इतिहास के रहस्यों से उठेगा पर्दा : 8 मार्च को पंडितवा तालाब से राजा किला तक निकलेगा विरासत भ्रमण, क्या है धमधा के इतिहास का अनसुलझा रहस्य ? हेरिटेज वॉक में खोजे जाएंगे चौंकाने वाले जवाब.

धमधा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने के उद्देश्य से “धमधागढ़ हेरिटेज वॉक – पुरखौती विरासत भ्रमण” का आयोजन 8 मार्च (रविवार) को किया गया है। इसमें इतिहास, संस्कृति और विरासत संरक्षण से जुड़े प्रबुद्ध जन भाग लेंगे। यह आयोजन धर्मधाम गौरवगाथा समिति, धमधा द्वारा किया जा रहा है। इसमें भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (INTACH) भिलाई-दुर्ग के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

समिति के संयोजक वीरेंद्र देवांगन एवं सामर्थ्य ताम्रकार ने बताया कि यह विरासत भ्रमण केवल ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन भर नहीं होगा, बल्कि धमधा के इतिहास से जुड़े कई रोचक सवालों के उत्तर भी तलाशे जाएंगे। इसमें यह जानने का प्रयास होगा कि छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में धमधा का नाम क्यों शामिल नहीं है, छै आगर छै कोरी तरिया किस प्रकार मोतियों की माला की तरह जुड़े थे, गोंड राजा कब और किस मार्ग से धमधा पहुंचे थे, त्रिमूर्ति महामाया मंदिर और राजा किला किस प्रकार अभेद किले के रूप में प्रसिद्ध थे तथा बूढ़ादेव मंदिर का इतिहास और धमधा के राजा की मनौती क्या थी।

इसके अलावा प्रतिभागियों को धमधा के प्राचीन कांसा उद्योग में लोटा ढलने की प्रक्रिया, सौ वर्ष पुराने घरों और दुकानों के इतिहास सहित कई ऐतिहासिक तथ्यों से अवगत कराया जाएगा। इन विषयों से जुड़ी कई जानकारियां अंग्रेजों के समय की पुस्तकों और शोध से प्राप्त हुई हैं।

कार्यक्रम के तहत सुबह 9:00 बजे पंडितवा तालाब से विरासत भ्रमण प्रारंभ होगा, जो चौखड़िया तालाब, महामाया मंदिर, राजा किला होते हुए तमेरपारा स्थित कांसा उद्योग और प्राचीन बसाहट तक जाएगा। इसके बाद दोपहर 3:00 बजे (संभावित) रेस्ट हाउस में संगोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें विरासत संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी।

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