हिमालयी चोटियों पर जशपुर की गूंज: आदिवासी पर्वतारोहियों की ऐतिहासिक उपलब्धि, अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने की सराहना

“12 घंटे में शिखर फतह, 8 नए मार्ग तैयार—जशपुर की टीम ने हिमालय में रचा नया इतिहास”

जशपुर 24 सितम्बर 2025 : हिमालय की ऊँचाइयों पर ऐतिहासिक सफलता दर्ज करने के बाद जशपुर की युवा पर्वतारोहण टीम अब घर लौटने की राह पर है। दल ने मनाली के समीप जगतसुख से वापसी यात्रा आरंभ की है। वहाँ से टीम दिल्ली और रांची होते हुए अंततः जशपुर पहुँचेगी।

इस अभियान का नेतृत्व स्वप्निल राचलवार (पहाड़ी बकरा) ने किया, जबकि राहुल ओगरा और हर्ष ठाकुर सह-समन्वयक रहे। अभियान दल में रवि सिंह, तेजल भगत, रूसनाथ भगत, सचिन कुजुर और प्रतीक नायक शामिल रहे।

यात्रा के दौरान टीम ने दुहंगन घाटी में आठ नए पर्वतारोहण मार्ग स्थापित किए। इसके साथ ही, जशपुर की आदिवासी टीम ने जगतसुख शिखर पर नया मार्ग खोलते हुए, मात्र 12 घंटे से भी कम समय में आरोहण पूरा कर वापस बेस कैम्प पहुँचा। यह उपलब्धि विशेषज्ञों द्वारा सराहनीय मानी जा रही है।

अभियान को अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहियों और मार्गदर्शकों का सहयोग भी प्राप्त हुआ। इनमें डेव गेट्स, तोटी वेल्स, एर्नेस्ट वेंतुरिनी, मार्टा पेद्रो और बोए मैरियन जैसे प्रसिद्ध पर्वतारोही शामिल थे।

इस अभियान को संभव बनाने में कई संस्थाओं का योगदान रहा। मुख्य सहयोगी रहे –

हिरा समूह, पेट्ज़ल, एलाइड सेफ़्टी इक्विपमेंट, रेड पांडा आउटडोर्स, रेक्की आउटडोर्स, एड्वेनॉम एडवेंचर वर्क्स तथा जय जंगल फार्मर्स प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड।

दल के सभी सदस्य स्वस्थ और उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यह यात्रा जीवन का अविस्मरणीय अनुभव रही, जिसने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त किया तथा प्रकृति और पर्यावरण के प्रति गहरी समझ दी।

टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अनुभव का उपयोग जशपुर और आसपास के क्षेत्रों में सतत एवं पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने में किया जाएगा। पर्वतारोहण, ट्रेकिंग और प्रकृति-आधारित गतिविधियों को स्थानीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़कर, आने वाले वर्षों में जशपुर को एक नए साहसिक पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की योजना है।

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