बुलडोजर से कानून व्यवस्था की विफलता ढकने की कोशिश: बलात्कार जैसे जघन्य अपराध पर नियंत्रण में नाकाम भाजपा सरकार दिखावटी कार्रवाई से अपनी नाकामी छुपा रही — सुशील आनंद शुक्ला

रायपुर : सरकार अपनी विफलता को छिपाने आरोपी के घर बुलडोजर चला रही है। प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बलात्कार के आरोपी के घर पर बुलडोजर चलाया जाना इस बात का प्रतीक है कि सरकार कानून व्यवस्था को संभाल नहीं पा रही है। उसे अपराधियों पर नियंत्रण के लिये संविधानेत्तर उपायों का सहारा लेना पड़ रहा है। राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद प्रदेश की कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है। अपराधिक घटनाओं को रोक पाने में सरकार असफल साबित हो रही है। लूट, हत्या, बलात्कार, चाकूबाजी की घटनाएं विचलित करने वाली है। भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य में महिलायें असुरक्षित हो गयी है। प्रदेश में रोज 8 बलात्कार घटनाएं हो रही है। सरकार समझ नहीं पा रही है कि आपराधिक घटनाओं को कैसे रोका जाये। कभी पुलिस की प्रणाली में बदलाव कर कमिश्नरी प्रणाली लागू करने की बात की जाती है, तो कभी आरोपी के घर बुलडोजर चला कर अपनी पीठ थपथपा रहे। लेकिन कानून व्यवस्था कैसे सुधारा जाए इसका उपाय सरकार के पास नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि नाबालिक बच्ची से दुष्कर्म का मामला जघन्य अपराध है, ऐसे दुर्दांत अपराधी को फास्ट्रेक कोर्ट में ट्रायल कर तत्काल फांसी देनी चाहिए, ताकि समाज में एक नजीर बने, अपराधियों में पुलिस और कानून का खौफ हो। अवैध निर्माण अतिक्रमण और दुष्कर्म के आरोपी को सजा मिलना यह दोनों अलग-अलग है, दोनों मामलों को जोड़कर मैसेज देने का प्रयास प्रशासन की नाकामी है, अपराध रोक पाने की क्षमता को छुपाने का कुत्सित प्रयास है। यदि निर्माण अवैध था तो प्रशासन क्या इस बात का इंतजार कर रही थी कि आरोपी दुष्कर्म जैसे संगीत अपराध को अंजाम दे?

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि क्या प्रशासन को यह अधिकार है कि अपराधी के पूरे परिवार को सामूहिक रूप से दंडित करें? माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश वाले मामले में स्पष्ट तौर पर कहा है कि बुलडोजर न्याय नहीं विध्वंस का प्रतीक है, जंगल राज का प्रतीक है, सुप्रीम कोर्ट ने तोड़फोड़ के संदर्भ में एडवाइजरी जारी करते हुए यह कहा कि 15 दिन की नोटिस, प्रभावित और संबंधित को पक्ष रखने का समुचित अवसर मिलना चाहिए और आदेश न्यायालय से जारी हो, क्या यह प्रक्रिया पूरी की गई?

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