खेत में महिला से दरिंदगी : कुनकुरी कोर्ट ने बलात्कारी को सुनाई 10 साल की कठोर कैद और जुर्माना

कुनकुरी, 9 अगस्त 2025 : जशपुर जिले के कुनकुरी में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो महिला सुरक्षा और न्याय की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। अदालत ने 24 वर्षीय युवक अभय मनीष तिर्की को बलात्कार के गंभीर अपराध में 10 साल के कठोर कारावास और ₹1,000 के जुर्माने की सज़ा सुनाई है। यह फैसला न केवल पीड़िता को न्याय दिलाता है, बल्कि समाज में ऐसे घृणित अपराधों के प्रति एक सख्त संदेश भी देता है।

इस मामले में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व श्रीमती पुष्पा सिंह, अपर लोक अभियोजक ने किया। उन्होंने राज्य की ओर से आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए। वहीं, अभियुक्त अभय मनीष तिर्की का बचाव श्री विष्णु कुलदीप, अधिवक्ता ने किया।

यह मामला 11 अप्रैल 2023 का है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक महिला अपने देवर के साथ एक त्यौहार से लौट रही थी। शाम करीब 4 बजे, जब वह अकेली पैदल घर की ओर बढ़ रही थी, तब आरोपी अभय मनीष तिर्की ने उसे घर छोड़ने की बात कहकर विश्वास जीता। मगर, कुछ ही दूरी पर, एक सुनसान खेत के पास, आरोपी का असली चेहरा सामने आ गया। उसने पीड़िता को जमीन पर पटक दिया, उसका मुंह दबा दिया ताकि वह चीख न सके, और उसके साथ जबरन बलात्कार किया। यह वारदात न केवल शारीरिक थी, बल्कि एक मानसिक आघात भी था, जिसका दर्द शायद ही कभी पूरी तरह से भर पाएगा।

इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद, पीड़िता ने हार नहीं मानी। उसने साहस का परिचय देते हुए अगले दिन अपने पति और गांव के सरपंच को पूरी बात बताई। इसके बाद, उन्होंने मिलकर नारायणपुर थाने में आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण, घटनास्थल का सूक्ष्म निरीक्षण और गवाहों के बयानों को सावधानीपूर्वक दर्ज किया गया। इन सभी सबूतों ने न्याय की नींव रखी। 13 अप्रैल 2023 को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और फॉरेंसिक जांच के लिए सभी आवश्यक नमूने एकत्र किए गए।

मामले की सुनवाई के दौरान, आरोपी ने खुद को निर्दोष बताते हुए बचने की कोशिश की, लेकिन अभियोजन पक्ष ने मजबूत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से उसके झूठ को बेनकाब कर दिया। न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के एक महत्वपूर्ण न्यायदृष्टांत का हवाला देते हुए कहा कि “किसी महिला पर हमला या बलात्कार एक मानसिक हिंसा है, जिसका जख्म जीवन भर रहता है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे गंभीर अपराधों में अभियुक्त के प्रति किसी भी तरह की उदारता या सहानुभूति दिखाना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। यह फैसला बताता है कि हमारा न्यायिक तंत्र महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।

अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत न्यूनतम 10 साल की सज़ा सुनाई। इसके अलावा, ₹1,000 का जुर्माना लगाया गया, जिसे न भरने पर उसे 6 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। फैसले में यह भी सुनिश्चित किया गया कि पीड़िता को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा मिले, ताकि वह इस सदमे से उबरने के लिए सहारा पा सके। आरोपी 13 अप्रैल 2023 से हिरासत में है, इसलिए उसकी बची हुई सज़ा की गणना इस अवधि के बाद से की जाएगी।

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