कैरियर बनाना है तो स्वीकार करनी होगी चुनौती
अंतर्राष्ट्रीय खेल पत्रकार दिवस : प्रेस क्लब रायपुर में हुआ पत्रकारों का सम्मान
आलेख .. जसवंत क्लॉडियस, वरिष्ठ स्वतंत्र खेल पत्रकार, टी वी कमेंटेटर, रायपुर ,छ ग
रायपुर : एक दूसरे के बारे में जानना, एक दूसरे को समझना, समाज में विभिन्न राष्ट्रों की गतिविधियों की जानकारी देना, एक दूसरे की जीवन शैली रहन-सहन, खान-पान से अवगत होने के लिए जो प्रक्रिया अपनाई जाती है वस्तुत: वही पत्रकारिता की ओर आगे बढ़ने का पहला कदम होता है। अब विभिन्न क्षेत्रों की विषयों की जानकारी का आदान प्रदान पत्रकारिता की जड़ों को मजबूत कर रहा है। 02 जुलाई को रायपुर प्रेस क्लब में अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर खेल पत्रकारों का सम्मान किया गया. निश्चित रूप से यह आयोजन युवा पीढ़ी को खेल पत्रकारिता में आगे आने के लिए मददगार साबित होगा।पत्रकारिता का आरंभ प्राचीन रोम में ईसा पूर्व 59 से माना जाता है। जब सार्वजनिक स्थानों पर राजाओं /शासकों द्वारा जनता के लिए सूचना लटका दी जाती थी जिसे एक्टा डायर्ना कहते हैं।फिर लंबे अंतराल के बाद 15 वीं सदी में जर्मनी के जोहानन गुटोनबर्ग द्वारा विश्व के पहले प्रिटिंग प्रेस का अविष्कार किया गया. जिसकी वजह से सभी सूचनाओं को एक ही जगह संकलित करके प्रकाशित करने की परंपरा की शुरुवात हुई. आखिरकार 1609 में जर्मनी से पहले नियमित समाचार पत्र के प्रकाशित होने का रास्ता साफ हुआ।
मनुष्य की इस अभिलाषा ने कि उन्हें और अधिक विषयों, स्थानों, राजघरानों, शासकों की नवीनतम जानकारी प्राप्त करने की इच्छा बढ़ा दी,जिससे ब्रिटेन में पहली बार 1622 में साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन प्रारंभ हुआ। भारत में अंग्रेजी पत्रकारिता की शुरूआत का श्रेय जेम्स आगस्टस हिक्की को जाता है। उन्होंने 1780 में कलकत्ता जनरल एडवरटाइजर (बंगाल गजट) का प्रकाशन शुरू किया। 1819 में “संवाद कौमुदी” का बंगाली भाषा में प्रकाशन हुआ। यह प्रथम भारतीय भाषायी पत्रकारिता का प्रमाण माना जाता है। जिसे राजा राममोहन राय ने निकाला था। भारत में हिन्दी पत्रकारिता की शुरूवात पंडित जुगल किशोर शुक्ला द्वारा 30 मई 1826 को निकाले गये पहले समाचार पत्र’उदंत मार्तण्य’ के माध्यम से हुआ। विश्व में 18 वीं सदी से साक्षर लोगों की संख्या बढ़ने लगी. तब धीरे धीरे करके 19 वीं सदी लगते ही अलग-अलग विषय पर अपनी अपनी पसंद के अनुसार समाचार/ जानकारी की मांग होने लगी. 1896 में एथेंस में आधुनिक ओलंपिक खेलों के आरंभ होने के साथ खेल संबंधी कीर्तिमान की जानकारी/समाचार आदि का महत्व बढ़ गया।
कृषि, उद्योग, व्यापार, प्रथम विश्वयुद्ध ,स्वास्थ्य शिक्षा आदि से संबंधित बढ़ती जानकारी की मांग ने खेल समाचार संकलन करने वालों के मन मस्तिष्क में खेल पत्रकारिता के पृथक रूप से प्रकाशन का इच्छा हुई और आखिरकार 1924 में पेरिस ओलंपिक के दौरान 2 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रेस संघ का गठन हुआ। जिसकी 70वीं वर्षगांठ 1994 में इंटरनेशनल स्पोर्ट्स प्रेस एसोसिएशन द्वारा मनाई गई। उसी दिन से प्रत्येक वर्ष 2 जुलाई को विश्व खेल पत्रकार दिवस मनाया जाता है। 21 वीं सदी में इलेक्ट्रानिक मीडिया रेडियो, टेलीविजन, सोशल मीडिया,डिजिटल माध्यम के साथ प्रिंट मीडिया ने खेल पत्रकारिता में क्रांति ला दी है। अब चूंकि घर बैठे, चलते फिरते पूरे संसार में खेले जा रहे लगभग किसी भी मैच को देखा जा सकता है।अत: खेल पत्रकारिता का महत्व बढ़ गया है।
ओलंपिक,फीफा सहित क्रिकेट विश्वकप खेल के जीवंत प्रसारण के लिए करोड़ों रुपये की प्राप्ति मीडिया राइट्स के द्वारा होती है। मैच के कवरेज के लिए फोटो खेल पत्रकार, कैमरामैन, इंजीनियर आकड़ा उपलब्ध कराने वाले, कमेंटेटर व अन्य विशेषज्ञ सहयोगियों की जरूरत होती है। इसलिए खेल पत्रकारिता के अनेक क्षेत्रों में कैरियर की संभावना बहुत बढ़ गई है। आज खेल पत्रकार को आधुनिक तकनीक की जानकारी होना जरूरी है। प्रतियोगिता के दौरान मैच के कवरेज में साथ चलने वाले रिपोर्टिंग के कारण खेल पत्रकार को जोखिम भी बहुत उठाना पड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय खेल पत्रकार दिवस का मुख्य उद्देश्य निष्पक्षता और नैतिकता को बढ़ावा देना है। इसलिए 2026 के अंतरराष्ट्रीय खेल पत्रकार दिवस का विषय ” ईमानदारी और प्रभाव के साथ रिपोर्टिंग ” अर्थात खेल की तरह पत्रकारिता में भी फेयर प्ले का समर्थन है .युवाओं को यह बताना आवश्यक है कि कैरियर बनाने के लिए खेल पत्रकारिता में असीमित संभावनाएं हैं. अत: युवाओं को इसे चुनने के लिए प्रेरित करना भी अंतर्राष्ट्रीय खेल पत्रकारिता दिवस का उद्देश्य है।
खेल पत्रकार खेल और खिलाड़ियों के बीच सेतु का काम करता है जिससे दोनों के आपस में संबंध बने रहते हैं . इसके अलावा एक खेल पत्रकार समाज को नई दिशा देता है जिसमें खेल का जीवन में महत्व, खेल से समय की पाबंदी, खेल से अनुशासन, खेल में हार से फिर जितने की हिम्मत बढ़ाना आदि का कार्य करता है. अतः खेल पत्रकार को सम्मान और प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता है जो आज का दिन हम सब को सिखाता है।
