सनातन संस्कृति की रक्षा और सामाजिक एकता का लिया गया संकल्प, सैकड़ों लोगों की रही सहभागिता
कुनकुरी/रायकेरा : खण्ड–कुनकुरी मंडल के रायकेरा क्षेत्र में सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक एकजुटता और हिंदू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से एक विशाल हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। सम्मेलन में क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामवासी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं मातृशक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय श्रीमान शौर्य प्रताप सिंह जूदेव जी (उपाध्यक्ष जिला पंचायत एवं राज्य युवा मोर्चा सदस्य) उपस्थित रहे। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में श्रीमान हरिओम शर्मा जी (प्रांत कुटुंब प्रबोधन प्रमुख, छत्तीसगढ़) ने अपने ओजस्वी विचार रखे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमान राजीव रंजन नंदे जी (माननीय जिला संघचालक) ने की, जबकि श्रीमान इंदर हेडा जी (माननीय खण्ड संघचालक) की विशेष उपस्थिति रही।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
सम्मेलन का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलन से किया गया। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति हुई तथा अतिथियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत एवं परिचय कराया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने क्रमवार जनमानस को संबोधित करते हुए सनातन संस्कृति, हिंदू धर्म की महत्ता और सामाजिक समरसता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
संघ के 100 वर्ष और हिंदू समाज के संगठन पर बल
मुख्य अतिथि श्री शौर्य प्रताप सिंह जूदेव जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न आयोजन किए जा रहे हैं, जिनमें यह विशाल हिंदू सम्मेलन भी एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित रखना, अपनी संस्कृति, सभ्यता और धर्म के प्रति सजग रहना हम सभी का राष्ट्रीय कर्तव्य है।
उन्होंने अपने पूज्य दादा स्व. दिलीप सिंह जूदेव जी के कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने धर्मांतरण के विरुद्ध संघर्ष कर हजारों लोगों की घर वापसी कराई और हिंदू धर्म की रक्षा में जीवन समर्पित किया, जिसके कारण वे “हिंदू सम्राट” के नाम से विख्यात हुए। वर्तमान में उनके चाचा श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जी भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
“देश को माँ मानने वाला हर व्यक्ति हिंदू है”
श्री जूदेव ने कहा कि जो भी इस देश को माँ मानता है, वह हिंदू है, भले ही वह किसी अन्य पंथ को मानता हो। उन्होंने देश, धर्म और संस्कृति के विरोधी तत्वों की पहचान करने का आह्वान करते हुए “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के विचार को आत्मसात करने पर जोर दिया।
संघ स्थापना के उद्देश्य और पंच परिवर्तन का संदेश
मुख्य वक्ता श्री हरिओम शर्मा जी ने संघ की स्थापना के ऐतिहासिक प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 27 सितंबर 1925 को नागपुर के मोहितेवाड़ा में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा संघ की स्थापना हिंदू समाज को संगठित करने और अत्याचारों के विरुद्ध खड़ा करने के उद्देश्य से की गई थी।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को मतभेद, विखंडन और लालच से बचाकर एकजुट रखना आज भी समय की आवश्यकता है। उन्होंने “पंच परिवर्तन” के पाँच बिंदुओं—
सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्व का बोध एवं नागरिक कर्तव्य—को अपने जीवन में अपनाने और इसकी शुरुआत अपने घर से करने का विशेष आह्वान मातृशक्ति से किया।
भारत माता की आरती के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित जनों ने भारत माता की सामूहिक आरती की, जिसके पश्चात प्रसाद वितरण किया गया। सम्मेलन में सरपंच, जनप्रतिनिधि, संघ पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
