- यातायात विश्लेषण के आधार पर यातायात पुलिस बिलासपुर ने जारी किया वाहन चालकों के लिए विशेष सुरक्षा संदेश
- सीट बेल्ट एवं हेलमेट के संबंध में दी गई सुरक्षा फीचर का वाहन चलाते समय यात्रीगण न करें उल्लंघन
- सीट बेल्ट के सबन्ध में “सेफ्टी फीचर्स सीट बेल्ट”, “चाइल्ड सीट बेल्ट“ “अलार्म/ बीप“ से सम्बंधित प्रणालियों में न करे छेड़छाड़
- सीट बेल्ट में दो तरह से टेक्नोलॉजी सिस्टम काम करती है “प्री टेंशनर एवं दूसरा फोर्स लिमिटर“ इसको लगाने हेतु कभी भी न करें परहेज
- हेलमेट में भी तीन तरह के सिस्टम दिए गए हैं जिसमें हॉफ फेस, फुल फेस और दोनों कम्बो। तीनो में सुरक्षा के लिहाज से फूल फेस हेलमेट ही लगावें
- “ट्रैफिक सेंस“ अथवा यातायात अनुशासन का न सिर्फ स्वयं पालन करें अपितु आम नागरिकों के लिए मानक भी स्थापित करें
बिलासपुर : सड़क दुर्घटना के आकड़ो और विश्लेषण के पश्चात “सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय“ द्वारा वाहन चालकों के लिए विभिन्न दिशा निर्देश जारी किया गया है। जिसके तहत वाहन के सामने दो सीटों के अलावा पीछे के सीटों में भी सीट बेल्ट लगाना अनिवार्य किया गया साथ ही नई वर्जन की गाड़ियों में “चाइल्ड सीट बेल्ट“ की भी प्रावधान किए गए। सीट बेल्ट नही लगाने पर वाहन में “अलार्म/ बीप“ की आवाज की भी प्रावधान किया गया है। परंतु वाहन चालकों में एवं वाहन में सवार होकर यात्रा करने वाले व्यक्तियों में सीट बेल्ट को लेकर गंभीरता नहीं बरती जाती और वाहन में मौजूद “सेफ्टी फीचर्स सीट बेल्ट“ को अलार्म की आवाज से मुक्त होने हेतु शीट के पीछे घुमा कर रख दिया जाता है और स्वयं की सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुते लापरवाही बरतते है जिसके कारण दुर्घटना के समय सेफ्टी फीचर के रूप में वाहन में मौजूद “एयर बैग“ ठीक से काम नही कर पाता है।
सीट बेल्ट में दो तरह से टेक्नोलॉजी सिस्टम काम करती है “प्री टेंशनर एवं दूसरा फोर्स लिमिटर“। जिसमें “प्री टेंशनर“ वाहन के इंपैक्ट होने या टकराने पर बॉडी सामने की तरफ ना झुके इसके लिए प्री टेंशनर बॉडी को सीट के साथ जकड़ कर रखता है उसके बाद जैसे ही एयर बेग खुलता है “फोर्स लिमिटर“ बॉडी को ईयर बेग के ऊपर धीरे धीरे रिलीज करता है जिससे शरीर में चोट नही लगती है और शरीर के वाइटल पार्ट सुरक्षित होने से व्यक्ति की मृत्यु होने की संभावना कम हो जाती है परंतु अधिकांश वाहन चालकों एवं वाहनों में यात्रा करने वाले व्यक्तियों को इस संबंध में जानकारी नहीं होने के कारण वाहनों में सिक्योरिटी फीचर होने के बावजूद भी उसका सही इस्तेमाल नहीं होने से आकस्मिक एवं असमय दुर्घटना के परिणाम स्वरूप जान जोखिम में आ जाती है।
इसी तरह वाहन के पीछे सीट में बैठने वालो के लिए वाहन में रियर साइड “सीट बेल्ट“ का सिस्टम दिया गया है परंतु सेफ्टी मेजर को ध्यान में नही रखते हुए नही लगाने की आदत अभी भी लोगों में बनी हुई है और आलार्म की आवाज से बचने हेतु वे सीट बेल्ट को लगाने हेतु नजरअंदाज करते हैं और पीछे मोड़कर उसके लाकर या हुक में लगा देते हैं।
पहले के वाहनों में सीट बेल्ट 2 पॉइंट का ही होता था जिसमें शरीर में मजबूत पकड़ नहीं हो पाती थी परंतु वर्तमान में सीट बेल्ट को 3 प्वाइंटों में किया गया है जिससे शरीर के ऊपरी हिस्सों में मजबूती तो रहती ही है साथ ही कमर के निचले हिस्सों को भी बांधकर रखती है उक्त सिक्योरिटी फीचर को नजर अंदाज करने से वाहनों में तमाम तरह की सुरक्षात्मक उपकरण लगाए जाने के बावजूद भी गंभीर दुर्घटनाओं में लोगों की मृत्यु होना गंभीर विषय है अतः इस पर लगातार लोगों को जागरूक होने की आवश्यकता है।
सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा के उपरांत यह पाया गया है कि दो पहिया वाहनों में सवार यात्रियों की मृत्यु का कारण तेज रफ्तार के साथ-साथ हेलमेट का धारण नहीं करना भी पाया गया है अतः हेलमेट को नजरअंदाज करना जान जोखिम में डालने से कम नहीं है हेलमेट में भी तीन तरह के सिस्टम दिए गए हैं जिसमें हॉफ फेस, फुल फेस और दोनों कम्बो। हॉफ फेस हेलमेट लगाने की आदत अधिकांशत है नौकरीपेशा या कामकाजी महिलाओं एवँ युवतियों में देखी जा रही है जिसके कारण कामकाजी महिलाओं के सड़क दुर्घटना के दौरान मृत्यु की संख्या बढ़ी है।
विभिन्न रोजगार में संलग्न पुरुषों के द्वारा भी हॉफ फेस हेलमेट का इस्तेमाल किया जाता है ताकि समय अनुसार उसको कहीं पर भी निकाल के वाहनों में रखी जा सके जबकि यह दोनों हेलमेट सुरक्षा के लिहाज से कदाचित परिपूर्ण नहीं है सुरक्षा के लिहाज से फुल फेस आई एस आई मार्क हेलमेट ही मस्तिष्क को सुरक्षित रखने हेतु पर्याप्त मानी जा सकती है।
आजकल वाहनों में साइड स्टैंड सेंसर एवं डिजिटल टाइमिंग की भी सुविधा है परंतु फिर भी मोटरसाइकिल चालक के द्वारा कई बार फोन उठाने, टाइम देखने, साइड स्टैंड चेक करने आदि के कारण से सामने आने वाली वाहनों से ध्यान भटक जाती है और एक्सीडेंट का खतरा बना रहता है।
दो पहिया वाहन चालकों के द्वारा हेलमेट धारण नहीं करना एवं चार पहिया वाहन चालकों के द्वारा सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करना वर्तमान में सड़क दुर्घटनाओं में एक्सीडेंट के प्रमुख कारण है जिससे वाहन चालक की आकस्मिक दुर्घटना में मृत्यु तो होती ही है उसके पीछे बैठे हुए अबोध एवं मासूम व्यक्तियों की भी असमय मृत्यु की स्थिति बनती है साथ ही सीट बेल्ट एवं हेलमेट धारण नहीं करने के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में सामने से आ रही समुचित यातायात नियमों का पालन करने वाले व्यक्ति की भी मृत्यु की गभीर संभावना बन रहती रहती है।
सड़क दुर्घटना न सिर्फ एक वाहन चालक मात्र के मानवीय क्षति के रूप में देखी जा सकती है अपितु सड़क दुर्घटनाओं में अधिकांश वाहन चालक अपने घर के जिम्मेदारी संभालने वाले प्रमुख एवं युवा वर्ग व्यक्ति होते हैं सड़क दुर्घटनाओं में अधिकांश व्यक्ति युवा वर्ग से आते हैं जिससे घर के दैनिक जरूरत को पूर्ति करने वाले व्यक्ति से परिवार को महरूम होना पड़ता है साथ ही घर के जिम्मेदारी को संभालने वाले प्रमुख व्यक्ति होने के कारण उसके बाद उसके परिवार की आर्थिक और मानसिक जरूरत की पूर्ति करने वाला नहीं होने से एक परिवार को मानवीय क्षति के रूप में भयंकर कीमत चुकानी पड़ती है।
फिर भी यातायात नियमों के प्रति आम जनमानस में पालन को लेकर अच्छा रिस्पांस नहीं देखी जाती। खास करके शहर के पेरीफेरल वाले एरिया में या ग्रामीण क्षेत्रों में इसका और भी ज्यादा उल्लंघन होता है यातायात के संकेतक चिन्हों, इंडिकेटर और अन्य मापदंडों का पालन नहीं करने के कारण सड़क दुर्घटनाओं से असमय मृत्यु होना देश और प्रदेश के लिए गंभीर मुद्दा एवं चिंता का विषय है।

छत्तीसगढ़ राजपत्र में ’“मोटर यान अधिनियम“ के तहत धारा 194 (घ) में “सिर के सुरक्षा पहनावा को नहीं पहनने वालों के लिए दंड (समन शुल्क) की राशि ₹500 रखी गई है वहीं पश्चातवर्ती उल्लंघन पर पुनः ₹500 की दंड का प्रावधान निर्धारित है।
मोटरयान अधिनियम के “धार 194 (ख) (1)- सुरक्षा बेल्ट के बिना वाहन चलाना या ऐसे यात्रियों को ले जाना जिन्होंने सीट बेल्ट नहीं पहने हो“ उसके लिए ₹500 दंड (समन शुल्क) निर्धारित है वही इसके पक्षतवर्ती या द्वितीय अपराध के लिए ₹1000 की राशि से दंड का प्रावधान है।
राजपत्र के उक्त प्राधिकार से परिवहन विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग को उक्त धाराओं पर गंभीरता से कार्यवाही करने हेतु प्राधिकृत कर दिया गया है वाहन चालान के दौरान हेलमेट लगाने एवं सीट बेल्ट पहनने की अनिवार्यता के बावजूद भी लोगों में अपने जान माल की सुरक्षा को ध्यान एवं प्राथमिकता में ना रखते हुए पुलिस की “चालानी कार्यवाही“ और भय से पुलिस के दृश्य स्थल पर ही सीट बेल्ट लगाने एवं स्वयं की सुरक्षा को दरकिनार करने की आदत आज भी आमजन में परिलक्षित हो रही है। जिसके लिए लगातार उक्त सभी विभाग मिलकर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्यवाही कर रहे हैं परंतु फिर भी लोगों में यातायात के नियमों का पालन करने को लेकर “ट्रैफिक सेंस“ का विकास अपेक्षा अनुरूप नहीं हो पा रहा है।
आम जनमानस में यातायात नियमों के पालन के प्रति सजगता, गंभीरता एवं स्वमेव पालन की आदत की प्रवृत्ति विकसित करने हेतु “ट्रैफिक सेंस“ के विकास के लिए लगातार जन जागरूकता अभियान का आयोजन किया जा रहा है इस हेतु “सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय“ द्वारा निर्देश का पालन करते हुए लगातार प्रत्येक वर्ष “राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह“ का आयोजन भी किया जा रहा है जिसके क्रम में नियमित रूप से प्रत्येक “वर्ष 1 जनवरी से लेकर 31 जनवरी“ तक विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से आम जनमानस में यातायात नियमों के प्रति जागरुकता लाने वाहन चालान के निर्धारित मापदंडों और धाराओं का उल्लंघन नही करने और सदैव यातायात संकेतकों का अनुसरण करते हुए वाहन चालन की प्रवृत्ति व आदत निर्मित करने वाली “मांस कल्चर विकसित“ करने का प्रयास जारी है जिसके तहत प्रत्येक जिलों में यातायात मित्र बनाकर “यातायात नियमों के जानकारी प्रदाता एवं संवाहक“ के रूप में गैर विभागीय व्यक्तियों का भी सहयोग लिया जा रहा है जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और लोगों की जान माल को आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाए जा सके।
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु हेतु लगातार चालानी कार्रवाई के साथ-साथ सड़कों के इंजीनियरिंग में सुधार एवं जन जागरूकता के साथ नागरिक संगठनों का सहयोग लेते हुए हो सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु आमजन में यातायात नियमों के प्रति गंभीरता पूर्वक पालन करने की परंपरा लाने एवं लोगों में “ट्रेफिक सेंस“ विकसित करने हेतु राज्य के द्वारा चलाई जा रही “राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सुरक्षा माह“ के क्रम मे आम नागरिकों सहित विभिन्न नागरिक संगठनों, स्व सहायता समूहों, व्यापारिक और औद्योगिक संस्थानों, विभिन्न प्रकार के विक्रय करने वाले दुकानों, सराफा व्यायसायियों, होटल, लाज, ढाबा संचालकों, सब्जी मंडी संचालकों, निजी, स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग संस्थानों, विभिन्न फर्मो के संचालकों एवं राज्य के अनेकानेक कर्मचारी आधारित कार्यशील संस्थानों आदि को हेलमेट लगाकर ही यात्रा करने एवं कार्यस्थल तक आने हेतु हिदायत दिया जा रहा है।
समस्त वाहन डीलरों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने हेतु अपने एजेंसी के सामने यातायात नियमों से संबंधित “नियम तालिका“ एवं “प्रमुख चालानी धाराओं“ का तालिका बनाकर एजेंसी के सामने लगाने एवं दुर्घटना के परिणाम के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान करने संबंधी होर्डिंग लगाने निर्देशित किया गया ताकि वाहन खरीदते समय समस्त आम ग्राहकों, वाहन क्रेताओं को यह संज्ञान में आ सके कि वाहन चालन के दौरान यातायात नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
वाहन चालन के दौरान यातायात नियमों की उल्लंघन से न सिर्फ यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति आहत होते है अपितु आतायात नियमोँ का समुचित पालन करने वाला मासूम व्यक्ति की भी कई बार ऐसे वाहन चालको की वाहन के चपेट में आकर गंभीर रूप से आहत होते है और कई बार आकस्मिक रूप मृत्यु तक हो जाती है।
समस्त वाहन विक्रेताओं, डीलरों को हिदायत दिया जा रहा है कि एजेंसी में कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों को स्वस्फूर्त होकर सड़क दुर्घटनाओं को ध्यान में रखते हुए अनिवार्य रूप से हेलमेट प्रदान करें ताकि असमय होने वाले सड़क दुर्घटनाओं में जान जोखिम की संभावना न रहे।
यातायात जागरूकता अभियान के परिणाम स्वरूप समस्त वाहन डीलरों ने यातायात नियमों के पालन किए जाने के संबंध में मोटरयान अधिनियंक के निर्देशित धाराओं का शब्दशः पालन करने हेतु आश्वासन दे रहे है कई पेट्रोल पम्प संचालकों के द्वारा ’’हेलमेट नही तो पेट्रोल नही’’ नारा लिखकर लोगों को हेलमेट लगाने हेतु जागरूक कर रहें है, एवं राज्य में यातायात व्यवस्था सरल, सुगम, सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित बनाए रखने एवं राज्य में यातायात नियमो के प्रति लोगों को जागरूक करने में यातायात पुलिस की सदैव सहयोगी और सहगामी बनकर हर संभव सहयोग प्रदान करने अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर रहे है ।
सड़क दुर्घटनाओं की समीक्षा पर यह पाई गई है कि अधिकांश दुर्घटनाएं तेज रफ्तार में वाहन चालन, सीट बेल्ट एवं हेलमेट धारण नहीं करना पाया गया है तेज रफ्तार वाहन चालन के दौरान सीट बेल्ट नहीं पहने एवं हेलमेट धारण नहीं करने से शरीर के “वाइटल पार्ट“ सर्वाधिक प्रभावित होते हैं जिससे आकस्मिक मृत्यु का कारण बनता है इसे ध्यान में रखते हुए “पुलिस मुख्यालय“ एवं “सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय“ द्वारा निरंतर और अधिकायत में सड़क दुर्घटनाजन्य जगह को “ब्लैक स्पॉट“ के रूप में चिन्हित कर तथा उक्त स्थान की “रोड सिक्योरिटी ऑडिट“ करते हुए उक्त स्थान पर हो रहे दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों को जानने निर्देशित की जाती है इस क्रम में राजस्व, पुलिस, परिवहन, पी डब्लू डी, नगरनिगम आदि का संयुक्त टीम बनाकर उसका अवलोकन एवं निरीक्षण किया जाता है और उक्त निर्देश के पालन में लगातार राज्य के विभिन्न जिलों में ब्लैक स्पॉट में हो रही सड़क दुर्घटनाजन्य जगहों का अवलोकन एवं निरीक्षण करके प्रतिवेदन के आधार पर आवश्यक कार्यवाही किया जाकर उसके दुर्घटना के कारणों को इंजीनियरिंग, इंफोर्समेंट और ट्रेफिक एजुकेशन के माध्यम से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
यातायात पुलिस बिलासपुर की समस्त वाहन चालकों एवं नागरिकों से अपील है कि वाहन चलाते समय सदैव सीट बेल्ट एवं हेलमेट का प्रयोग अवश्य करें तथा सेफ्टी फीचर सीट बेल्ट और निर्धारित मानकों के अनुसार आई एस आई मार्क के हेलमेट ही धारण करें।
