‘शांतिपूर्ण एवं समृद्ध’ नारायणपुर” के लक्ष्य आधारित नक्सलमुक्त अबूझमाड की दिशा में अंतिम कील ठोंकतें नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2026 का चौंथा कैम्प खोला “हच्चेकोटी” में
माड़ बचाव अभियान के अन्तर्गत थाना सोनपुर क्षेत्रांतर्गत ग्राम हच्चेकोटी में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप.
दशकों से अलग थलग और अछूते अबूझमाड़ के इस क्षेत्र को मिलेगा मुख्य धारा का संपर्क.
नारायणपुर पुलिस, डीआरजी और बस्तर फॉईटर एवं बीएसएफ़ के 86 वीं वाहिनी, 178 वीं वाहिनी, 83वीं वाहिनी, 135 वीं वाहिनी, 129 वीं वाहिनी और 133 वीं वाहिनी ने खोला हच्चेकोटी में जन सुविधा एवं सुरक्षा कैम्प.
नारायणपुर : अबूझमाड़ के घने जंगलों में विकास और सुरक्षा की एक नई रोशनी जली है। दशकों से नक्सल प्रभाव और अलगाव का दंश झेल रहे हच्चेकोटी क्षेत्र में नारायणपुर पुलिस ने नक्सलमुक्त, सुरक्षित और समृद्ध नारायणपुर के संकल्प को मजबूती देते हुए वर्ष 2026 का चौथा सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित कर दिया है। यह कदम न केवल माओवाद पर निर्णायक प्रहार है, बल्कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार के माध्यम से मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल भी है।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में नारायणपुर पुलिस द्वारा नक्सल मुक्त सशक्त बस्तर की कल्पना को साकार रूप देने हेतु क्षेत्र में लगातार नक्सल विरोधी ‘‘माड़ बचाओ’’ अभियान संचालित किया जा रहा है। साथ ही अबूझमाड़ में लगातार नवीन कैम्प स्थापित करते हुए सड़क पुल-पुलिया निर्माण सहित अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं को अंदरूनी गांव तक पहुंचाये जाने में सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
इसी कड़ी में थाना सोनपुर के ग्राम हच्चेकोटी क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों एवं कांदुलनार – कोरसकोड़ो – हच्चेकोटी – आदनार एक्सिस तक सड़क निर्माण कार्य में सुरक्षा प्रदान करने एवं विकास कार्यो में सहयोग पहुंचाने के उद्देश्य से दिनांक 10 फरवरी 2026 को नारायणपुर पुलिस ने घोर नक्सल प्रभावित माड़ क्षेत्र माओवादियों के आश्रय स्थल ग्राम हच्चेकोटी में नवीन कैम्प स्थापित किया गया है। ग्राम हच्चेकोटी में नवीन कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में काफी उत्साह एवं सुरक्षा का माहौल बना हुआ है। नवीन कैम्प हच्चेकोटी थाना सोनपुर क्षेत्रान्तर्गत स्थित है तथा जिला मुख्यालय नारायणपुर से 70 किलोमीटर थाना सोनपुर से 40 किलोमीटर, कांदुलनार से 11 किलोमीटर और कुरसकोड़ो से 05 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
हच्चेकोटी में नवीन कैम्प स्थापित होने से आसपास के क्षेत्र छिंदपुर, झारावाही, आपाटोला, बिनागुण्डा, खेरेगांव और हच्चेकोटी में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, चिकित्सा, मोबाईल नेटवर्क कनेक्टिविटी एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार होगा। अब क्षेत्र में सुरक्षा के निगरानी में सड़क निर्माण सहित अन्य सुविधाओं को आम जनता तक पहुंचाये जाने में सहयोग प्रदान किया जायेगा।
दशकों से अलग थलग और अछूते अबूझमाड़ के इस क्षेत्र को मिलेगा मुख्य धारा का संपर्क। हच्चेकोटी कैंप के द्वारा सोनपुर से कांकेर की सीमावर्ती गाँव आदनार का संपर्क होगा, आम नागरिकों को सड़क सुविधा के माध्यम से अलग-अलग सुविधा और आवागमन की सुलभता प्राप्त हो सकेगी।
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में नक्सलियों के अघोषित राजधानी कुतुल सहित कोडलियार, बेड़माकोटी, पदमकोट, कंडुलपार, नेलांगुर, पांगूड़, रायनार, एडजूम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर, धोबे, डोडीमरका, पदमेटा, लंका, परियादी, काकुर, बालेबेड़ा, कोडेनार, कोडनार, आदिनपार और मन्दोड़ा में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किया गया है।
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2026 में कोहकामेटा थाना क्षेत्रांतर्गत जटवर, वाड़ापेंदा, कुरसकोड़ो और हच्चेकोटी में नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप स्थापित किया है।
श्री पी. सुन्दराज पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज जगदलपुर, श्री रोबिनसन गुरिया पुलिस अधीक्षक नारायणपुर, सेनानी/DIG श्री शंकर लाल बघेल, 16वीं वाहिनी CAF नारायणपुर, सेनानी श्री अनिल सिंह रावत, 86 वीं वाहिनी बीएसएफ़, सेनानी श्री रवि भूषण, 178 वीं वाहिनी बीएसएफ़, सेनानी श्री अरुण गंगवार, 83 वीं वाहिनी बीएसएफ़, सेनानी श्री संजय सिंह, 129 वीं वाहिनी बीएसएफ, सेनानी श्री कमल शर्मा, 133वीं वाहिनी बीएसएफ, टू-आईसी श्री संजीव कुमार, 135 वीं वाहिनी बीएसएफ़, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री अक्षय प्रमोद साबद्रा, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस श्री लौकेश बंसल, उप पुलिस अधीक्षक श्री अरविंद किशोर खलखो, उप पुलिस अधीक्षक श्री अविनाश कंवर, उप पुलिस अधीक्षक श्री अजय कुमार सिंह, उप पुलिस अधीक्षक श्री आशीष नेताम, और रक्षित निरीक्षक श्री सोनू वर्मा के नेतृत्व एवं निर्देशन में नवीन कैम्प स्थापना में नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, बस्तर फॉईटर एवं बीएसएफ़ के 86वीं वाहिनी, 178वीं वाहिनी, 83वीं वाहिनी, 135वीं वाहिनी, 129वीं वाहिनी, और 133वीं वाहिनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
