दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर मंडल ने रचा इतिहास: 48 मीटर लंबे और 250 टन वजनी बो–स्ट्रिंग गर्डर का सफल लॉन्चिंग कार्य, इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर मंडल की ऐतिहासिक उपलब्धि

48 मीटर बो–स्ट्रिंग गर्डर का लॉन्चिंग कार्य सफलता पूर्वक संपन्न

रायपुर : दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर मंडल ने इंजीनियरिंग क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री तरुण प्रकाश के दिशा-निर्देशानुसार हावड़ा मुख्य रेल मार्ग के अंतर्गत राजनांदगांव–बाकल सेक्शन में स्थित समपार फाटक संख्या 466 पर निर्मित रोड ओवर ब्रिज (ROB) के लिए 48 मीटर लंबे एवं लगभग 250 टन वजनी बो–स्ट्रिंग गर्डर का सफलतापूर्वक लॉन्चिंग कार्य संपन्न किया गया।

यह अत्यंत जटिल एवं तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण कार्य 2 घंटे 30 मिनट के ट्रैफिक ब्लॉक (अप, डाउन एवं तृतीय लाइन) के दौरान किया गया। गर्डर लॉन्चिंग का कार्य 600 टन क्षमता वाले क्रॉलर माउंटेड रोड क्रेन की सहायता से पूरी तरह सुरक्षित, सुनियोजित एवं समन्वित तरीके से संपन्न हुआ।

उल्लेखनीय है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में किसी भी रेलवे इकाई (गति शक्ति/निर्माण/मंडल) द्वारा इतने भारी (250 टन) एवं लंबे (48 मीटर) बो–स्ट्रिंग गर्डर का यह पहला सफल लॉन्चिंग कार्य है। यह उपलब्धि रेलवे की उन्नत तकनीकी दक्षता, बेहतर योजना एवं समर्पित टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण है।

यह महत्वपूर्ण कार्य महाप्रबंधक श्री तरुण प्रकाश के दिशानिर्देशानुसार तथा नागपुर मंडल रेल प्रबंधक श्री दीपक कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। मंडल रेल प्रबंधक ने इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए इंजीनियरिंग विभाग सहित सभी संबंधित विभागों एवं कर्मचारियों की टीम की सराहना की तथा इसे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के लिए गर्व का विषय बताया।

रोड ओवर ब्रिज (ROB) के निर्माण के साथ ही समपार फाटक गेट को बंद किया जाना सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लेवल क्रॉसिंग ऐसे स्थान होते हैं जहाँ सड़क एवं रेल यातायात एक-दूसरे को काटते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। गेट बंद होने से ट्रेन तथा सड़क वाहनों/पैदल यात्रियों के बीच टक्कर की संभावना समाप्त होगी, अनधिकृत एवं असुरक्षित आवागमन रुकेगा तथा दुर्घटनाओं, मृत्यु एवं गंभीर चोटों में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे रेल परिचालन भी अधिक सुरक्षित एवं सुचारु होगा।

इस उपलब्धि से न केवल क्षेत्र में सड़क एवं रेल यातायात की सुरक्षा एवं सुगमता में वृद्धि होगी, बल्कि भविष्य में ऐसे जटिल संरचनात्मक कार्यों के निष्पादन हेतु दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की तकनीकी क्षमता को भी नई पहचान मिलेगी।

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