किसानों-मजदूरों के मुद्दे पर आंदोलन, पर स्थल में वही नदारद
कुनकुरी | धान खरीदी की तिथि बढ़ाने और मनरेगा कानून बचाने की मांग को लेकर कांग्रेस पार्टी द्वारा शुक्रवार को कुनकुरी के जय स्तम्भ चौक पर पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार धरना-प्रदर्शन एवं सांकेतिक चक्का जाम का आयोजन किया गया। हालांकि यह प्रदर्शन जितना मांगों को लेकर चर्चा में रहा, उससे कहीं अधिक अपनी सीमाओं और विरोधाभासों के कारण सुर्खियों में रहा।
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जय स्तम्भ चौक पर धरना दिया तथा एनएच पर सांकेतिक चक्का जाम का प्रयास किया। जैसे ही नेता एनएच की ओर बढ़े, कुनकुरी पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। कुछ नेताओं द्वारा जबरन सड़क पर बैठने की कोशिश की गई, जिन्हें पुलिस ने तत्काल हटा दिया। इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर ही कार्यक्रम सिमटकर रह गया।
यह विरोध प्रदर्शन जिला कांग्रेस कमेटी जशपुर के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें धान खरीदी की तिथि 30 जनवरी 2026 के बाद बढ़ाने तथा मनरेगा कानून में कथित बदलावों का विरोध किया गया। कांग्रेस द्वारा प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि बड़ी संख्या में किसान अब भी धान बेचने से वंचित हैं और समय-सीमा समाप्त होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नेताओं ने मंच से यह भी कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं बल्कि ग्रामीण मजदूरों और किसानों के लिए कानूनी रोजगार गारंटी है, जिसे कमजोर किया जा रहा है। तकनीकी बाधाएं, भुगतान में देरी और मजदूर-विरोधी नियम इस कानून की आत्मा पर प्रहार कर रहे हैं।

जिनके नाम पर आंदोलन, वही रहे नदारद
हालांकि इस पूरे विरोध प्रदर्शन में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि किसानों और मजदूरों के हितों के नाम पर किए जा रहे आंदोलन में किसान और मजदूर ही नजर नहीं आए। मंच पर भाषण जरूर किसानों-मजदूरों के लिए दिए गए, लेकिन धरना स्थल पर उनकी उपस्थिति नगण्य रही। इससे यह सवाल उठने लगा कि क्या यह आंदोलन वास्तव में जनहित का था या केवल औपचारिक राजनीतिक प्रदर्शन बनकर रह गया।
गुटबाजी की छाया भी साफ नजर आई
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी भी खुलकर सामने आई। नगर पंचायत के निर्वाचित अध्यक्ष एक बार फिर पार्टी के कार्यक्रम से अनुपस्थित रहे। यह अनुपस्थिति अब संयोग कम और राजनीतिक संकेत अधिक मानी जा रही है। पार्टी के अंदर समन्वय की कमी का असर आंदोलन की धार पर भी साफ दिखाई दिया।
इस धरना-प्रदर्शन में प्रभारी भानु प्रताप सिंह, जिला कांग्रेस अध्यक्ष यू.डी. मिंज, पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज सागर यादव सहित संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, लेकिन अपेक्षित जनसमर्थन के अभाव में यह आंदोलन प्रभाव छोड़ने में कमजोर नजर आया।
