‘श्रेष्ठ शिक्षा वही, जो समाज और राष्ट्र को नई दिशा दे’ — लोयोला दिवस पर कुनकुरी में उमड़ा उत्साह, संत इग्नासियुस लोयोला के आदर्शों के साथ भव्य सांस्कृतिक आयोजन ने बांधा समां

कुनकुरी :  लोयोला महाविद्यालय, कुनकुरी में दो दिवसीय ‘लोयोला दिवस’ का आयोजन श्रद्धा, उत्साह और गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शिक्षा, सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को केंद्र में रखते हुए विद्यार्थियों को संत इग्नासियुस लोयोला के आदर्शों पर चलने का प्रेरक संदेश दिया गया। रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रेरणादायी उद्बोधनों और सम्मान समारोह ने पूरे परिसर को उल्लास, ऊर्जा और आध्यात्मिक प्रेरणा से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य श्रद्धेय डॉ. फा. तेलेस्फोर लकड़ा, उप प्राचार्य श्रद्धेय फा. मार्टिन मंगल तिर्की, श्रद्धेय डॉ. फा. इग्नस किण्डो एवं प्राध्यापक प्रतिनिधि श्रीमती कंचन बेक द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद सभी संकायों के छात्र-छात्राओं ने मनमोहक नृत्य, समूहगान, एकांकी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

अपने प्रेरक उद्बोधन में उप प्राचार्य फा. मार्टिन मंगल तिर्की ने येसु समाज के संस्थापक संत इग्नासियुस लोयोला के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे प्रत्येक दिन स्वयं को पहले से बेहतर बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि ऐसा कार्य करें मानो सब कुछ आप पर निर्भर करता है और ऐसी प्रार्थना करें मानो सब कुछ ईश्वर पर निर्भर करता है।” यही जीवन को सफलता और सार्थकता की ओर ले जाने का मार्ग है।

मुख्य अतिथि एवं महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फा. तेलेस्फोर लकड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि सेवा, ईमानदारी और समर्पण ही सच्चे व्यक्तित्व की पहचान हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि चरित्रवान युवा ही देश का उज्ज्वल भविष्य गढ़ते हैं। उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि असफलता हमें और अधिक मेहनत करने की प्रेरणा देती है तथा सफलता व्यक्ति को और अधिक मजबूत बनाती है।

उन्होंने कहा कि संत इग्नासियुस लोयोला के विचार आज भी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं। “सेवा ही धर्म है” और “ईश्वर की महत्तर महिमा के लिए श्रेष्ठ से श्रेष्ठतम की ओर बढ़ना” जैसे उनके सिद्धांत समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। लोयोला महाविद्यालय इन्हीं मूल्यों को आत्मसात कर विद्यार्थियों को उत्कृष्ट नागरिक बनाने की दिशा में सतत कार्य कर रहा है।

कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक शारदा सिंह ने किया, जबकि सहायक प्राध्यापक दिलेश्वर यादव ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिवार द्वारा येसु समाज के पुरोहितों का स्वागत गीत, भेंट अर्पण एवं मानपत्र के माध्यम से सम्मान किया गया।

दो दिवसीय लोयोला उत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों के लिए सेवा, नैतिकता, अनुशासन, उत्कृष्टता और ईश्वर के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी संदेश बनकर उभरा। पूरे आयोजन ने यह संदेश दिया कि श्रेष्ठ शिक्षा वही है, जो ज्ञान के साथ संस्कार, सेवा और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का भाव भी विकसित करे।

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