रूह कंपा देने वाला फैसला: कलयुगी बेटे द्वारा मां की टंगिया से निर्मम हत्या मामले में कुनकुरी कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद, न्यायाधीश की टिप्पणी —‘यह अपराध मानवता पर धब्बा है’

कुनकुरी : जशपुर जिले के कुनकुरी स्थित द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने एक रूह कंपा देने वाले हत्याकांड में अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया है । अपनी ही मां की कुल्हाड़ी मारकर निर्मम हत्या करने वाले आरोपी बेटे कमल राम को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है । न्यायाधीश बलराम कुमार देवांगन ने इस घटना को मानवता को शर्मसार करने वाली और सामाजिक व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती करार दिया है ।

दिल दहला देने वाली वारदात: दोपहर की नींद बनी आखिरी नींद

यह मामला तुमला थाना क्षेत्र के ग्राम फरदबहार का है । घटना दिनांक 6 अगस्त 2025 की दोपहर करीब 2:30 बजे की है । अभियोजन के अनुसार, मृतिका दशमति बाई अपने भाई सुबरन राम के घर आई हुई थी और घर की परछी में चटाई बिछाकर आराम कर रही थी । इसी दौरान उसका बेटा कमल राम (25 वर्ष) वहां पहुंचा और किसी बात पर हुए विवाद के बाद अचानक अपनी मां के गले पर धारदार टंगिया (कुल्हाड़ी) से ताबड़तोड़ वार कर दिए । मौके पर मौजूद चश्मदीद गवाहों ने बताया कि हमला इतना भीषण था कि दशमति बाई की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई ।

जिस माँ ने जन्म दिया, उसकी हत्या अक्षम्य” – न्यायाधीश की तल्ख टिप्पणी

मामले की सुनवाई करते हुए विद्वान न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने इस अपराध को अत्यंत गंभीर श्रेणी का माना । सजा के प्रश्न पर विचार करते हुए उन्होंने अपने आदेश में उल्लेख किया कि:

जिस माँ ने जन्म दिया, उसी की निर्मम हत्या कर देना मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज में गिरते पारिवारिक मूल्यों का संकेत है, जो किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है।”

अभियोजन की मजबूत पैरवी और वैज्ञानिक साक्ष्य

इस संवेदनशील मामले में अपर लोक अभियोजक श्रीमती पुष्पा सिंह ने शासन का पक्ष मजबूती से रखा । उन्होंने अपराध की क्रूरता को देखते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी । मामले को साबित करने में डॉ. ममता भगत की चिकित्सीय रिपोर्ट और एफएसएल (FSL) साक्ष्य महत्वपूर्ण रहे, जिन्होंने पुष्टि की कि आरोपी के टीशर्ट और कुल्हाड़ी पर मिले खून के धब्बे मानव रक्त के ही थे । न्यायालय ने माना कि आरोपी ने जानते-बूझते हुए गले जैसे नाजुक अंग पर वार किया ताकि मृत्यु कारित की जा सके ।

आजीवन कारावास और अर्थदंड का फैसला

न्यायालय ने आरोपी कमल राम को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 103(1) के तहत दोषी पाया । हालांकि बचाव पक्ष ने आरोपी की कम उम्र का हवाला देते हुए नरमी बरतने की अपील की थी, लेकिन अदालत ने इसे ‘विरलतम’ (Rare of rarest) न मानते हुए भी न्यूनतम अनिवार्य सजा के रूप में आजीवन कारावास और 1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई । अर्थदंड न पटाने की स्थिति में आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा ।

पीड़ित क्षतिपूर्ति के निर्देश

न्याय को पूर्णता प्रदान करते हुए न्यायाधीश श्री बलराम कुमार देवांगन ने मृतिका के पति को ‘पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना’ के तहत मुआवजा दिलाने हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जशपुर को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश भी जारी किए हैं ।

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