कुनकुरी : आस्था, श्रद्धा और सूर्योपासना के महापर्व छठ का शुभारंभ आज पूरे उल्लास और भक्तिभाव के साथ कुनकुरी नगर में हुआ। सुबह से ही महिलाओं की चहल-पहल और भक्तिमय गीतों की गूंज ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
छठ पर्व की शुरुआत आज ‘नहाय-खाय’ के साथ हुई, जिसमें व्रती महिलाएं पवित्र स्नान कर शुद्ध आहार ग्रहण करती हैं और चार दिवसीय व्रत की औपचारिक शुरुआत करती हैं।
भक्तिभाव से सराबोर नगर, तैयारियों में जुटे श्रद्धालु
नगर प्रशासन और स्थानीय समितियों ने छठ पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की हैं। घाटों की साफ-सफाई, रोशनी की व्यवस्था और सुरक्षा के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई है। महिला एवं युवा समितियों ने मिलकर घाटों को रंग-बिरंगी सजावट और फूलों से सजाया है।
नगर की गलियों में ‘केलवा जस गीत’, ‘उग हे सूरज देव’ जैसे पारंपरिक गीतों की मधुर ध्वनि सुनाई दे रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी श्रद्धा से इस पर्व में सहभागी बने हुए हैं।
चार दिवसीय आस्था का पर्व
छठ पर्व चार दिनों तक मनाया जाएगा —
- नहाय-खाय (पहला दिन) – आत्मशुद्धि और व्रत की शुरुआत।
- खरना (दूसरा दिन) – गुड़-चावल की खीर का प्रसाद और निर्जला उपवास की शुरुआत।
- संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन) – अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पण।
- प्रातः अर्घ्य (चौथा दिन) – उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर पर्व का समापन।
नगर में दिखा लोक संस्कृति का अद्भुत संगम
छठ पर्व के अवसर पर पारंपरिक लोकगीतों, पूजा सामग्रियों की दुकानों और प्रसाद के ठेलों से बाजारों में रौनक दिखाई दे रही है। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में व्रत का संकल्प लिया है और घरों में छठ मइया की प्रतिमाओं की सजावट की जा रही है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण, स्वच्छता और सुरक्षा में सहयोग देने की जिम्मेदारी ली है।
श्रद्धा और आस्था का प्रतीक
छठ पर्व न केवल सूर्योपासना का पर्व है, बल्कि यह संयम, शुद्धता और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक भी है। कुंवारी कन्याओं से लेकर वृद्ध महिलाएं तक इस पर्व में पूरे समर्पण और भक्ति भाव से शामिल होती हैं।
