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स्वास्थ्य

  • प्रदेश में पहली बार मेडियस्टाइनल हाइडेटिड सिस्ट की सर्जरी अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में

    प्रदेश में पहली बार मेडियस्टाइनल हाइडेटिड सिस्ट की सर्जरी अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में

    • यह ऑपरेशन विभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्णकांत साहू एवं टीम के द्वारा किया गया
    • संभवतः प्रदेश में प्रथम सर्जरी एवं देश में बहुत ही कम
    • बहुत ही ज्यादा दुर्लभ 0-4 प्रति हजार हाइडेटिड सिस्ट की बीमारी में
    • मरीज को 2 महीने से खांसी एवं सांस लेने में हो रही थी परेशानी
    • यह एक कृमि इकाइनोकोकस ग्रेन्यूलोसस से होता है जो कुत्ते के द्वारा फैलता है
    • एक्स रे एवं सीटी स्कैन में हृदय का कैंसर बताया गया

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय एवं डाॅ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में विभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्णकांत साहू के नेतृत्व में मेडियस्टाइनल हाइडेटिड सिस्ट की सफल सर्जरी की गई। डाॅ. कृष्णकांत साहू के अनुसार संभवतः प्रदेश में पहली बार मेडियस्टाइनल हाइडेटिड सिस्ट की सर्जरी अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में की गई है। ऑपरेशन के बाद मरीज स्वस्थ है एवं अपने घर जाने को तैयार है।

    यह बीमारी जिसको हाइडेटिड सिस्ट कहा जाता है, यह कुत्ते के मल के द्वारा फैलता है। यह एक कृमि जिसको इकाइनोकोकस ग्रेन्यूलोसस कहा जाता है, के द्वारा होता है। यह उन लोगों को ज्यादा होता है जो कुत्ते के साथ रहते हैं या खेलते हैं। यह बीमारी (हाइडेटिड सिस्ट) सबसे ज्यादा लिवर को प्रभावित करता है। उसके बाद फेफड़े, मस्तिष्क, आंत एवं हृदय में भी हो सकता है लेकिन मेडियस्टाइनम (वक्ष गुहा का मध्य भाग / mediastinum) में हाइडेटिड सिस्ट का पाया जाना बहुत ही दुर्लभ है।  ऑपरेशन  करने वाले सर्जन डाॅ. कृष्णकांत साहू बताते हैं कि मेरे 15 साल के कैरियर में ऐसा केस पहली बार देखा। मेडियस्टाइनम का अर्थ होता है दो फेफड़ों के बीच का स्थान जहां पर हृदय स्थित होता है। यह बीमारी सामान्यतः  नार्थ अफ्रीका एवं साउथ अफ्रीका में सबसे ज्यादा पाया जाता है। यह युवक भी 2 साल पहले बीमार कुत्तों की सेवा करता था। उसी से आशंका है कि यह बीमारी उसी समय आयी होगी। 

    डाॅ. साहू का कहना है कि हमारे हार्ट, चेस्ट और वैस्कुलर सर्जरी विभाग में फेफड़े के हाइडेटिड सिस्ट के 3-4  ऑपरेशन हर माह होते हैं परंतु ऐसा केस उन्होंने आज तक नहीं देखा था। चार साल पहले इस विभाग में हृदय के अंदर हाइडेटिड सिस्ट का मामला आया था।

    21 वर्षीय युवक बालोद जिला का रहने वाला है एवं पी. एस. सी. प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। उसे लगभग दो महीनों से खांसी एवं सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। सांस इतना फूल रहा था कि उसको बात करने में भी तकलीफ हो रही थी। थोड़ी-थोड़ी खांसी लगभग एक साल से हो रही थी। स्थानीय डॉक्टर को दिखाने पर उसको खांसी की दवाई दी गई परंतु जब सांस ज्यादा ही फूलने लगी तो मरीज की दीदी जो कि अम्बेडकर अस्पताल में नर्सिंग इंचार्ज सिस्टर हैं, को बताया। फिर सिस्टर ने छाती का एक्स रे करवाया जिसमें पता चला कि हृदय के ऊपर कुछ गांठ है। इसके बाद डाॅ. साहू को संपर्क किया और चेस्ट का सीटी स्कैन कराया तो पता चला कि हार्ट के ऊपर कैंसर थर्ड ग्रेड का ट्यूमर है।

    मरीज की दीदी (सिस्टर) सीटीवीएस विभाग में नर्सिंग इंचार्ज रह चुकी हैं तो उनको पता था कि हृदय के कैंसर की सर्जरी अम्बेडकर अस्पताल के हार्ट, चेस्ट, वैस्कुलर सर्जरी विभाग में होता है इसलिए वह तुरंत अपने भाई को यहां पर डाॅ. के. के. साहू के पास ले आई। डाॅ. साहू ने सीटी. गाइडेड बायोप्सी के लिए कहा। इसमें भी कैंसर के प्रकार का पता नहीं चल पाया। परंतु मरीज की सांस बहुत ज्यादा चल रही थी इसलिए डाॅ. साहू ने बिना ज्यादा समय गंवाए ऑपरेशन के लिए तैयारी कर ली।

    ऐसे हुआ ऑपरेशन

    यह  ऑपरेशन अन्य हाइडेटिड सिस्ट के ऑपरेशन से अलग था। इसके ऑपरेशन करते समय तक यह पता नहीं था कि यह हृदय (मेडियस्टाइनम) का कैंसर न होकर हाइडेटिड सिस्ट है। इस मरीज में यह गांठ महाधमनी (Aorta), फेफड़े की धमनी (left pulmonary artery) एवं बायें मुख्य सांस नली को उसकी चपेट में ले रखा था एवं जरा भी चूक होने पर मरीज की जान जा सकती थी। इस  ऑपरेशन  के लिए हार्ट लंग मशीन को भी तैयार रखा गया था। इस गांठ का आकार 10X8 सेमी. था।

    इस प्रकार की बीमारी से बचा जा सकता है। यदि गली के कुत्ते से दूरी बनायें रखें या फिर यदि घर में कुत्ता है तो कृमिनाशक (डीवॉर्मिंग) दवाई का उपयोग करें या फिर डॉक्टर की सलाह पर समय- समय पर घर वाले कृमिनाशक दवाइयों का उपयोग करें। अभी अभी हमारे प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कृमिनाशक सप्ताह मनाया गया था। कृमि से न केवल खून की कमी एवं कमजोरी होती है बल्कि कृमि से इस प्रकार का हाइडेटिड सिस्ट भी होता है जो जानलेवा होता है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाये जाने वाले इस अभियान से इस बीमारी में कमी आ सकती है।

  • गंभीर व्याधि से ग्रसित 130 बच्चो के जीवन मे लौटी मुस्कान

    गंभीर व्याधि से ग्रसित 130 बच्चो के जीवन मे लौटी मुस्कान

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, अम्बिकापुर

    राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंह देव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सम्बद्ध जिला चिकित्सालय परिसर में चिरायु कार्यक्रम के तहत संचालित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी केंद्र) द्वारा संभाग के 130 बच्चो का उपचार कर उनके जीवन को सामान्य बनाया  है।

     चिरायु द्वारा संदर्भित बच्चों का उचित उपचार हेतु पूरे संभाग से इस केंद्र में  लाया जाता है। जन्मजात बीमारियां एवं अन्य परेशानियां से ग्रसित जैसे जन्मजात टेढ़े-मेढ़े पैर, जन्मजात बोलने और सुनने की शक्ति में कमी, सीखने में दिक्कत वाले बच्चो का ईलाज किया जाता है। क्योर इंटरनेशनल इण्डिया ट्रस्ट के द्वारा बच्चों को निःशुल्क जूते प्रदान किए जाते हैं एवं चिकित्सालय में उपलब्ध ऑर्थोपेडिक सर्जन के द्वारा कास्टिंग की जाती है। फिजियोथिरेपिस्ट के द्वारा लगातार एक्सरसाइज करा कर पैरों में मजबूती लाई जाती है। प्रत्येक शुक्रवार को निशुल्क क्लब फूट का शिविर जिला अस्पताल में लगाई जाती  है। सभी मरीजों को निशुल्क सेवाए प्रदान की जाती है।

  • स्वामी आत्मानन्द स्कूल के बच्चों का कराया गया दंत परीक्षण

    स्वामी आत्मानन्द स्कूल के बच्चों का कराया गया दंत परीक्षण

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, अम्बिकापुर

    स्वास्थ्य जागरूकता अभियान के तहत स्वस्थ दांत  स्वस्थ शरीर अंतर्गत स्वामी आत्मानन्द शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय अम्बिकापुर के करीब 200 विद्यार्थियों के दांत की जांच चिकित्सकों द्वारा शनिवार को  किया गया। इस दौरान चिकित्सको ने बच्चो को स्वस्थ दांत व दांतो की सफाई के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दिए। दांतो में संक्रमण रोकने के लिए दो बार ब्रश करने व माउथ वाश का उपयोग  करने  की सलाह  दिए।

    इस अवसर पर प्राचार्य डॉ बृजेश पांडेय, श्री राकेश मिश्रा, श्री मृगांक सिंह सहित अन्य शिक्षक मौजूद थे।

  • स्मार्टफोन के ब्लास्ट होने से गंभीर रूप से घायल 11 वर्षीय मासूम को नेत्र रोग विभाग में मिला त्वरित एवं सफल उपचार

    स्मार्टफोन के ब्लास्ट होने से गंभीर रूप से घायल 11 वर्षीय मासूम को नेत्र रोग विभाग में मिला त्वरित एवं सफल उपचार

    डॉक्टरों के मुताबिक, स्मार्टफोन के फटने से हुए गंभीर हादसे के कारण एक आंख की रोशनी लौट पाना अब मुश्किल

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    स्मार्टफोन/ मोबाइल के फटने से गंभीर रूप से घायल 11 वर्षीय मरीज आयुष खेस के आंखों के कॉर्निया में आयी चोट को पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय-डाॅ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय स्थित नेत्र रोग विभाग में डाॅ. संतोष सिंह पटेल के नेतृत्व में त्वरित ऑपरेशन करते हुए डाॅ. रेशु मल्होत्रा, डाॅ. सुशील, डाॅ. मोनिका, डाॅ. वैभव, डाॅ. साधना, डाॅ. अंशु एवं डाॅ. मधु ने ठीक किया। डाॅ. संतोष सिंह पटेल के अनुसार स्मार्टफोन या मोबाइल का ब्लास्ट इतना ज्यादा ख़तरनाक रहा कि आंख की कॉर्निया की चोट को  ऑपरेशन  पश्चात ठीक किया गया परंतु गंभीर आंतरिक चोट के कारण एक आंख की रोशनी आ पाना अब बहुत मुश्किल है। गंभीर हादसे के कारण एक आंख की रोशनी ही बचायी जा सकी।

    नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं रेटिना सर्जन डाॅ. संतोष सिंह पटेल केस के संबंध में आगे की जानकारी देते हुए बताते हैं कि आयुष खेस एक 11 वर्षीय लड़के को उसके माता- पिता स्मार्टफोन विस्फोट की हिस्ट्री के साथ डाॅ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग में लेकर आए। परिजनों के मुताबिक घटना उस समय घटी जब बच्चा 2 घंटे से ज्यादा समय तक फोन पर गेम खेल रहा था और और फोन चार्ज हो रहा था। उसके पिता ने जो मोबाइल खराब हो गया था उसको खेलने के लिए दे दिया था। मोबाइल पहले स्थानीय बाजार से खरीदा था, हालाँकि, वह मोबाइल फोन या उसकी बैटरी के निमार्ता के बारे में नहीं जानते हैं। मरीज सीतापुर सरगुजा का रहने वाला है। घर पर 10 बड़े और 3 बच्चे हैं। किसान परिवार में सभी साथ रहते हैं। मोबाइल ब्लास्ट की घटना के समय बच्चा अकेला था और लम्बे समय तक मोबाइल फोन को चार्ज में लगाकर गेम खेल रहा था। 12.02.2023 की शाम को 5 बजे की घटना के बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीतापुर ले जाया गया। वहां प्रायमरी उपचार के बाद मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रिफर कर दिया गया। वहां से डीकेएस अस्पताल रायपुर रिफर किया गया। वहां उपचार के पश्चात् चूँकि आंखों में चोट आई थी तो डिपाटर्मेंट ऑफ़ आॅप्थेल्मोलाॅजी (नेत्र रोग विभाग) में 20.02.2023 को भेजा गया। मरीज के सीने, पेट, चेहरे और दाहिने हाथ में कई चोटे आई थीं इसलिए उन्हें तुरंत ऑपरेशन रूम में ले जाया गया।

    कॉर्निया की चोट को ऑपरेशन पश्चात ठीक किया गया परन्तु गंभीर आंतरिक चोट के कारण एक आंख की रोशनी आ पाना अब बहुत मुश्किल है। हालांकि एक आँख की ही रोशनी बचायी जा सकी। मरीज इस तरह से एक आंख और एक हाथ को खो चुका है। उसकी एक हाथ की कुछ उंगलियां ब्लास्ट में कट चुकी हैं।

    मोबाइल ब्लास्ट’ या ’बॉम्बाइल’ क्यों फट रहे हैं मोबाइल फोन?

    डाॅ. पटेल के अनुसार स्मार्टफोन के फटने या आग लगने का मुख्य कारण स्मार्टफोन का अत्यधिक गर्म  होना है। ऐसे कई कारण हैं जिनकी वजह से स्मार्टफोन ज्यादा गरम हो सकते है। अत्यधिक गेमिंग और बहु कार्यण (मल्टीटास्किंग) के बाद स्मार्टफोन गर्म हो सकते हैं। कई जगहों से मोबाइल फोन के अचानक हाथ में या जेब में या कॉल रिसीव करने के बाद फटने की खबरें आती हैं इसे ही ’मोबाइल ब्लास्ट’ या ’बॉम्बाइल’ कहते हैं जिससे रोगी, परिवार के सदस्यों और समाज दोनों पर शारीरिक और मानसिक रूप से विनाशकारी परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

    तकनीक के आधुनिक दौर में मोबाइल ब्लास्ट हाथ में चोट लगने का एक नया तरीका बनकर उभर रहा है। यह घाव के एक विस्तृत स्पेक्ट्रम का प्रतिनिधित्व करता है जिसमें एक साधारण घाव से लेकर अंगच्छेदन तक विनाशकारी शारीरिक आघात और जटिलताएं होती हैं इसलिए, मोबाइल सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करके रोकथाम हमेशा बेहतर होती है। हाथ की ब्लास्ट इंजरी के प्रबंधन में पोस्ट-ऑपरेटिव फिजियोथेरेपी के साथ प्रारंभिक डेब्रिडमेंट और घाव कवरेज की ओर ध्यान देना है। इन चरणों में हम मोबाइल गरम होने से बचाव एवं ब्लास्ट होने से बचाव कर सकते  हैं – 1ः शारीरिक नुकसान से बचने के लिए फ़ोन केस का उपयोग करना, 2ः अत्यधिक बाहरी तापमान से बचना, 3ः फ़ोन को उस स्थान पर चार्ज करना जहाँ से आप दूर हो  4ः  बैटरी अच्छी हो हमेंशा चेक करें फूलने पे तत्काल बदल देवें। 5ः  अपने फ़ोन को हमेशा 30-80 प्रतिशत बैटरी जीवन (बैटरी लाइफ) के बीच चार्ज करना 6ः कंपनी द्वारा अनुशंसित चार्जर केबलों का उपयोग करना  चाहिए ।

    फोन ब्लास्ट होने से पहले क्या होता है?

    फ़ोन फटने से पहले कोई विशिष्ट चेतावनी देते हैं, हालाँकि, कुछ फुफकारने या चटकने की आवाज़ें हो सकती हैं, या प्लास्टिक या रसायनों के जलने की गंध आ सकती है। इन संकेतों को फोन के क्षतिग्रस्त होने और फटने से सावधान रहने के रूप में नोट किया जाना चाहिए।

    डॉ. पटेल के अनुसार, बच्चों को मोबाइल से दूर रखें, इससे आँखों में मायोपिया होने का ख़तरा कोविड/कोरोना के बाद बहुत ज़्यादा हो गया है। पढ़ाई के लिए किताब या डेस्कटॉप का उपयोग करें। रही बात मनोरंजन की तो इसके लिए टेलीविजन ही सही है।

  • जशपुर : आयुष चिकित्सा पद्धति आज के दौर में मानव स्वास्थ्य सेवा में निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका

    जशपुर : आयुष चिकित्सा पद्धति आज के दौर में मानव स्वास्थ्य सेवा में निभा रही महत्वपूर्ण भूमिका

    आयुष चिकित्सा पद्धति को अपनाकर प्रकृति से जुड़े रहने के लिए लोगों को किया जा रहा प्रेरित

    विभाग द्वारा आयुष चिकित्सा के विभिन्न माध्यम से 25,051 हितग्राहियों को किया गया लाभान्वित

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    आयुष चिकित्सा पद्धति आज के इस  तेज रफ्तार वाली जिंदगी में मानव सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आयुष विभाग द्वारा आमजनों को आयुष चिकित्सा के अनुरूप खुशहाल व स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर सुखी स्वस्थ जीवन जीने व आयुष चिकित्सा पद्धति को अपनाकर प्रकृति से जुड़े रहने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। आयुष विभाग का यह महत्वकांक्षी तथा जन कल्याणकारी कार्यक्रम जिले में पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही है। 

    वर्तमान परिदृश्य में हर कोई किसी न किसी बीमारी से पीड़ित हैं। साथ ही अंग्रेजी दवाओं पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। ऐसे में आयुष विभाग की उपयोगिता निरंतर बढ़ती जा रही है।  आयुष चिकित्सकों तथा स्वास्थ्य प्रदाताओं द्वारा रोगियों के स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल की जा रही है तथा आवश्यक होने पर शारीरिक या मानसिक स्वास्थ्य परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ-साथ आहार-विहार संबंधित दिशा-निर्देश भी रोगियों को दिए जा रहे है। जिससे वे शीघ्र स्वास्थ्य लाभ पा सके।

    जिला जशपुर में अधिनस्थ 58 संस्थाएं हैं। जिसके अंतर्गत आयुष पॉलीक्लीनिक, आयुषविंग, थेरेपी सेंटर, क्लीनिक, आयुर्वेद, होम्योपैथी औषधालय सहित सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी चिकित्सा संचालित हैं। विभाग द्वारा आयुर्वेद एवं होम्योपैथी औषधि तथा पंचकर्म, शिविर, स्वास्थ्य मेला सहित अन्य  सेंटरों के माध्यम से दिसम्बर 2022 में कुल 25,051 हितग्राहियों को औषधि वितरण कर निःशुल्क उपचार किया गया है। जिसके अंतर्गत आयुष संस्थाओं द्वारा ओपीडी के माध्यम से 17,277 हितग्राहियों लाभांवित किया गया है। इसी प्रकार  हाट बाजार शिविर द्वारा लाभान्वित  हितग्राहियों की संख्या 3149 है।  सियान जतन क्लीनिक योजना में लाभावित हितग्राहियों की संख्या 1068,  आयुष हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर में लाभांवित योग हितग्राहियों की संख्या 2793 एवं पंचकर्म में लाभांवित हितग्राहियों की संख्या 764 है।

    आयुष विभाग द्वारा हाट-बाजार योजनांतर्गत प्रत्येक माह पाक्षिक रूप से 2 बार हाट-बाजार में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही जिला एवं विकासखण्ड स्तर पर समय-समय पर शिविर आयुष स्वास्थ्य मेला का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें वृहद रूप से आयुर्वेद का प्रचार प्रसार कर घरेलू औषधियों का उपयोग हेतु चिकित्सकों द्वारा जानकारी दी जाती है। शिविर में आने वाले हितग्राहियों का उपचार तथा उनको निःशुल्क औषधि वितरण किया जाता है।

    स्कूली छात्र  छात्राओं का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें स्वस्थ रहने के लिये जागरूकता प्रदान की जा रही है। इसी प्रकार सियान जतन क्लीनिक योजना वृद्ध व्यक्तियों (60 वर्ष) का सप्ताह के प्रत्येक गुरुवार को निःशुल्क पंजीयन, उपचार, औषधि वितरण किया जाता है। साथ ही पंचकर्म चिकित्सा की आवश्यकता वाले वृद्धजन को पंचकर्म चिकित्सा की सुविधा दी जा रही है।

    योग शिविर का आयोजन एवं आयुष हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर में प्रतिदिन योगाभ्यास जन सामान्य को कराया जा रहा है। वर्ष में 02 ब्लॉक स्तरीय तथा 01 जिला स्तरीय शिविर का आयोजन आयुष विभाग द्वारा सफलता पूर्वक किया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आयुष काढ़ा का वितरण किया जा रहा है। आयुष विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में सहयोग किया जा रहा है। जिले में पदस्थ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों के द्वारा ग्रामीण जनों की सहायता से उनकी बाड़ियों में शत प्रतिशत मुनगा रोपण के साथ ही आंवला, तुलसी, हल्दी, गुडुची, नीम, करंज इत्यादि अन्य औषधीय पौधों का अधिक संख्या में रोपण किये जाने हेतु प्रेरित भी कर रहे है।

    आयुष मिशन योजना के तहत लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है। शहर से लेकर गांव तक जगह-जगह शिविर लगाया जा रहा है। कैंप में लोगों को बताया जा रहा है कि आयुष के जरिए कैसे  बीमारियों से दूर रहा जा सकता है। मौसमी बिमारियों एवं उनसे बचाव के लिये हितग्राहियों को घरेलू उपचार के संबंध में जन जागरूकता लायी गयी है। जिसमें वृद्धावस्था योग, संतुलित आहार विहार, सहजन, रक्ताल्पता, कुपोषण से मुक्ति के संबंध में प्रचार प्रसार किया जा रहा है। साथ ही सूचना शिक्षा एवं संचार के माध्यम जैसे पाम्पलेट, ब्रोसर, फ्लेक्स द्वारा भी लोगों को अधिक संख्या में आयुष चिकित्सा पद्धति द्वारा सफलतापूर्वक उपचार हेतु  जागरूक किया जा रहा है। जिससे यह योजना लोगों को भा रही है। और अधिक से अधिक आमजन योजना से जुड़ते जा रहे है।

  • छत्तीसगढ़ के दो अस्पतालों को ‘मुस्कान’ कार्यक्रम के अंतर्गत मिला एनक्यूएएस प्रमाण पत्र : पीडियाट्रिक ओपीडी, पीडियाट्रिक वार्ड, एसएनसीयू, एनआरसी और एनबीएसयू का टीम ने किया मूल्यांकन

    छत्तीसगढ़ के दो अस्पतालों को ‘मुस्कान’ कार्यक्रम के अंतर्गत मिला एनक्यूएएस प्रमाण पत्र : पीडियाट्रिक ओपीडी, पीडियाट्रिक वार्ड, एसएनसीयू, एनआरसी और एनबीएसयू का टीम ने किया मूल्यांकन

    केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम के मूल्यांकन में दुर्ग जिला अस्पताल को 97 प्रतिशत और पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को मिले 84 प्रतिशत अंक

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    ‘मुस्कान’ कार्यक्रम के तहत बच्चों और नवजातों को उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवा तथा उन्हें बेहतर इलाज उपलब्ध कराने वाले दुर्ग जिला चिकित्सालय एवं पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS – National Quality Assurance Standard) प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने विगत दिसम्बर माह में जिला चिकित्सालय दुर्ग का और इस साल जनवरी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन का निरीक्षण कर इन दोनों अस्पतालों में बच्चों व नवजातों के लिए उपलब्ध सेवाओं की गुणवत्ता का परीक्षण किया था। टीम ने इस संबंध में वहां इलाज कराने वालों से भी फीडबैक लिया था।

    केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम के मूल्यांकन में जिला अस्पताल दुर्ग को 97 प्रतिशत और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाटन को 84 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए। टीम ने दुर्ग जिला चिकित्सालय में पीडियाट्रिक ओपीडी, पीडियाट्रिक वार्ड, एसएनसीयू और एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) का परीक्षण किया। वहीं उन्होंने पाटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पीडियाट्रिक ओपीडी और एनबीएसयू (Newborn Stabilization Unit) का निरीक्षण कर मूल्यांकन किया।

    अस्पतालों का राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक सर्टिफिकेशन 12 मानकों के आधार पर किया जाता है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाण पत्र प्रदान करने के पूर्व विशेषज्ञों की टीम द्वारा अस्पताल की सेवाओं और संतुष्टि स्तर का कई मानकों पर परीक्षण किया जाता है। इसके लिए संस्था द्वारा सेवा प्रदायगी, मरीज संतुष्टि, क्लिनिकल सर्विसेस, इनपुट, संक्रमण नियंत्रण, सपोर्ट सर्विसेस, गुणवत्तापूर्ण प्रबंध, आउटपुट जैसे मानकों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है। मूल्यांकन में खरा उतरने वाले अस्पतालों को ही केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा गुणवत्ता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।

  • चार सालों से नाक में फंगल इंफेक्शन, जिला अस्पताल के मेडिकल टीम ने ऑपरेशन कर गंगा राम को दिलाई राहत

    चार सालों से नाक में फंगल इंफेक्शन, जिला अस्पताल के मेडिकल टीम ने ऑपरेशन कर गंगा राम को दिलाई राहत

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, दुर्ग

    सांतरा दुर्ग निवासी श्री गंगा राम पिछले चार सालों से नाक की समस्या से परेशान थे। इसके चलते उन्हें नाक में भारीपन, नाक बंद रहने, नाम से खून आने की समस्या से जूझ रहे थे। अपनी इस समस्या को लेकर जिला अस्पताल दुर्ग पहंुचे, जहां जांच के बाद नाक में फंगल इंफेक्शन बताया गया, जिसे राइनोस्पोरिडियोसिस भी कहा जाता है। जिला अस्पताल की डॉ.रेणु तिवारी ने बताया कि इस प्रकार के फंगल इंफेक्शन गंदे तालाब के पानी में नहाने से होता है। फंगल इंफेक्शन में व्यक्ति के नाक में एक खून का मस्सा बन जाता है, जिसके फटने से खून बहने लगता है। इसके फैलने का खतरा बहुत होता है। इसलिए इसे तुरंत ऑपरेशन कर निकाला जाता है। इस ऑपरेशन में चंदूलाल मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रशांत एवं डॉ. बसंत चौरसिया के द्वारा श्री गंगा राम का सफल ऑपरेशन किया गया और आज मरीज पूर्ण रूप से स्वस्थ है।

    मेडिकल टीम में सीएमएचओ डॉ. जेपी मेश्राम, सिविल सर्जन डॉक्टर योगेश शर्मा एवं मेडिकल स्टॉफ मयूरी, शिबेन, रमेश, शाइनी एंड भागीरथी, जीवन दीप समिति के कार्यकारिणी सदस्य दिलीप ठाकुर, दुष्यंत देवांगन, प्रशांत डोंगावकर ने भी सहयोग प्रदान किया।

  • स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की ली बैठक : ब्लड बैंक, हमर लैब व ओटी सेवाओं के उपकरणों के लिए पुनरीक्षित प्रस्ताव भेजने के दिए निर्देश

    स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की ली बैठक : ब्लड बैंक, हमर लैब व ओटी सेवाओं के उपकरणों के लिए पुनरीक्षित प्रस्ताव भेजने के दिए निर्देश

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर जिलों में ब्लड बैंक, हमर लैब और ओटी सेवाओं के उपकरणों के लिए पुनरीक्षित प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में डीकेएस अस्पताल में सुपरस्पेश्लिस्ट्स और अन्य डॉक्टरों को इंसेंटिव प्रदान करने के लिए अस्पताल प्रबंधन को शासन को प्रस्ताव भेजने को कहा। स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री प्रसन्ना आर., स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक श्री भीम सिंह और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक श्री भोसकर विलास संदिपान भी बैठक में मौजूद थे।

    स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने चीफ मिनिस्टर पब्लिक हेल्थ ट्रांसफारमेशन फण्ड (CMPHTF) में वर्तमान में उपलब्ध राशि और आगामी वित्तीय वर्ष 2023-24 में दिसम्बर माह तक प्राप्त होने वाली अनुमानित राशि से कार्य स्वीकृति के लिए प्रस्ताव तैयार कर अधिशासी समिति की अगली बैठक में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिलों में ओटी सेवाओं को मजबूत करने अधोसंरचना और उपकरणों की उपलब्धता का विश्लेषण कर जरुरी निर्माण कार्यों एवं उपकरणों  का प्रस्ताव अनुमोदन के लिए चीफ मिनिस्टर पब्लिक हेल्थ ट्रांसफारमेशन फण्ड की आगामी बैठक में रखने को कहा।

    श्री सिंहदेव ने जनवरी-2022 में ब्लड बैंक, हमर लैब और ओटी सेवाओं के उपकरणों के लिए अनुमोदित गतिविधियों में उपकरणों की वर्तमान जरुरतों को ब्लड बैंक, हमर लैब व स्टोर के संबंधित नोडल अधिकारियों के माध्यम से जिले से वेरिफाई करवाकर वर्तमान आवश्यकता के अनुसार पुनरीक्षित प्रस्ताव भेजने के भी निर्देश दिए।

  • जिला अस्पताल जशपुर सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के लिए अलग अलग रंग के चादर बिछाया जा रहा

    जिला अस्पताल जशपुर सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों के लिए अलग अलग रंग के चादर बिछाया जा रहा

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, जशपुर

    कलेक्टर डॉ रवि मित्तल के निर्देशन में जिले के सभी अस्पतालों में आमजनों के स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुचाने हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है। साथ ही सभी स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार के साथ ही केंद्रों की साफ सफाई सुनिश्चित की जा रही है। इसी कड़ी में जशपुर के जिला अस्पताल सहित लोदाम, मनोरा, कांसाबेल, पत्थलगांव, कुनकुरी सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के पुरुष और महिला वार्ड में भर्ती मरीजों हेतु प्रतिदिन अलग अलग रंग के चादर बिछाए जा रहे है। इस हेतु सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को अपने केंद्रों में यह व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है।

    कलेक्टर ने सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि प्रतिदिन अलग अलग रंगों के चादर बदलकर उसकी संबंधित गुरूप में फोटो शेयर करें, ताकि जिले के बेबसाइट में अपलोड और ट्विटर किया जा सके।

  • अब कैंसर की जांच हुई आसान, ‘हमर लैब’ में मिल रही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य जांच की सुविधा

    अब कैंसर की जांच हुई आसान, ‘हमर लैब’ में मिल रही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य जांच की सुविधा

    जिला अस्पतालों के  हमर लैबमें 120 और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो की लैब में 50 तरह की जांच की सुविधा

    समदर्शी न्यूज़ ब्यूरो, रायपुर

    प्रदेश के जरूरतमंद लोगों के लिए ‘हमर लैब’ संजीवनी के रूप में उभरा है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में अधिक से अधिक और आसानी से स्वास्थ्य सुविधा मिल सके, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयासरत है। मरीज इनसे लगातार लाभान्वित भी हो रहे हैं। पहले बड़ी बीमारियों की जांच कराने के लिए हजारों रूपए खर्च करना पडता था, लेकिन ‘हमर लैब’ में अब सभी प्रकार की स्वास्थ्य जांच नि:शुल्क हो रही है।

    पंडरी स्थित रायपुर जिला चिकित्सालय में 62 साल के घनश्याम (परिवर्तित नाम) हार्निया की समस्या लेकर पहुंचे थे। उसकी प्राथमिक जांच के बाद सर्जन ने सीबीसी की सलाह दी। रायपुर जिला अस्पताल के ‘हमर लैब’ में ही उसकी सारी जांच की गई। जांच के बाद उसका डब्ल्यूबीसी काउंट एक लाख पांच हजार पाया गया।

    पैथोलॉजिस्ट डॉ. श्रद्धा साहू ने घनश्याम के स्वास्थ्य का परीक्षण कर पेरिफेरल स्मीयर की स्लाइड बनवाकर जांच की गई। इस टेस्ट में लाल व सफेद रक्त कोशिकाओं (आरबीसी और डब्ल्यूबीसी) और प्लेटलेट्स के आकार व संख्या की जांच की जाती है। यह दूसरे काउंट्स का पता लगाने में भी मदद करता है, जैसे डब्ल्यूबीसी या न्यूकोराईट के विभिन्न प्रकारों के आकार और संख्या की जांच करना।

    घनश्याम के ‘हमर लैब’ में सम्पूर्ण जांच के बाद स्पलीन का बढ़ा होना पाया गया। रोगी के नमूने को साइटोजेनेटिक विश्लेषण के लिए भेजा गया जिसमें क्रॉनिक मायलोजेनस ल्यूकेमिया की पुष्टि हुई।

    जरूरतमंदों तक समय पर पहुंच रहा इलाज

    ‘हमर लैब’ से जरूरतमंदों तक समय रहते इलाज पहुंच पा रहा है। प्रदेश में संचालित ‘हमर लैब’ के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जांच व डायग्नोस्टिक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। ‘हमर लैब’ राज्य के जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्थापित किए गए हैं। जिला चिकित्सालयों की ‘हमर लैब’ में 120 प्रकार की और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रो की लैब में 50 तरह की जांच की सुविधा उपलब्ध है। इन लैबों का संचालन स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के द्वारा किया जा रहा है।