जशपुर जिले में धान खरीदी घोटाले से मचा सियासी तूफान — कांग्रेस ने प्रेस वार्ता कर सरकार पर लगाया 100 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप

कुनकुरी, 9 अक्टूबर 2025 : छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ी हलचल मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर से उठी है। जिला कांग्रेस कमेटी ने यहाँ धान खरीदी में हुए कथित घोटाले को लेकर बुधवार को कुनकुरी के विश्राम गृह में प्रेस वार्ता आयोजित की, जिसमें कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर सीधे 100 करोड़ रुपये से अधिक के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।

कांग्रेस ने इसे धान खरीदी घोटाला करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के ही जिले में इस स्तर का भ्रष्टाचार उजागर होना राज्य की नीतियों और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।

नगर पंचायत अध्यक्ष विनयशील ने प्रेस वार्ता में बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जशपुर जिले में धान खरीदी की पूरी प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि फर्जी जमीन और काल्पनिक आंकड़ों के आधार पर फर्जी पंजीयन कर कागजों में धान खरीदी दिखाई गई, जबकि मौके पर धान गायब है

विनयशील ने कहा — “फरसाबहार ब्लॉक की कई मंडियों में मार्च माह में ही धान खत्म हो गया था। अब अक्टूबर आ गया है, लेकिन राइस मिलरों को डीओ जारी किए जा रहे हैं। जब मिलरों ने धान न होने की लिखित शिकायत विभाग को की है, तो यह डीओ जारी करना ही भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा सबूत है।” उन्होंने दावा किया कि केवल फरसाबहार ब्लॉक में ही करीब 15 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है और पूरे जिले का आंकड़ा इससे कई गुना अधिक हो सकता है।

जिला कांग्रेस प्रभारी भानू प्रताप सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना धान खरीदी को ही भ्रष्टाचार ने निगल लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मिलरों ने प्रशासन को यह स्पष्ट कर दिया है कि मंडियों में धान नहीं है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई

भानू प्रताप सिंह ने कहा — “मुख्यमंत्री के गृह जिले में अगर एक ब्लॉक में 14 करोड़ का भ्रष्टाचार हो रहा है और सरकार चुप है, तो यह न सिर्फ लापरवाही है बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है। अगर एक ब्लॉक की स्थिति यह है, तो पूरे जिले में आंकड़ा 100 करोड़ से भी ज्यादा पहुंच सकता है।” उन्होंने मुख्यमंत्री और कलेक्टर से तुरंत संज्ञान लेकर जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सह सचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी जरीता लैतफ्लांग ने इस मुद्दे को राज्यस्तरीय राजनीतिक मुद्दा बताते हुए कहा कि जशपुर को मुख्यमंत्री का “व्हीव्हीआईपी जिला” कहा जाता है, लेकिन यहाँ की स्थिति शर्मनाक है।

उन्होंने कहा — “जब मंडी में धान नहीं है तो डीओ कैसे जारी हो रहे हैं? यह सीधा प्रशासनिक भ्रष्टाचार है। मुख्यमंत्री के जिले में इतना बड़ा घोटाला होना और फिर भी चुप्पी साध लेना बेहद गंभीर बात है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी प्रक्रिया में ऊपर से नीचे तक राजनीतिक संरक्षण प्राप्त भ्रष्टाचारियों की मिलीभगत से यह पूरा घोटाला किया गया है।
लैतफ्लांग ने मुख्यमंत्री से सीधे सवाल पूछा — “क्या आप अपने ही जिले में हुए इस 100 करोड़ के घोटाले पर कार्रवाई करेंगे या फिर इसे दबाने की कोशिश होगी?”

प्रेस वार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने सामूहिक रूप से मांग की कि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की जाए और जो भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि इसमें शामिल हैं, उन पर तत्काल कार्रवाई हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस जिलेभर में आंदोलन छेड़ेगी।

धान खरीदी को लेकर जशपुर में उठे इस घोटाले ने राज्य की राजनीति में नया सियासी मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने जहां इसे “भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण” बताया है, वहीं अब यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री और प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
जिले में किसानों की परेशानियों और मंडियों की स्थिति को लेकर विपक्ष भी अब सक्रिय हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और बढ़ने की संभावना है।

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