सिंग महाविद्यालयों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जनमानस को आयो़डीन अल्पता विकार नियंत्रण के बारे में जानकारी देकर जागरूक करने को कहा है। जिला स्तर पर अभियान चलाने के लिए शासकीय विभागों जैसे स्कूल शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग,, पंचायत राज, नारगिक आपूर्ति आदि के प्रतिनिधियों को शामिल करने के लिए निर्देशित किया है। इसके साथ ही आयोडीन युक्त नमक के उत्पादन से जुड़े हुए संगठन, व्यापारियों तथा स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों को भी सम्मिलित करने को कहा है गया है।“

    जागरूकता के लिए होंगे कार्यक्रम- 21 अक्टूबर से 27 अक्टूबर के मध्य आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण के संबंध में जिला स्तर पर संगोष्ठी एवं कार्यशाला होगा। इसके साथ ही  निबंध लेखन एवं अन्य प्रतियोगिताएं होंगी। जिला चिकित्सालयों, सभी स्वास्थ्य केन्द्रों एवं स्कूल में स्वास्थ्य शिक्षा शिविर आयोजित किए जाएंगे। आयोडीन अल्पता विकार नियंत्रण से संबंधित प्रचार सामग्री भी वितरित की जाएगी। इसके अलावा आयोडीन अल्पता से ग्रसित जिलों के मितानिन द्वारा उपलब्ध नमक परीक्षण कीट के माध्यम से ग्राम स्तर पर नमक जांच अभियान चलाया जाएगा।

    राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम – चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक आयोडीन की कमी से मानसिक मंदता का एक प्रमुख कारण है। गर्भावस्था के दौरान और बाल्यावस्था में आयोडीन की कमी विशेष रूप से हानिकारक होती है। आयोडीन की कमीं से बौनापन, प्रसव और गर्भपात भी हो सकता है सन् 1992 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय घेघा नियन्त्रण कार्यक्रम (एनजीसीपी) का नाम बदलकर राष्ट्रीय आयोडीन अल्पता विकार नियन्त्रण कार्यक्रम (एनआईडीडीसीपी) रख दिया। जिसमें आयोडीन की कमी से उत्पन्न होने वाले विभिन्न रोगों को शामिल किया गया। कार्यक्रम को संपूर्ण जनसमुदाय के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया गया है।

  • मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना से जशपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहीं स्वास्थ्य सुविधाएं

    मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना से जशपुर जिले के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहीं स्वास्थ्य सुविधाएं

    हाट बाजारों में मोबाईल मेडिकल यूनिट के माध्यम से 1,69,651 लोगों का किया गया स्वास्थ्य परीक्षण

    जुमेईकेला की फूलो बाई को हाट बाजार क्लीनिक से मिला स्वास्थ्य लाभ

    योजना से दूर हुई स्वास्थ्य संबंधी चिंता-हितग्राही

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दूरस्थ एवं ग्रामीण जनों की स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री हाटबाजार क्लीनिक योजना का प्रारंभ किया गया है। जिसके माध्यम से दूरस्थ अंचल के क्षेत्रों के लोगों को बिना किसी परेशानी के स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराया जा सके। जशपुर जिले में भी हाट बाजार क्लीनिक योजना का बेहतर क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिससे यहां के निवासियों को अस्पताल के साथ ही विभिन्न हाट बाजारों में ही बेहतर स्वास्थ्य उपचार मिल रही है।योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा हाट बाजारों में मेडिकल टीम के माध्यम से शिविर लगाकर बाजारों में ही लोगों के स्वास्थ्य परीक्षण कर लाभांवित किया जाता है। परीक्षण के उपरांत उन्हें तत्काल निःशुल्क दवाई एवं परामर्श प्रदान की जाती है। जिससे लोगों को उनके घर के नजदीक ही आसानी से स्वास्थ्य ईलाज का लाभ मिल रहा है। बाजार में लोग सामानों की खरीदारी के साथ स्वास्थ्य संबंधी सलाह के साथ ही चिकित्सकों से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य उपचार का लाभ ले रहे हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि हाट-बाजार क्लीनिक योजना से न सिर्फ स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा मिली है बल्कि उनके समय के साथ पैसों की भी बचत हो रही है। अब उन्हें ईलाज के लिए मुख्या दूर-दूर जाना नहीं पड़ता। हाट-बाजार में खून जांच, बीपी-शुगर जांच, मलेरिया, टायफाईड सहित अन्य बीमारियों का भी जांच होता है।

    योजना से कासंाबेल विकासखंड के जुमईकेला निवासी 35 वर्षीय श्रीमती फूलोबाई पति श्री रामलाल को मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना से लाभांवित किया गया। फूलोबाई का हाट बाजार में ही बीपी, आरबीसी सहित स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। उनका शरीर काफी कमजोर हो गया था। जांच के उपरांत उन्हें मल्टीविटामिन, कैल्शियम टैबलेट सहित अन्य आवश्यक दवाईयां प्रदान करने के साथ ही उन्हें चिकित्सक के द्वारा आवश्यक परामर्श भी प्रदान किया गया। साथ ही उन्हें नियमित रूप से बाजार आने पर स्वास्थ्य परीक्षण कराने की सलाह भी दी गई। फूलोबाई कहती है कि बाजार में ही उनके साथ ही आसपास के ग्रामीणों को स्वास्थ्य जांच आसानी से मिल जा रहा है। जिससे उन्हें अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक चिंता नहीं है। शिविर में उन्हें रहन सहन के साथ ही साफ-सफाई एवं खानपान के संबंध उचित परामर्श दिया जाता है। जिससे गांव के लोग भी जागरूक हो रहे है और बीमारियां भी कम हो रही है।

    जिले में मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लीनिक योजना के तहत अप्रैल 2022 से सितम्बर 2022 तक कुल 112 हाट बाजारों में 22 मोबाईल मेडिकल यूनिट द्वारा कुल 2777 शिविर लगाकर 1,69,651 ग्रामीणों का स्वास्थ्य जांच किया गया है। साथ ही 1,50,707 लोगों को निःशुल्क दवाईयो का वितरण भी किया गया है। जिसमें फरसाबहार में 448 शिविर में 22709 मरीज, पत्थलगांव में 459 शिविर में 31533 मरीज, कांसाबेल में 307 शिविर में 20119 मरीज, दुलदुला में 363 शिविर में 25257 मरीज, कुनकुरी मे 334 शिविर में 22245 मरीज, बगीचा में 561 शिविर में 31651 मरीज, जशपुर में 156 शिविर में 7829 मरीज एवं मनोरा में 149 शिविर लगाकर 8308 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर लाभांवति किया गया है।

  • कुष्ठ रोग पर जागरूकता के लिए माह भर चलेगा विशेष अभियान : महात्मा गांधी की 150वीं जन्म शताब्दी के उपलक्ष में 2 अक्टूबर से चलाया जा रहा है अभियान

    कुष्ठ रोग पर जागरूकता के लिए माह भर चलेगा विशेष अभियान : महात्मा गांधी की 150वीं जन्म शताब्दी के उपलक्ष में 2 अक्टूबर से चलाया जा रहा है अभियान

    रोग से बचाव व उपचार के प्रति जागरूकता की आमजन लेंगे शपथ

    तखतपुर क्षेत्र में कुल 60 कुष्ठ रोगियों की पहचान जनवरी 2022 से अगस्त 2022 तक हुई है, चिन्हांकित मरीजों का किया जा रहा है उपचार

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, बिलासपुर/तखतपुर

    कुष्ठ रोग या कोढ़ की बीमारी एक संक्रामक रोग है। यह रोग शिशुओं से लेकर बुजुर्गों तक यानि किसी भी उम्र में हो सकता है। इस बीमारी का इलाज संभव है। जल्दी इलाज करने से मरीज को शारीरिक विकलांगता से बचाया जा सकता है। इसी के मद्देनजर महात्मा गांधी की 150 वीं जन्म शताब्दी के उपलक्ष में कुष्ठ रोग जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान एक ओर जहां कुष्ठ रोगियों की पहचान स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की जाएगी। वहीं दूसरी ओर बीमारी के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।

    माह भर चलने वाले इस विशेष अभियान में पंचायत राज संस्थानों पर विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन होगा। इस मौके पर पंचायत राज प्रमुखों द्वारा कुष्ठ रोग के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाएगी। साथ ही कुष्ठ रोकथाम के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और बीमारी से बचाव व उपचार के बारे में लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस दौरान कुष्ठ रोग निवारण संबंधी शपथ भी दिलाई जाएगी। वहीं स्कूलों में भी प्रार्थना सभा के दौरान विद्यार्थियों को कुष्ठ रोग, लक्षण एवं इसके उपचार की जानकारी दी जाएगी।

    इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी तखतपुर, डॉ. सुनील हंसराज ने बताया – कुष्ठ रोग एक गंभीर बीमारी है, इसका इलाज संभव है। यह बीमारी छूने से व आनुवांषिक रोग नहीं हैं। मुख्य रूप से यह बीमारी माइक्रोबैक्टीरियम लेप्रै नामक बैक्टीरिया से हवा के जरिए फैलती है। पूरी तरह इसके लक्षण सामने आने में कई बार 4 से 5 साल का समय भी लग जाता है। रोग की जांच व इलाज सभी सरकारी अस्पतालों, उप स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध है।

    उन्होंने आगे बताया: “महात्मा गांधी ने कुष्ठ रोगियों की सेवा कर आमजन को इस कार्य के लिए प्रेरित किया था। महात्मा गांधीजी की यह विचारधारा वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है। समाज में कुष्ठ रोग के संबंध में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए चिकित्सा विभाग की ओर से महात्मा गांधी की 150वीं जन्म शताब्दी के उपलक्ष में 2 अक्टूबर से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जिसकी शुरूआत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र से की गई। इस दौरान लोगों को बीमारी और उसके बचाव की संपूर्ण जानकारी दी गई। पूरे अक्टूबर भर जिले में कई जागरूकता संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।“

    कुष्ठ उन्मूलन का लगातार प्रयास– कुष्ठ रोग उन्मूलन का प्रयास लगातार जारी है। इसके अंतर्गत तखतपुर में कुल 60 कुष्ठ रोगियों की पहचान जनवरी 2022 से अगस्त 2022 तक हुई है। चिन्हांकित मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

    दिखे यह लक्षण तो बरतें सावधानियां

    डॉ. हंसराज ने बताया: “इस बीमारी के दौरान शरीर पर सफेद चकत्ते यानी निशान पड़ने लगते हैं। निशान वाला स्थान सुन्न हो जाता है, यानी उस स्थान पर किसी तरह का प्रतिक्रिया नहीं होती है। ना ही दर्द का अहसास होता है। ये पैच या धब्बे शरीर के किसी एक हिस्से पर होने शुरू हो सकते हैं, जो ठीक से इलाज ना कराने पर पूरे शरीर में भी फैल सकते हैं। शरीर के कुछ हिस्से में गर्म-ठंडे का अहसास नहीं हो रहा हो या शरीर में सुन्नता बढ़ रही हो। ऐसी स्थिति में बिना देरी के तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ऐसे व्यक्ति की जांच करवाकर उपचार लेने से रोगी ठीक हो जाता है और शारीरिक विकलांगता से बच सकता है। साथ ही  6 महीने से लेकर डेढ़ साल के अंदर इस बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।“

  • जशपुर: पहाड़ी कोरवा महेन्द्र राम का आयुष्मान कार्ड के माध्यम से हो रहा निःशुल्क ईलाज

    जशपुर: पहाड़ी कोरवा महेन्द्र राम का आयुष्मान कार्ड के माध्यम से हो रहा निःशुल्क ईलाज

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखण्ड बगीचा के पहाड़ी कोरवा युवक श्री महेन्द्र राम का आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निःशुल्क उपचार किया जा रहा है। श्री महेन्द्र राम भालू के हमले में घायल हुए थे जिससे उनका जबड़ा क्षतिग्रस्त हुआ था। वर्तमान में युवक का हॉली क्रॉस अस्पताल अंबिकापुर में आयुष्मान कार्ड से निःशुल्क ईलाज किया जा रहा है तथा उनकी स्थिति में काफी सुधार हो रहा है।

  • जशपुर जिले में मिल रही है एम्बुलेंस की सुचारू सेवाएं: श्रीमती सरमनी बाई का प्रारंभिक उपचार एवं जांच उपरांत तत्काल उच्च स्वास्थ्य उपचार हेतु उच्च चिकित्सालय किया गया था रेफर

    जशपुर जिले में मिल रही है एम्बुलेंस की सुचारू सेवाएं: श्रीमती सरमनी बाई का प्रारंभिक उपचार एवं जांच उपरांत तत्काल उच्च स्वास्थ्य उपचार हेतु उच्च चिकित्सालय किया गया था रेफर

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखण्ड फरसाबहार की रहने वाली 60 वर्षीय श्रीमती सरमनी बाई पति स्व. दीनबंधु जो की बाईक की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुई थी जिन्हें बेहोश स्थिति में उपचार हेतु फरसाबहार स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया। फरसाबहार चिकित्सालय में आकस्मिक चिकित्सा हेतु डॉ. काजल पैंकरा व अन्य स्टॉफ मौजूद थे। जिनके द्वारा उनका प्राथिमक उपचार एवं स्वास्थ्य जांच किया गया। श्रीमती सरमनी बाई की जांच एवं प्रारंभिक उपचार उपरांत सिर में गंभीर चोट एवं नाक से खून बहने तथा ऑक्सीजन लेवल लो होना पाया गया। जिससे उन्हें उच्च स्वास्थ्य उपचार हेतु दोपहर 3.30 बजे ही तत्काल उच्च चिकित्सालय रेफर किया गया। कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार मरीज की स्थिति अति गंभीर होने के कारण उन्हें 108 एम्बुलेंस जिसमें टेक्नीशियन उपलब्ध रहते है के माध्यम से  उपचार करते हुए ले जाना आवश्यक था। इस दौरान मरीज के परिजन व अन्य ग्रामीणों द्वारा 108 एंबुलेंस में कॉल कर बुलाई गई। परंतु 108 एंबुलेंस समय पर उपलब्ध ना होने के कारण उन्हें  चिकित्सालय फरसाबहार की एंबुलेंस से ही अपरान्ह 4.10 बजे हॉली क्रॉस मिशन अस्पताल कुनकुरी भेजा गया।

  • मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना : न लंबी लाइन की चिंता न टेस्ट के लिए इंतजार, मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना से हो रहा नि:शुल्क इलाज एवं स्वास्थ्य परीक्षण

    मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना : न लंबी लाइन की चिंता न टेस्ट के लिए इंतजार, मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना से हो रहा नि:शुल्क इलाज एवं स्वास्थ्य परीक्षण

    सितंबर 2022 तक नगर पंचायत बस्तर में लगाए जा चुके कुल 31 शिविर में कुल 1 हजार 524 मरीजों का इलाज, 1 हजार 392 दवाईयों का वितरण और 189 लैब टेस्ट का लाभ मिला है स्थानीय निवासियों को

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, जगदलपुर

    बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का सभी को अधिकार है। लेकिन रोजी-मजदूरी करने वाले श्रमिकों को काम से समय नहीं मिल पाने की वजह से वे स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाते थे। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के द्वारा अस्पताल और गरीब तबके के लोगों के बीच की इसी खाई को पाटने के लिए मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना की शुरूआत की गई। जिसके अंतर्गत मोबाइल मेडिकल यूनिट से शहरी क्षेत्र के स्लम या झुग्गी बस्तियों में रहने वाले श्रमिकों और गरीब लोगों को निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना से रोजाना सुबह 8 से 3 बजे तक स्लम क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट के द्वारा कैंप लगाया जाता है। जहां पर निशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, इलाज और सभी तरह के प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं दी जाती है। इन मोबाइल मेडिकल यूनिट में लोगों की सुविधा के लिए एक डॉक्टर, लैब टेक्नीशियन और नर्स की सुविधा होती है। यह सरकार की दूरदर्शिता ही परिणाम है कि आज गरीब वर्ग का हर व्यक्ति इस सुविधा का लाभ ले पा रहा है।

    सरकार की मंशा है कि स्वास्थ्य की सुविधाएं हर व्यक्ति की पहुंच तक हो और इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए नगरीय क्षेत्र के झुग्गी बस्तियों में स्वास्थ्य सुविधा का लाभ रहवासी ले रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाने के लिए नगर पालिक निगम जगदलपुर में कुल 4 पंजीकृत मोबाइल मेडिकल यूनिट चल रहे हैं जहां सितंबर 2022 की स्थिति में अब तक कुल 2 हजार 135 शिविर लगाए जा चुके हैं, जिसके अंतर्गत कुल 1 लाख 24 हजार 194 मरीजों का इलाज हो चुका है। दवा वितरण की बात करें तो कुल 1 लाख 2 हजार 925 दवाएं वितरित की जा चुकी है। 24 हजार 333 मरीजों को टेस्ट का लाभ भी मिला है और ये आंकड़े निरंतर तेजी से बढ़ रहे हैं।

    इसके अलावा नगर पंचायत बस्तर में 2 मोबाइल मेडिकल यूनिट चलाई जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि सितंबर 2022 तक नगर पंचायत बस्तर में कुल 31 शिविर लगाए जा चुके हैं, जिसमें कुल 1 हजार 524 मरीजों का इलाज, 1 हजार 392 दवाईयों का वितरण और 189 लैब टेस्ट का लाभ यहां के स्थानीय निवासियों को मिला है।

    इन मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से आज हर गरीब तबके की पहुंच स्वास्थ्य सुविधाओं तक है, स्लम क्षेत्र में रहने वाली महिलाएं इसका सटिक उदाहरण हैं। महिलाओं को ए.एन.सी., पी.एन.सी. जांच की सुविधा निशुल्क मिल रही है। वहीं परीक्षण के दौरान गंभीर बीमारियों का पता चलने पर मरीज को उचित परामर्श के साथ उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर भी किया जाता है। साथ ही इन मोबाइल मेडिकल यूनिट में बेहतर साफ-सफाई, पीने योग्य पानी, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा की भी सुविधाएं हैं। मोबाइल मेडिकल युनिट में श्रम विभाग के द्वारा श्रमिकों का पंजीयन भी किया जाता है।

    मिशन स्कूल पारा, जगदलपुर की रहने वाली बिंदा नाग सरकार को धन्यवाद देते हुए कहती हैं  कि सरकार की गाड़ी आती है जिससे  हमें नि:शुल्क दवाई और इलाज मिलता है। यहां पर शुगर, डेंगू और मलेरिया की जांच का फायदा मिल रहा है। छोटी-छोटी परेशानियों का भी इलाज डॉक्टर लोग कर देते हैं। हम अच्छे हैं, स्वस्थ हैं, इसके लिए मैं सरकार का धन्यवाद करना चाहती हूं कि उन्होंने हमें यह सुविधा दी है।

    पनारापारा निवासी अजय पाल सिंह बताते हैं कि पहले समय निकालकर अस्पताल जाना पड़ता था। फिर लंबी लाइन और इंतजार। अब तो ये मेडिकल यूनिट आती है यहां पर घर के पास, मैं अपना बीपी, शुगर टेस्ट करवाता हूं। कोई परेशानी होने पर दवाई भी लेता हूं। अच्छा है हमारा समय बच रहा है और इलाज भी घर के समीप मिल रहा है।

  • छत्तीसगढ़ में कोरोना टीकाकरण : आंकड़ा 5 करोड़ से पार, 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की 94% प्रतिशत आबादी को लगाए जा चुके दोनों टीके

    अब तक 72.95 लाख लोगों को दी जा चुकी प्रिकॉशन डोज भी

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, रायपुर

    छत्तीसगढ़ में कोरोना टीकाकरण का आंकड़ा पांच करोड़ को पार कर गया है। कोविड-19 से बचाव के लिए प्रदेश भर में अब तक (2 अक्टूबर तक) कुल पांच करोड़ दस हजार 332 टीके लगाए गए हैं। इनमें से दो करोड़ 24 लाख 49 हजार 317 टीके प्रथम डोज के रूप में, दो करोड़ दो लाख 65 हजार 722 द्वितीय डोज के रूप में और 72 लाख 95 हजार 293 टीके प्रिकॉशन डोज के तौर पर लगाए गए हैं।

    प्रदेश में 18 वर्ष से अधिक की 94% प्रतिशत आबादी को कोरोना से बचाव का दोनों टीका लगाया जा चुका है। वहीं 15 वर्ष से 18 वर्ष के 62% प्रतिशत किशोरों को इसका दोनों टीका लगाया जा चुका है। प्रदेश में 12 वर्ष से 14 वर्ष के 55% प्रतिशत बच्चों को भी इसकी दोनों खुराक दी जा चुकी है।

    राज्य में 18 वर्ष से अधिक के एक करोड़ 85 लाख 13 हजार 230 नागरिकों, 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के दस लाख 21 हजार 128 किशोरों और 12 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सात लाख 31 हजार 364 बच्चों को कोविड वैक्सीन की दोनों खुराकें दी जा चुकी हैं। राज्य में 17 लाख 78 हजार 411 स्वास्थ्य कर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60 वर्ष से अधिक के लोगों तथा 18 वर्ष से 59 वर्ष के 55 लाख 16 हजार 822 नागरिकों को प्रिकॉशन डोज भी लगाया जा चुका है।

  • भाटिया फ्यूल्स के रास-डांडिया का रंगारंग समापन : अंतिम दिन श्वेता तिवारी के साथ झूमा शहर, मातारानी की आरती के साथ ही हुआ रंगारंग समापन

    भाटिया फ्यूल्स के रास-डांडिया का रंगारंग समापन : अंतिम दिन श्वेता तिवारी के साथ झूमा शहर, मातारानी की आरती के साथ ही हुआ रंगारंग समापन

    मातारानी की कृपा छत्तीसगढ़ पर बनी रहे, हमारा देश जहां बेटियों व माताओं का सम्मान होता है – अनिला भेड़िया

    मातारानी की सेवा का पर्व है नवरात्र, माता की शक्ति से भगवान राम ने किया था रावण का वध, माता की सेवा के लिये लोग रास डांडिया में शामिल होते हैं – धरमलाल कौशिक

    समदर्शी न्यूज ब्यूरो, बिलासपुर

    नवरात्रि पर्व पर भाटिया फ्यूल्स में रास-डांडिया के अंतिम दिन मातारानी की आरती के साथ ही रंगारंग समापन हो गया। देर रात तक गुजराती तथा बालीवुड गीतों की धुन पर श्वेता तिवारी के साथ लोगों ने रास-डांडिया का आनंद लिया। इस अवसर पर प्रदेश शासन की महिला बाल विकास समाज कल्याण मंत्री अनिला भेड़िया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, विधायक कृष्णमूर्ति बाँधी, रजनीश सिंह, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी समेत जनप्रतिनिधियों ने देवी मां के गीतों पर डांडिया भी खेला तथा नवरात्रि पर्व की सभी को शुभकामनाऐं देते हुये श्रद्धा-भक्ति के इस बड़े आयोजन की तारीफ करते हुये भाटिया परिवार को बधाई दी।

    मातारानी की आरती करते हुये प्रदेश शासन की मंत्री श्रीमती अनिला भेड़िया ने कहा है कि हमारे देश में जहां बेटियों का सम्मान होता है, वहीं मातारानी की कृपा हमारे छत्तीसगढ़ में इसी तरह बनी रहे। मातारानी की कृपा से भाटिया परिवार कई सालों से इतना बड़ा आयोजन कर रहे हैं। सभी को रास-डांडिया का इंतजार रहता है। मातारानी की कृपा से आज हम कोरोना से बाहर आकर आज इस मंच पर माता की शक्ति से आराधना कर रहे हैं और छत्तीसगढ़ महतारी की भी कृपा हम पर बनी है।

    फाउंडेशन क्रिकेट एकेडमी खेल मैदान में आयोजित भाटिया फ्यूल्स के रास-डांडिया में अंतिम दिन काफी रही भीड़। इस अवसर पर पूर्व विधान सभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने भी भाटिया फ्यूल्स के रास डांडिया की तारीफ करते हुये कहा कि माता की कृपा से भगवान राम ने लंका में जाकर रावण का वध किया था। संगीत की देवी माता सरस्वती, धन की प्राप्ति के लिये हम देवी लक्ष्मी का पूजन करते हैं और दुष्टों का नाश माता दुर्गा करती है। हमारा भारत नारी प्रधान देश है। हमारे छत्तीसगढ़ में मातारानी की कृपा से खुशियों का दरवाजा खुला रहे। लोगों के जीवन में समृद्धि आये। श्री कौशिक ने यह भी कहा कि भाटिया परिवार के इस आयोजन में तीन दिनों से दूर-दराज से लोग मातारानी की सेवा के लिये आ रहे हैं। भाटिया परिवार ने मातारानी की सेवा के लिये अच्छा आयोजन किया है। शहर के अलावा रायपुर तक प्रिंस भाटिया ने छलांग लगाई है। माता की कृपा हम सब पर बनी रहे। शक्ति का संचार तथा नारी की महिमा का यह नवरात्र का पर्व हम मनाते हैं।

    इस अवसर पर प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष भूपेंद्र सवन्नी, हरिभूमि के जनरल मैनेजर प्रियंक सिंह परिहार, नई दुनिया के संपादक सुनील गुप्ता, रायपुर नगर निगम के पार्षद व एम.आई.सी. सदस्य अजीत कुकरेजा, राज्य बाल आयोग की सदस्य पूजा खनूजा, एएसपी राजेंद्र जायसवाल, राहुल देव शर्मा, त्रिलोक श्रीवास, आतमजीत सिंह मक्कड़, रणजीत सिंह खनूजा सहित शहर के लोगों ने माता की आरती के साथ रास डांडिया का आनंद लिया। आज अंतिम दिन रास डांडिया में काफी भीड़ रही। कार्यक्रम में पूर्व विधायक चंद्रप्रकाश बाजपेई महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सीमा पाण्डेय, सीमा धृतेश, ऊषा किरण बाजपेई, स्वप्निल शुक्ला, राजेंद्र महराज, सतनाम सिंह खनूजा, कोटा मंडी बोर्ड के अध्यक्ष संदीप शुक्ला, मनु पाण्डेय, मनोज दुबे समेत अनेक लोगों ने रास डांडिया का आनंद लिया। इस अवसर पर अमोलक सिंह भाटिया, गुरमीत सिंह भाटिया तथा प्रिंस भाटिया ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। अतिथियों तथा रास डांडिया में शामिल होने आये  सभी का आभार जताते हुये फाउंडेशन क्रिकेट एकेडमी के चेयरमैन प्रिंस भाटिया ने कहा कि सभी के सहयोग से मातारानी की कृपा से इतना बड़ा आयोजन कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में और बड़े पैमाने पर वे रास डांडिया की तैयारी करेंगे।

    आज आखरी दिन बिग बॉस की विजेता तथा मशहूर टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने गरबा के गीत तथा बालीवुड गीतों की धुन पर शानदार प्रस्तुति दी तथा लोगों का मन मोह लिया। आज इशान खान, ट्विंकल साहू तथा शुभान हैदर के बालीवुड तथा गुजराती गरबा के गीतों पर सभी थिरके। देर रात तक लोगों ने रास-डांडिया का आनंद लिया। आज शहर के जनप्रतिनिधि रास गरबा की धुन पर थिरके भी तथा फाउंडेशन क्रिकेट एकेडमी खेल मैदान में शहर के सबसे बड़े आयोजन की तारीफ की।

    इस अवसर पर फाउंडेशन क्रिकेट एकेडमी के चेयरमैन प्रिंस भाटिया ने अतिथियों का सम्मान करते हुये सभी को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं, उन्होंने यह भी कहा कि लाक-डाउन तथा कोविड-19 का जिक्र करते हुये प्रिंस भाटिया ने कहा कि भाईयो और मेरे साथियो हम सबकी मुलाकात इसी मैदान में 2019 में हुई थी। 2020 में कोवड-19 की वजह से हम लोगों ने इस आपदा के दौरान अपने कई लोगों को खोया और हमारे कई अपने भी हमसे बिछड़ गये। आज दो साल बाद हम सब फिर से इस रास-डांडिया के मंच पर मिल रहे हैं और सभी अतिथियों के प्रति आभार जताया।

    आज अंतिम दिन भी काफी संख्या में रास डांडिया करने के लिये महिलाऐं, बच्चे एवं युवा पहुंचे हैं। तीन दिनों तक हमारे शहर के लोग फाउंडेशन क्रिकेट एकेडमी खेल मैदान में एक पारिवारिक माहौल में रास-डांडिया करेंगे। कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर आयोजन समिति के अमोलक सिंह भाटिया, गुरमीत सिंह भाटिया, मनदीप सिंह बग्गा ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से समीर अहमद, जावेद मेमन, मनीष अग्रवाल आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का सफल संचालन मनुराज ने किया। आज रास-डांडिया में भागीदारी निभाने वाले सभी का सम्मान भी किया गया।

  • अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर बुजुर्गों के स्वास्थ्य की हुई जांच, बुजुर्गों में होने वाली संचारी व गैर-संचारी बीमारियों के रोकथाम एवं उपचार की दी गई जानकारी

    अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर बुजुर्गों के स्वास्थ्य की हुई जांच, बुजुर्गों में होने वाली संचारी व गैर-संचारी बीमारियों के रोकथाम एवं उपचार की दी गई जानकारी

    सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में लगे स्वास्थ्य शिविर में कुल 85 वयोवृद्धों के स्वास्थ्य की जांच और परामर्श प्रदान किया गया

    बिलासपुर 1 अक्टूबर 2022,

    अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र तखतपुर में वृद्धजनों के स्वास्थ्य की विशेष रूप से जांच की गई। इस दौरान  बुजुर्गों में होने वाले संचारी व गैर-संचारी बीमारियों की जैसे डाइबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, शारीरिक कमजोरी एवं हड्डी रोग संबंधी समस्याओं की जांच की गई। साथ ही इन बीमारियों की रोकथाम और उपचार के बारे में जानकारी भी दी गई।

    वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सम्मान के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है। इसके साथ ही अक्टूबर माह को वयोवृद्ध माह के रूप में मनाया जाता है। इसी के मद्देनजर इस विशेष दिवस पर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में लगे स्वास्थ्य शिविर में कुल 85 वयोवृद्धों के स्वास्थ्य की जांच और परामर्श प्रदान किया गया। साथ ही साथ हड्डी संबंधी रोगों से पीड़ित बुजुर्गों को निःशुल्क छड़ी प्रदान की गई। वहीं नेत्रजांच कर मरीजों का निःशुल्क चश्मा बनाया गया और उन्हें निःशुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गई। साथ ही स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाने के लिए बुजुर्गों को प्रोत्साहित भी किया गया।

    इस संबंध में खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील हंसराज ने बताया: “वयोवृद्धों की सुरक्षा, संरक्षण तथा सम्मान के प्रति लोगों में जागरूकता के लिए प्रतिवर्ष 1 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है। इसके तहत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में बुजुर्गों के स्वास्थ्य परामर्श, जांच एवं उपचार के लिए विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। जिसमें विभिन्न जांच और परामर्श के साथ ही जरूरतमंद मरीजों को छड़ी और चश्मा निःशुल्क प्रदान किया गया। साथ ही अक्टूबर माह को वयोवृद्ध माह के रूप में मनाया जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आमदिनों में भी वृद्धजनों को स्वास्थ्य-लाभ दिए जाने का लगातार प्रयास किया जाता है। वयोवृद्ध माह के दौरान भी केन्द्र में 15 अक्टूबर तक वृद्ध मरीजों के लिए विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्हें स्वस्थ्य जीवन शैली अपनाने के लिए बुजुर्गों को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    बताते चलें वृद्धों एवं प्रौढ़ों के साथ होने वाले अन्याय, उपेक्षा और दुर्व्यवहार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से हर साल अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस (International Day of Older Persons) मनाया जाता है। इस वर्ष “रिजिलेंस ऑफ ओल्डर पर्सन इन चेंजिंग वर्ल्ड विद स्पेशल फोकस ऑन ओल्डर विमेन (Resilience Of Older Person in Changing World with special focus on older women)” की थीम पर यह दिवस मनाया जा रहा है।

    छड़ी और चश्मा पाकर मिली खुशी

    क्षेत्र के 65 वर्षीय सुखदेव साव जो लंबे समय से पैरों और जोड़ों में दर्द से पीड़ित थे। सुखदेव ने बताया- “क्षेत्र के मेडिकल स्टोर से दवाएं और तेल लाकर पैरों में लगाता था। कुछ दिन थोड़ा आराम मिलता मगर फिर दर्द बढ़ जाता जिससे मुझे चलने-फिरने में काफी दिक्कत हो रही थी। मितानिन ने मुझे स्वास्थ्य शिविर के बारे में बताया तो मैंने यहां आकर जांच कराई। चिकित्सकों ने जांच कर मुझे दवाएं और छड़ी भी दी, साथ ही नियमित व्यायाम करने की सलाह दी है। “ इसी तरह सुखीबाई की आंख से कम दिखता था, उनकी आंखों की जांच कर उन्हें चश्मा दिया गया। चश्मा पाकर सुखीबाई ने बताया: “स्वास्थ्य शिविर में मेरे आंखों के साथ ही रक्तचाप, डाइबिटीज की भी जांच हुई। चिकित्सकों ने वृद्धावस्था में होने वाली बीमारियों के बारे में भी बताया। साथ ही मुझे कुछ दवाएं और चश्मा भी दिया है। जिससे पढ़ने में अब मुझे परेशानी नहीं होगी। “