रंजिश में दो दोस्तों ने प्लान बना कर की थी साथी की हत्या,
अज्ञात आरोपी के विरूद्ध अपराध क्रमांक 277/2025 धारा 03(1), 238, 3(5) बीएनएस पंजीबद्ध कर प्रारंभ की गई विवेचना.
रायगढ़ : रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में हुए चांदमारी डबरी हत्याकांड का पुलिस ने महज 48 घंटे में खुलासा कर दिया है। इस वारदात ने इलाके में सनसनी फैला दी थी। पुलिस ने हत्या में शामिल दोनों आरोपियों — सुरेश यादव उर्फ लल्ला (26 वर्ष) और अजीत कुमार यादव (23 वर्ष), दोनों निवासी जेलपारा धरमजयगढ़ — को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने रंजिश के चलते अपने ही दोस्त कैलाश सारथी (19 वर्ष) की लोहे की रॉड और पेचकस से बेरहमी से हत्या करना स्वीकार किया है।
21 अक्टूबर की रात मामूली विवाद के बाद दोनों आरोपियों ने योजना बनाकर कैलाश को चांदमारी बुलाया और हमला कर उसकी हत्या की। शव को साक्ष्य छिपाने की नीयत से डबरी के पानी में फेंक दिया गया था। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त हथियार, मृतक का मोबाइल और अन्य साक्ष्य बरामद किए हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के निर्देशन में पुलिस टीम ने यह बड़ी सफलता हासिल की है।
धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के चर्चित चांदमारी डबरी हत्याकांड का धरमजयगढ़ पुलिस ने 48 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस हत्याकांड में सम्मिलित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने मामूली बात की रंजिश के चलते प्लानिंग के साथ युवक के सिर पर लोहे की रॉड और पेचकस से हमला कर हत्या करना स्वीकार किया है।
आज थाना धरमजयगढ़ में एसडीओपी धरमजयगढ़ श्री सिद्दांत तिवारी ने प्रेस कांफ्रेस में हत्याकांड का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि थाना धरमजयगढ़ क्षेत्र के डुगरूपारा निवासी कैलाश सारथी पिता रामपुकार सारथी 19 साल का शव 22 अक्टूबर के सुबह चांदमारी डबरी में पानी के ऊपर तैरता देखा गया, जिसकी सूचना पर एसपी रायगढ़, एएसपी रायगढ़, डीएसपी साइबर सेल के साथ स्वयं, धरमजयगढ़ टीआई, एफएसएल की टीम के साथ घटना-स्थल और शव का निरीक्षण किया गया। मृतक के सिर में गंभीर चोट, दाहिने कान के कटे होने और गले पर नाखूनों के निशान पाए गए थे। घटना-स्थल पर खून के धब्बे और घसीटने के निशान मिलने से स्पष्ट था कि कैलाश की हत्या कर शव को साक्ष्य छिपाने की नीयत से डबरी में फेंका गया है। प्रार्थी मृतक के चाचा रामनिवास सारथी की रिपोर्ट पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ अपराध क्रमांक 277/2025 धारा 103(1), 238, 3(5) बीएनएस पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
पुलिस टीम द्वारा जांच के दौरान मृतक के रिश्तेदारों और मित्रों से पूछताछ की गई, जिनसे पता चला कि घटना की रात कैलाश को आखिरी बार दो युवकों—सुरेश यादव उर्फ लल्ला (26 वर्ष) और अजीत कुमार यादव (23 वर्ष) दोनों निवासी जेलपारा, धरमजयगढ़—के साथ देखा गया था। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उन्होंने अपराध करना स्वीकार कर लिया। पूछताछ में बताया गया कि 21 अक्टूबर की रात करीब 9:00 बजे नराई टिकरा में मृतक कैलाश के साथ गाली-गलौज और विवाद हुआ था, जिससे रंजिश के चलते दोनों ने उसकी हत्या की योजना बनाई। आरोपी सुरेश ने पहले से रॉड को चांदमारी में छिपाया जिसके बाद उसके साथी अजीत ने कैलाश को बहाने से चांदमारी बुलाया, फिर तीनों वहां खाये-पीये इस दौरान आरोपी सुरेश ने मौका देखकर छिपाए लोहे के रॉड को निकाल कर कैलाश के सिर पर वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़ा। इसके बाद अजीत ने मोटर साइकिल में रखे पेचकस से दो-तीन बार सिर पर वार किया, जिससे कैलाश की मौके पर ही मृत्यु हो गई। साक्ष्य छिपाने के लिए दोनों ने शव को घसीट कर डबरी के पानी में फेंक दिया।
पुलिस द्वारा घटना में प्रयुक्त लोहे की रॉड, पेचकस और मृतक का मोबाइल फोन आरोपियों के बताने पर खेत से बरामद किये गए। सुरेश यादव के घटना के समय पहने कपड़े भी जब्त किए गए हैं। हत्या के पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड हेतु माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है, जांच में अन्य आरोपियों की संलिप्तता पाये जाने पर विधि सम्मवत कार्यवाही की जावेगी।
एसपी श्री दिव्यांग पटेल के दिशा निर्देशन तथा एएसपी श्री आकाश मरकाम, डीएसपी साइबर सेल श्री अनिल विश्वकर्मा, एसडीओपी धरमजयगढ़ श्री सिद्दांत तिवारी के मार्गदर्शन पर हत्याकांड के खुलासा में थाना प्रभारी धरमजयगढ़ निरीक्षक सीताराम ध्रुव, सहायक उपनिरीक्षक गंगाराम भगत, सहायक उपनिरीक्षक डेविड टोप्पो, प्रधान आरक्षक प्रकाश गिरी, आरक्षक विकास सिंह, आरक्षक विनय तिवारी, आरक्षक कमलेश राठिया, आरक्षक विजयनंद राठिया, आरक्षक कीर्ति सिदार, आरक्षक हेमलाल बरेठ और आरक्षक ललित राठिया के साथ साइबर सेल के प्रधान आरक्षक राजेश पटेल, प्रधान आरक्षक दुर्गेश सिंह, प्रधान आरक्षक बृजलाल गुर्जर, आरक्षक प्रशांत पंडा, आरक्षक महेश पंडा, आरक्षक पुष्पेन्द्र जाटवर, आरक्षक विक्रम सिंह, आरक्षक विकास प्रधान, आरक्षक नवीन शुक्ला और आरक्षक प्रताप बेहरा की अहम भूमिका रही है।
