ब्रेकिंग न्यूज़: जशपुर में बड़ी कार्रवाई — शासकीय स्कूल के व्याख्याता दीपक तिग्गा निलंबित, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने और छात्रों को धार्मिक पुस्तकें बांटने के आरोपों पर लोक शिक्षण संचालनालय का सख्त आदेश

लोक शिक्षण संचालनालय की बड़ी कार्रवाई: शिक्षक दीपक तिग्गा तत्काल प्रभाव से निलंबित

जशपुर : छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक अहम प्रशासनिक कदम उठाते हुए लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने जशपुर जिले के एक व्याख्याता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई शासकीय कार्यों में लापरवाही, अनुशासनहीनता और कर्तव्य के प्रति उदासीनता के आरोपों के बाद की गई है।

क्या है पूरा मामला?

जारी आदेश के अनुसार, श्री दीपक तिग्गा, व्याख्याता (एल.बी.), शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कंसेरा, विकासखंड फरसाबहार, जिला जशपुर (छ.ग.) के विरुद्ध गंभीर शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

कलेक्टर, जिला-जशपुर के पत्र के आधार पर जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित शिक्षक बिना पूर्व सूचना या स्वीकृति के विद्यालय से अनुपस्थित रहते थे। विद्यालयीन समय में अध्यापन कार्य में लापरवाही, पाठ्यक्रम पूर्ण न करना, डायरी संधारण में अनियमितता तथा विद्यार्थियों के हितों की उपेक्षा जैसे आरोप दर्ज किए गए।

मीडिया रिपोर्ट से बढ़ी गंभीरता

आदेश में उल्लेख है कि मीडिया में प्रसारित समाचार के अनुसार दिनांक 10 फरवरी 2026 को श्री तिग्गा द्वारा विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को बाइबल की छोटी-छोटी पुस्तकें वितरित की गई थीं। इस कृत्य को उनके पदीय दायित्वों के विपरीत आचरण के रूप में देखा गया।

प्रशासन ने इसे सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 एवं 7 का उल्लंघन मानते हुए गंभीर कदाचार की श्रेणी में रखा है।

तत्काल निलंबन, मुख्यालय निर्धारित

लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत श्री दीपक तिग्गा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है।

निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय जिला शिक्षा अधिकारी, जिला जशपुर निर्धारित किया गया है। साथ ही नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता (Subsistence Allowance) की पात्रता रहेगी।

शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन का संदेश

इस कार्रवाई को शिक्षा विभाग द्वारा अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में शैक्षणिक वातावरण, पाठ्यक्रम की नियमितता और विद्यार्थियों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

प्रशासनिक हलकों में यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियमों के पालन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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