द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश कुनकुरी ने सुनाया फैसला, आरोपी सुरेश राम नायक को धारा 302 के तहत उम्रकैद और अर्थदंड की सजा
कुनकुरी, 01 अगस्त 2025 —जशपुर जिले में एक दिल दहला देने वाले घरेलू हिंसा और हत्या के मामले में न्याय का पल आया, जब द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश, कुनकुरी श्री बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने पत्नी की निर्मम हत्या करने वाले आरोपी सुरेश राम नायक (36 वर्ष) को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस निर्णय ने एक ओर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया, वहीं समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया कि स्त्री के चरित्र पर शंका कर उसकी हत्या कर देना किसी भी सूरत में क्षम्य नहीं है।
इस प्रकरण में अभियोजन की ओर से राज्य का प्रतिनिधित्व अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने किया, जबकि बचाव पक्ष की ओर से विधिवेत्ता टी. अख्तर ने आरोपी की ओर से पैरवी की।
घटना का संक्षिप्त विवरण:
यह मामला ग्राम रेमते, सुखबासुपारा (थाना कुनकुरी) का है, जहां 11 दिसंबर 2022 की रात आरोपी सुरेश राम नायक ने अपनी पत्नी सुमित्रा बाई के साथ एक घरेलू विवाद के दौरान, चरित्र पर संदेह करते हुए सीमेंट की ईंट से सिर पर वार किया और फिर हाथों से उसके सीने पर मारपीट की। अत्यधिक रक्तस्राव और भीषण चोटों के चलते उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। यह एक ऐसा मामला था जिसमें संदेह, क्रोध और हिंसा का घातक मिश्रण सामने आया।
घटना की जानकारी मृतका के पिता सोनसाय राम ने थाना कुनकुरी को दी, जिसने बताया कि उसकी बेटी सुमित्रा ने अपने मनपसंद जीवनसाथी के रूप में सुरेश से शादी की थी, लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही उसे लगातार उत्पीड़न, मारपीट और चरित्र पर आरोपों का सामना करना पड़ता था। नवंबर 2022 में आरोपी गुजरात से वापस लौटने के बाद फिर से हिंसक हो गया और घटना से दो दिन पूर्व ही सुमित्रा, जो अपने मायके चली गई थी, वापस घर लौटी थी। घटना की रात दोनों के बीच फिर से झगड़ा हुआ और सुरेश ने जानलेवा हमला कर उसकी जान ले ली।
प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से श्रीमती पुष्पा सिंह, अपर लोक अभियोजक ने अदालत में शासन का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को तथ्यों, चिकित्सीय रिपोर्ट, गवाहों और घटनास्थल से जब्त खून से सनी ईंट जैसे भौतिक साक्ष्यों के आधार पर मजबूती से प्रस्तुत किया। अभियोजन ने यह स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा सिर और सीने जैसे नाजुक अंगों पर हमला करना, यह दर्शाता है कि उसकी हत्या की नीयत स्पष्ट थी। वहीं बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री टी. अख्तर ने पैरवी करते हुए अदालत से यह निवेदन किया कि यह आरोपी का पहला अपराध है, और वह विचारणीय अवधि में 2 वर्ष 7 माह 19 दिन तक न्यायिक अभिरक्षा में रहा है, अतः उसे सजा में रियायत दी जाए।
अदालत की दृष्टि में अपराध की गंभीरता:
न्यायालय ने सभी साक्ष्यों, विशेषज्ञ गवाही, फॉरेंसिक रिपोर्ट और दोनों पक्षों की दलीलों पर विस्तार से विचार करते हुए यह निर्णय दिया कि आरोपी सुरेश राम नायक का कृत्य न केवल उसकी पत्नी के जीवन को समाप्त करने वाला है, बल्कि यह सामाजिक व्यवस्था और स्त्री अस्मिता के लिए भी गहन खतरा है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि मात्र संदेह के आधार पर किसी स्त्री की हत्या करना सभ्य समाज में किसी भी दृष्टिकोण से स्वीकार्य नहीं हो सकता।
इसलिए, अदालत ने आरोपी को धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद और ₹1000 के अर्थदंड, साथ ही जुर्माना अदा न करने की स्थिति में अतिरिक्त 6 माह का सश्रम कारावास दिए जाने का आदेश पारित किया। साथ ही, धारा 428 दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत न्यायिक हिरासत की अवधि को सजा में समायोजित करने के निर्देश भी दिए गए।
