जसवंत क्लॉडियस की कलम से निकला सच: वैशाली की उपलब्धि के जरिए खेल जगत को आईना, प्रतिभाओं को पहचान देने में भारतीय मीडिया की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

शतरंज : कैंडिडेट्स चैंपियनशिप-भारत की वैशाली रमेशबाबू बनी विजेता

स्थिर चित्त, खुद पर भरोसा, माता पिता के आशीर्वाद से मिली सफलता

आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टीवी कमेंटेटर

रायपुर : शतरंज एक ऐसा खेल है जिसकी उत्पत्ति को भारत में माना जाता है। अतः यह भारत का पुरातन खेल है जो आज भी हमारे देश में न सिर्फ खेला जाता है बल्कि जिनके भारतीय खिलाडिय़ों ने पूरी दुनिया में धूम मचाया हुआ है। शतरंज का समावेश आधुनिक ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों में भले ही नहीं है पंरतु उसकी लोकप्रियता का कोई मुकाबला भी नहीं है। क्लासिकल स्टाइल में आज भारत की ओर से विश्व में 10वें नंबर के खिलाड़ी अर्जुन ईरीगेसी को 2751 रेटिंग प्राप्त है जबकि 11वें नंबर के खिलाड़ी प्रज्ञानंद रमेश बाबू 2741 रेटिंग के साथ विश्व चैंपियन भी है।

इसी तरह 15वीं वरीयता प्राप्त सुकेश देमाराजू को 2732 रेटिंग है। साथ ही विश्व में 20वें क्रम पर निहाल जरीन 2723 रेटिंग के साथ हैं। इसी तरह महिलाओं में 2470 अंकों के साथ कोनेरू हम्पी पहले स्थान पर, हरिका ड्रोनवल्ली 2470 अंकों के साथ दूसरे और वैशाली रमेशबाबू इतने ही अंकों के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत के लिए यह गर्व की बात है कि भारत की वैशाली हाल ही में महिला वर्ग में केंडिडेट्स शंतरंज टूर्नामेंट 2026 की चैंपियन बनी है। ऐसी उपलब्धि हासिल करने वाली वह भारत की पहली तथा एकमात्र महिला शतरंज खिलाड़ी हैं।

इस सफलता के साथ ही वैशाली अब महिला विश्व चैंपियनशिप जीतने के लिए जोर लगाएंगी जहां उनका मुकाबला वर्तमान चैंपियन चीन की जू वेनजून के साथ इसी वर्ष होगा। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वैशाली के भाई प्रज्ञानंद विश्व चैंपियन हैं। इस प्रकार एक ही परिवार के दो सदस्यों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने शानदार प्रदर्शन के द्वारा भारत का झंडा विश्व शतरंज मंच पर उठाए हुए है। शतरंज के खेल में सफलता पाने के लिए वैशाली ने बताया कि उन्होंने अपने प्रतिद्वद्वियों के विरुद्ध शांत मन से मुकाबला किया। सामने कोई भी विरोधी हो अपने आप को उस पर जीत का आत्मविश्वास बनाए रखा तथा एक और बड़ी बात उन्हेांने कहीं कि उनकी मां का पूरे चैंपियनशिप के दौरान साथ मिला। अर्थात् इस जीत में माता जी का योगदान विशेष रूप से रहा।

उन्होंने कामयाबी मिलने पर इस बात का रहस्योद्घाटन किया कि मुकाबले के दौरान भी माता जी की उपस्थिति साए की तरह रही। 24 वर्षीय वैशाली आज भारत में शतरंज की महिला खिलाडिय़ों बल्कि किसी भी खेल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन की सोच रखने वाली प्रत्येक महिला खिलाड़ी की आदर्श बन गई हैं। कभी-कभी आश्चर्य होता है कि वैशाली की उपलब्धि को भारतीय मीडिया में विशेष स्थान नहीं मिला। फिलहाल यह कहा जाता है कि भारत के खेल मीडिया को वैशाली जैसी खिलाडिय़ों की सफलता को दिखाने में कोई कंजूसी नहीं करनी चाहिए।

शतरंज के खेल को भले ही एक बंद हाल, इंडोर स्टेडियम में खेला जाता है किंतु यह जानकार हमें अत्यंत गर्व होता है कि इस खेल में इन दिनों भारत की तरफ से महिला और पुरुष वर्ग में 27 ग्रैंड मास्टर अपनी अपनी चुनौती शतरंज के तीनों प्रारूपों यथा क्लिनिकल, रैपिड और ब्लिट्ज के अंतरराष्ट्रीय मैच में चुनौती पेश कर रहे हैं। इस आंकड़े पर विस्तृत अध्ययन करने से हमें पाते हैं कि भारत को 2697 रेटिंग के साथ शतरंज खेलनेवाले 204 देशों में विश्व में दूसरा स्थान प्राप्त है।

इस प्रकार वैशाली की सफलता ने आज के युवा खिलाडिय़ों के समक्ष मुकाबले के दौरान अधिक उतावला न होने , विपक्षी पर जीतने का विश्वास रखने का सबक सिखाया है। जिसे प्रत्येक खेल के खिलाड़ी को आगे बढऩे के लिए हमेशा याद रखना चाहिए तथा उन्होंने स्पर्धा के दौरान माता-पिता, प्रशिक्षक, अभिभावक के साथ होने के मनोवैज्ञानिक महत्व को भी स्वीकार किया।

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