अग्निकाल से वनों की सुरक्षा को लेकर जशपुर वनमण्डल सतर्क, 6 फरवरी से 15 जून तक की चुनौती से निपटने वनमण्डलस्तरीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण आयोजित

अग्निकाल के दौरान वनों की सुरक्षा हेतु जशपुर वनमण्डल द्वारा वनमण्डलस्तरीय, कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

जशपुर : 6 फरवरी से 15 जून तक की अवधि को अग्निकाल कहा जाता है। इस अवधि में वजों में लगने वाली आग अत्यंत विनाशकारी सिद्ध होती है, जिससे वनों का प्राकृतिक पुनरुत्पादन बाधित होता है, छोटी वनस्पतियां नष्ट हो जाती हैं तथा वृक्षों की काष्ठ गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अग्नि से वनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने एवं प्रभावी प्रबंधन हेतु जशपुर वनमण्डल द्वारा दिनांक 16 जनवरी 2026 को वनगण्डलस्तरीय अग्नि सुरक्षा कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में वनमण्डलाधिकारी जशपुर द्वारा वनों को अग्नि से बचाव हेतु रणनीति, तैयारी एवं प्रबंधन के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि अग्नि की किसी भी घटना की सूचना प्राप्त होते ही संबंधित क्षेत्र के वन कर्मचारी/अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचें तथा अग्नि प्रहरी एवं संयुक्त वन प्रबंधन समिति (JFM) के सदस्यों के सहयोग से आग को शीघ्र नियंत्रित कर बुझाने की कार्यवाही करा समय पर त्वरित प्रतिक्रिया से बड़े पैमाने पर होने वाली क्षति को रोका जा सकता है।

वनमण्डलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर आग लगाने की सूचना प्राप्त होती है या ऐसा कृत्य संज्ञान में आता है, तो संबंधित के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 एवं 79 तथा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9 के अंतर्गत वन अपराध प्रकरण दर्ज कर कठोर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

कार्यशाला के दौरान अग्नि रोकथाम के व्यावहारिक उपायों, जैसे फायर लाइन का निर्माण एवं रख-रखाव, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, सामुदायिक सहभागिता, जनजागरूकता, त्वरित सूचना तंत्र तथा समन्वित कार्रवाई- पर विशेष बल दिया गया। साथ ही, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों एवं ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता को वनों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक बताया गया।

जशपुर वनमण्डल द्वारा समस्त नागरिकों, ग्रामीणों एवं वन आश्रित समुदायों से अपील की गई कि अग्निकाल के दौरान वनों में आग न लगाएं, संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तत्काल वन विभाग को दें तथा वनों के संरक्षण में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। वनों की सुरक्षा हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।

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